Last updated: August 7th, 2026 at 04:50 pm

दिल्ली सरकार ने सरकारी अस्पतालों में दवाओं और चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता को बेहतर बनाने के लिए मेडिकल सामान की खरीद व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है। सरकार ने Central Procurement Agency (CPA) की खरीद संबंधी भूमिका को अंतरिम तौर पर निलंबित करते हुए सरकारी अस्पतालों को आवश्यक मेडिकल सामान सीधे खरीदने की अनुमति दी है। सरकार का उद्देश्य अस्पतालों में दवाओं और जरूरी उपकरणों की कमी को दूर करना और मरीजों को समय पर उपचार उपलब्ध कराना है।
सरकारी अस्पतालों में दवाओं, सर्जिकल उपकरणों और अन्य चिकित्सा सामग्री की आपूर्ति को लेकर समय-समय पर शिकायतें सामने आती रही हैं। कई अस्पतालों में आवश्यक सामान की उपलब्धता प्रभावित होने के कारण मरीजों और स्वास्थ्य कर्मचारियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। नई व्यवस्था के जरिए सरकार इस समस्या को कम करने की कोशिश कर रही है।
नई व्यवस्था के तहत अस्पताल प्रशासन को अपनी वास्तविक जरूरत के अनुसार आवश्यक चिकित्सा सामग्री खरीदने की अनुमति दी जाएगी। इससे अस्पतालों को केंद्रीय स्तर पर खरीद प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। सरकार का मानना है कि इससे खरीद प्रक्रिया अधिक तेज हो सकती है और मरीजों के उपचार में देरी की संभावना कम होगी।
अधिकारियों के अनुसार, अस्पतालों को खरीदारी करते समय निर्धारित वित्तीय और प्रशासनिक नियमों का पालन करना होगा। सीधे खरीद की अनुमति का अर्थ यह नहीं है कि अस्पताल बिना प्रक्रिया के किसी भी विक्रेता से सामान खरीद सकेंगे। खरीद में गुणवत्ता, कीमत, दस्तावेज और अन्य निर्धारित मानकों का पालन करना आवश्यक होगा।
सरकार के इस निर्णय को स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दिल्ली में बड़ी संख्या में मरीज सरकारी अस्पतालों पर निर्भर हैं। इनमें दिल्ली के अलावा आसपास के राज्यों से आने वाले मरीज भी शामिल हैं। ऐसे में दवाओं और चिकित्सा उपकरणों की नियमित उपलब्धता अस्पतालों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से अस्पतालों को निर्देश दिया गया है कि वे अपनी आवश्यकताओं का नियमित आकलन करें और महत्वपूर्ण दवाओं तथा उपकरणों का पर्याप्त स्टॉक बनाए रखें। विशेष रूप से आपातकालीन सेवाओं में इस्तेमाल होने वाली चिकित्सा सामग्री की उपलब्धता पर प्राथमिकता से ध्यान देने को कहा गया है।
स्वास्थ्य क्षेत्र के विशेषज्ञों का कहना है कि विकेंद्रीकृत खरीद व्यवस्था से अस्पतालों को अपनी स्थानीय जरूरत के अनुसार तेजी से निर्णय लेने में मदद मिल सकती है। हालांकि इसके साथ पारदर्शिता और निगरानी भी उतनी ही महत्वपूर्ण होगी। यदि खरीद प्रक्रिया पर उचित नियंत्रण नहीं रहा तो लागत और गुणवत्ता से संबंधित समस्याएं पैदा हो सकती हैं।
सरकार ने संकेत दिया है कि नई व्यवस्था की नियमित समीक्षा की जाएगी। अस्पतालों द्वारा की गई खरीद, खर्च और स्टॉक की स्थिति पर निगरानी रखी जाएगी ताकि किसी प्रकार की अनियमितता की संभावना को रोका जा सके। जरूरत के अनुसार भविष्य में खरीद प्रणाली में और बदलाव किए जा सकते हैं।
अस्पताल प्रशासन के लिए यह व्यवस्था विशेष रूप से उन परिस्थितियों में उपयोगी हो सकती है जब किसी जरूरी दवा या उपकरण की तत्काल आवश्यकता हो। केंद्रीय खरीद प्रक्रिया में देरी होने की स्थिति में स्थानीय स्तर पर खरीद की क्षमता अस्पतालों को अधिक लचीला बनाएगी।
मरीजों और उनके परिजनों के लिए इस बदलाव का सबसे महत्वपूर्ण संभावित लाभ यह होगा कि जरूरी दवाओं और चिकित्सा सामान की उपलब्धता में सुधार हो सके। हालांकि इसका वास्तविक प्रभाव नई व्यवस्था के लागू होने और अस्पतालों की खरीद क्षमता पर निर्भर करेगा।
दिल्ली सरकार का कहना है कि स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार उसकी प्राथमिकताओं में शामिल है। सरकारी अस्पतालों में मरीजों को समय पर और बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के लिए प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने पर लगातार काम किया जा रहा है।
अस्पतालों को नई व्यवस्था के तहत आवश्यक मेडिकल सामान की खरीद शुरू करने की अनुमति दी गई है। आने वाले समय में सरकार इसकी समीक्षा कर यह तय करेगी कि व्यवस्था को स्थायी रूप से जारी रखा जाए या केंद्रीय खरीद प्रणाली में आवश्यक सुधार किए जाएं।
![]()
Comments are off for this post.