Last updated: July 15th, 2026 at 12:42 pm

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में दिल्ली सरकार ने नागरिकों को तय समय-सीमा के भीतर सरकारी सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से ‘दिल्ली (राइट ऑफ सिटिजन टू टाइम बाउंड एंड ईज ऑफ डिलीवरी ऑफ सर्विसेज) बिल, 2026’ को मंजूरी दे दी है। सरकार का कहना है कि नया कानून प्रशासन में पारदर्शिता, जवाबदेही और डिजिटल सेवा वितरण को बढ़ावा देगा।
समय पर सेवाएं देना होगा अनिवार्य
प्रस्तावित कानून लागू होने के बाद विभिन्न सरकारी विभागों को निर्धारित समय के भीतर नागरिकों को सेवाएं उपलब्ध करानी होंगी। सरकार का दावा है कि इससे लोगों को सरकारी दफ्तरों के बार-बार चक्कर लगाने की जरूरत कम होगी और अधिकांश प्रक्रियाएं ऑनलाइन पूरी की जा सकेंगी।
2011 के कानून की जगह लेगा नया बिल
दिल्ली सरकार के अनुसार, यह नया विधेयक वर्ष 2011 के राइट टू सर्विस कानून का स्थान लेगा। मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) ने बताया कि यह कानून नागरिकों को समयबद्ध सरकारी सेवाएं पाने का कानूनी अधिकार देगा और आधुनिक, तकनीक-आधारित प्रशासनिक व्यवस्था स्थापित करेगा।
डिजिटल प्रक्रिया और ऑटोमैटिक एस्केलेशन की व्यवस्था
बिल के तहत सरकारी सेवाओं की पूरी प्रक्रिया एंड-टू-एंड डिजिटल होगी। यदि किसी आवेदन या सेवा में तय समय-सीमा से अधिक देरी होती है, तो मामला स्वतः संबंधित वरिष्ठ अधिकारी के पास पहुंच जाएगा, जिससे लंबित मामलों पर समय रहते कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
शिकायत निवारण आयोग और जुर्माने का प्रावधान
नए कानून में नागरिकों की शिकायतों के समाधान के लिए दिल्ली राइट टू सर्विस कमीशन के गठन का प्रस्ताव है। यह आयोग विभिन्न विभागों की कार्यप्रणाली की निगरानी करेगा। साथ ही, यदि किसी अधिकारी की लापरवाही या अनावश्यक देरी के कारण सेवा समय पर नहीं मिलती है, तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ जुर्माना और अन्य कार्रवाई का भी प्रावधान किया गया है।
‘विकसित दिल्ली’ की दिशा में अहम कदम
दिल्ली सरकार का कहना है कि यह विधेयक नागरिक-केंद्रित, पारदर्शी और तकनीक आधारित शासन व्यवस्था को मजबूत करेगा। सरकार के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य आम लोगों और कारोबार से जुड़े नागरिकों को अधिक प्रभावी, तेज और जवाबदेह सरकारी सेवाएं उपलब्ध कराना है।
![]()
Comments are off for this post.