Last updated: July 15th, 2026 at 01:20 pm

दिल्ली के आईबी अधिकारी अंकित शर्मा हत्याकांड में पूर्व आम आदमी पार्टी (AAP) पार्षद ताहिर हुसैन को दोषी ठहराए जाने के बाद दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने आम आदमी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व पर तीखा राजनीतिक हमला बोला। मुख्यमंत्री ने कहा कि अदालत का फैसला पीड़ित परिवार के लिए न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन इस मामले में आम आदमी पार्टी के शीर्ष नेताओं को भी जनता के सामने अपनी भूमिका स्पष्ट करनी चाहिए।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मीडिया से बातचीत में कहा कि वर्ष 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों ने राजधानी को गहरा नुकसान पहुंचाया था। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय राजनीतिक संरक्षण के कारण कई गंभीर सवाल अनुत्तरित रह गए। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब जब अदालत ने ताहिर हुसैन को दोषी ठहराया है, तब आम आदमी पार्टी के नेतृत्व को यह बताना चाहिए कि उसका एक पूर्व जनप्रतिनिधि इतने गंभीर मामले में कैसे दोषी पाया गया।
रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली के लोगों ने दंगों के दौरान जान-माल का भारी नुकसान झेला था और कई परिवार आज भी उस त्रासदी को नहीं भूल पाए हैं। उन्होंने कहा कि न्यायिक प्रक्रिया पर सभी को भरोसा रखना चाहिए और अदालत के फैसले का सम्मान करना चाहिए। उनके अनुसार, कानून से ऊपर कोई नहीं है और दोषियों को उनके अपराध के अनुसार सजा मिलनी चाहिए।
मुख्यमंत्री के बयान के बाद भाजपा नेताओं ने भी आम आदमी पार्टी पर निशाना साधा। भाजपा का आरोप है कि ताहिर हुसैन को लंबे समय तक राजनीतिक संरक्षण मिला। पार्टी ने कहा कि दिल्ली की जनता इस पूरे घटनाक्रम को भूली नहीं है और विपक्ष को इस मुद्दे पर जवाब देना चाहिए। भाजपा नेताओं ने इसे कानून के शासन की जीत बताते हुए कहा कि न्यायिक प्रक्रिया ने अपना काम किया है।
वहीं आम आदमी पार्टी ने भाजपा के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि ताहिर हुसैन को उनके खिलाफ आरोप सामने आने के बाद काफी पहले ही पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था। पार्टी का कहना है कि किसी भी व्यक्ति के व्यक्तिगत कृत्य के लिए पूरी पार्टी को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। AAP ने कहा कि वह न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान करती है और अदालत के निर्णय पर कोई टिप्पणी नहीं करेगी।
उधर अदालत ने अपने विस्तृत आदेश में कहा कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ताहिर हुसैन और अन्य दोषियों की भूमिका सिद्ध होती है। अदालत ने सजा पर अंतिम बहस के लिए अगली तारीख निर्धारित की है। इस फैसले के बाद दिल्ली की राजनीति में एक बार फिर 2020 के दंगों का मुद्दा चर्चा के केंद्र में आ गया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस फैसले के बाद दिल्ली में भाजपा और आम आदमी पार्टी के बीच राजनीतिक टकराव और तेज हो सकता है। एक ओर भाजपा इस मुद्दे को कानून-व्यवस्था और जवाबदेही से जोड़कर उठा रही है, जबकि AAP का कहना है कि अदालत का फैसला एक व्यक्तिगत मामले से जुड़ा है और इसका राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए. विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा दिल्ली की राजनीति में प्रमुख चर्चा का विषय बना रह सकता है।
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