Last updated: August 19th, 2026 at 10:21 am

पटना/नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी ने राष्ट्रीय संगठन की नई टीम का ऐलान कर दिया है। पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन की नई टीम में कई पुराने नेताओं को अहम जिम्मेदारियां मिली हैं, जबकि कुछ चेहरों की संगठन में वापसी भी हुई है। इसके साथ ही आगामी चुनावों को देखते हुए अलग-अलग राज्यों के प्रभारी और सह-प्रभारी भी नियुक्त किए गए हैं।
हालांकि, नई सूची में दो अनुभवी नेताओं की गैरमौजूदगी ने राजनीतिक चर्चा को जरूर बढ़ा दिया है। धर्मेंद्र प्रधान और मंगल पांडेय को इस बार राष्ट्रीय संगठन में कोई जिम्मेदारी नहीं मिली है। दोनों नेताओं की हालिया राजनीतिक स्थिति को देखते हुए पहले ऐसी अटकलें थीं कि उन्हें संगठन में महत्वपूर्ण भूमिका दी जा सकती है।
धर्मेंद्र प्रधान को लेकर क्या हैं कयास?
धर्मेंद्र प्रधान केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार में लंबे समय तक महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। ओडिशा की राजनीति में प्रभाव रखने वाले प्रधान को संगठन और चुनावी रणनीति का अनुभवी चेहरा माना जाता है।
केंद्रीय मंत्रिपरिषद से बाहर होने के बाद यह चर्चा तेज हुई थी कि भाजपा उन्हें राष्ट्रीय संगठन में बड़ी जिम्मेदारी दे सकती है। बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान भी उन्हें महत्वपूर्ण राजनीतिक जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
लेकिन नई राष्ट्रीय टीम में नाम नहीं होने के बाद अब उनके अगले कदम को लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। संभावना जताई जा रही है कि पार्टी उन्हें किसी राज्य के चुनाव प्रभारी या किसी विशेष चुनावी अभियान की जिम्मेदारी दे सकती है। हालांकि, भाजपा की ओर से इस संबंध में फिलहाल कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिया गया है।
मंगल पांडेय को भी संगठन में जगह नहीं
बिहार भाजपा के वरिष्ठ नेता मंगल पांडेय की स्थिति भी चर्चा का विषय बनी हुई है। पांडेय बिहार सरकार में स्वास्थ्य मंत्री रह चुके हैं और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष के साथ-साथ पश्चिम बंगाल के प्रभारी जैसी अहम जिम्मेदारियां भी संभाल चुके हैं।
सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने के बाद बनी नई बिहार सरकार में उन्हें मंत्री पद नहीं मिला। इसके बाद राजनीतिक हलकों में यह संभावना जताई गई थी कि भाजपा उन्हें राष्ट्रीय संगठन में महत्वपूर्ण भूमिका दे सकती है।
लेकिन नितिन नवीन की घोषित टीम में मंगल पांडेय का नाम नहीं होने से अब उनके अगले राजनीतिक दायित्व को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं।
चुनावी राज्यों में दूसरे नेताओं को मिली जिम्मेदारी
भाजपा ने आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए संगठनात्मक स्तर पर बदलाव किए हैं। उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी विनोद तावड़े को दी गई है, जबकि पंजाब और गुजरात के लिए भी नए प्रभारी नियुक्त किए गए हैं।
ऐसे में प्रधान और पांडेय को तत्काल राष्ट्रीय संगठन में पद नहीं मिलने के बावजूद उनकी चुनावी उपयोगिता खत्म नहीं मानी जा रही है। भाजपा में राष्ट्रीय पदाधिकारी और चुनावी जिम्मेदारियां अलग-अलग स्तर पर तय की जाती हैं। इसलिए आने वाले समय में दोनों नेताओं को किसी खास राज्य या चुनावी अभियान की जिम्मेदारी मिलने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
क्या नई भूमिका का इंतजार कर रहे हैं दोनों नेता?
राष्ट्रीय टीम में जगह नहीं मिलने को किसी नेता के राजनीतिक भविष्य पर अंतिम फैसला नहीं माना जा सकता। भाजपा में चुनाव समितियों, राज्य प्रभारियों और विभिन्न अभियानों के लिए अलग-अलग स्तर पर जिम्मेदारियां तय होती रहती हैं।
इसी वजह से धर्मेंद्र प्रधान और मंगल पांडेय को लेकर तस्वीर अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। पार्टी उन्हें किसी चुनावी राज्य में जिम्मेदारी देती है या संगठन के किसी अन्य स्तर पर भूमिका तय करती है, यह आने वाले समय में सामने आएगा।
फिलहाल भाजपा की नई टीम में इन दोनों अनुभवी नेताओं की अनुपस्थिति ने राजनीतिक गलियारों में चर्चा जरूर बढ़ा दी है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि पार्टी आने वाले महीनों में धर्मेंद्र प्रधान और मंगल पांडेय को कौन-सी नई जिम्मेदारी सौंपती है।
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