Last updated: July 18th, 2026 at 03:56 pm

सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को शनिवार को दिल्ली के जंतर-मंतर से अस्पताल ले जाया गया, जहां वह पिछले 20 दिनों से अधिक समय से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे थे। उनकी बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने यह कार्रवाई की। इससे पहले दिल्ली हाई कोर्ट के निर्देश पर उनकी नियमित चिकित्सकीय जांच कराई जा रही थी। अस्पताल प्रशासन के अनुसार वांगचुक में गंभीर डिहाइड्रेशन और स्वास्थ्य संबंधी अन्य जटिलताओं के संकेत मिले हैं।
दिल्ली पुलिस के अनुसार डॉक्टरों की सलाह और न्यायालय के निर्देशों के आधार पर वांगचुक को अस्पताल ले जाया गया। पुलिस का कहना है कि उनकी जान को खतरा बढ़ रहा था, इसलिए चिकित्सकीय निगरानी में रखना आवश्यक था। हालांकि वांगचुक के समर्थकों ने आरोप लगाया कि उन्हें उनकी इच्छा के विरुद्ध जंतर-मंतर से हटाया गया। इस दौरान प्रदर्शन स्थल पर कुछ देर के लिए तनाव की स्थिति भी बनी, लेकिन पुलिस ने हालात पर जल्द नियंत्रण पा लिया।
अस्पताल प्रशासन ने बताया कि भर्ती किए जाने के बाद भी सोनम वांगचुक ने शुरुआत में आईवी फ्लूइड (ड्रिप) और दवाएं लेने से इनकार कर दिया। डॉक्टरों ने चेतावनी दी कि लंबे समय तक भूख हड़ताल जारी रहने से शरीर में पानी और आवश्यक खनिजों की गंभीर कमी हो सकती है, जिससे स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। चिकित्सकों की एक विशेष टीम लगातार उनकी निगरानी कर रही है और उनकी स्थिति का समय-समय पर आकलन किया जा रहा है।
घटना के बाद जंतर-मंतर पर मौजूद समर्थकों ने पुलिस कार्रवाई का विरोध किया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि वांगचुक को अचानक हटाया गया और उन्हें पर्याप्त समय भी नहीं दिया गया। वहीं दिल्ली पुलिस ने इन आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि पूरी कार्रवाई कानून के दायरे में और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार की गई। पुलिस का कहना है कि राजधानी में कानून-व्यवस्था बनाए रखना और किसी भी अप्रिय स्थिति से बचना उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी है।
इस घटनाक्रम पर सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की कि वह सोनम वांगचुक की मांगों पर संवाद करे और मामले का शांतिपूर्ण समाधान निकाले। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक चलने वाले अनशन को केवल कानून-व्यवस्था का विषय नहीं माना जाना चाहिए, बल्कि बातचीत के माध्यम से समाधान तलाशा जाना चाहिए।
राजनीतिक हलकों में भी इस घटना को लेकर प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। विपक्षी दलों ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं, जबकि प्रशासन का कहना है कि यह कदम पूरी तरह स्वास्थ्य कारणों से उठाया गया। इस बीच सुरक्षा एजेंसियों ने जंतर-मंतर और आसपास के क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी है ताकि किसी भी प्रकार की अव्यवस्था न हो।
सोनम वांगचुक अस्पताल में चिकित्सकीय निगरानी में हैं। डॉक्टर उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए हैं। प्रशासन का कहना है कि उनका उपचार चिकित्सकीय सलाह के अनुसार जारी रहेगा, जबकि उनके समर्थक उनकी मांगों पर सरकार से शीघ्र बातचीत की मांग कर रहे हैं। आने वाले दिनों में उनकी स्वास्थ्य स्थिति और आंदोलन की दिशा पर सभी की नजर बनी रहेगी।
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