Last updated: August 13th, 2026 at 02:46 pm

श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने लोगों से अपील की कि ‘हर घर तिरंगा’ अभियान को केवल राष्ट्रीय ध्वज फहराने तक सीमित न रखा जाए, बल्कि देशभक्ति की भावना को नागरिकों के व्यवहार, सोच और दैनिक जीवन में भी उतारा जाए।
श्रीनगर के बॉटनिकल गार्डन में आयोजित तिरंगा महोत्सव को संबोधित करते हुए सिन्हा ने कहा कि 2022 में शुरू हुई ‘हर घर तिरंगा’ पहल अब देशभर में राष्ट्रीय उत्सव का रूप ले चुकी है। उन्होंने कहा कि घर-घर लहराता तिरंगा देश के प्रति लोगों के गर्व, विश्वास और जिम्मेदारी की भावना को दर्शाता है।
‘वंदे मातरम’ अभियान में J&K की भागीदारी की सराहना
उपराज्यपाल ने ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर चल रहे आयोजनों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह गीत भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान लोगों में आत्मविश्वास, साहस और आत्मसम्मान जगाने का माध्यम बना था।
सिन्हा ने जम्मू-कश्मीर में ‘वंदे मातरम’ अभियान को लेकर लोगों की भागीदारी की सराहना करते हुए कहा कि केंद्र शासित प्रदेश के नागरिकों और युवाओं का उत्साह पूरे देश के लिए प्रेरणादायक है। उन्होंने अभियान में जम्मू-कश्मीर की स्थिति को बनाए रखने के लिए निरंतर सामूहिक प्रयास की अपील की।
देशभक्ति को जिम्मेदारियों से जोड़ने पर जोर
मनोज सिन्हा ने कहा कि देश के प्रति सम्मान केवल प्रतीकों और आयोजनों तक सीमित नहीं होना चाहिए। वर्तमान पीढ़ी को ईमानदारी, अनुशासन, एकता, जिम्मेदारी और कर्तव्यनिष्ठा के जरिए राष्ट्र निर्माण में योगदान देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों और सैनिकों ने देश के लिए त्याग और बलिदान दिया। आज की पीढ़ी का दायित्व है कि वह अपने कार्यों के जरिए एक मजबूत, सुरक्षित और समृद्ध भारत के निर्माण में योगदान दे।
जिलों में दिखा लोगों का उत्साह
उपराज्यपाल ने बांदीपोरा, बारामूला, पुलवामा, पुंछ, राजौरी, किश्तवाड़, जम्मू और श्रीनगर समेत विभिन्न क्षेत्रों में लोगों की भागीदारी का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जब अलग-अलग क्षेत्रों के नागरिक राष्ट्रीय अभियानों में एकजुट होकर भाग लेते हैं, तो इससे राष्ट्रीय एकता की भावना और मजबूत होती है।
उन्होंने नागरिकों से संकल्प लेने को कहा कि तिरंगा केवल घरों की छतों पर ही नहीं, बल्कि उनके आचरण और जिम्मेदारियों में भी सम्मान के साथ दिखाई दे। सिन्हा ने कहा कि ‘हर घर तिरंगा’ और ‘वंदे मातरम’ जैसे अभियान जम्मू-कश्मीर में बदलते सामाजिक माहौल, विकास की आकांक्षा और देश के साथ जुड़ाव की भावना को भी दर्शाते हैं।
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