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UP Panchayat Election 2027: पंचायत चुनाव में देरी के आसार, ग्राम प्रधानों का कार्यकाल फिर बढ़ने की चर्चा

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर तस्वीर अभी पूरी तरह साफ नहीं हुई है। चुनावी प्रक्रिया में
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लखनऊ: उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर तस्वीर अभी पूरी तरह साफ नहीं हुई है। चुनावी प्रक्रिया में आरक्षण से जुड़ी कवायद लंबी खिंचने के कारण पंचायत चुनाव अगले साल तक टलने की संभावना जताई जा रही है। ऐसे में ग्राम प्रधानों के मौजूदा कार्यकाल को लेकर भी एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है।

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    राज्य में पंचायत चुनाव अप्रैल 2026 में प्रस्तावित थे, लेकिन निर्धारित समय पर चुनाव नहीं हो सके। इसके बाद सरकार ने ग्राम प्रधानों का कार्यकाल आगे बढ़ाया था। अब आरक्षण प्रक्रिया पूरी होने में लगने वाले समय और विधानसभा चुनाव की तैयारियों को देखते हुए पंचायत चुनाव में और देरी की संभावना बन रही है।

    आरक्षण प्रक्रिया बनी चुनाव में देरी की बड़ी वजह

    ग्राम प्रधान, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत के पदों के लिए आरक्षण तय करने की प्रक्रिया फिलहाल जारी है। राज्य सरकार ने सभी जिलों से ग्राम पंचायतवार 14 बिंदुओं पर जानकारी मांगी है। इसी डेटा के आधार पर आगामी पंचायत चुनावों के लिए आरक्षण का निर्धारण किया जाएगा।

    आरक्षण प्रक्रिया को लेकर पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट भी अहम मानी जा रही है। रिपोर्ट नवंबर-दिसंबर के आसपास आने की संभावना है। इसके बाद शासन स्तर पर आरक्षण की अंतिम सूची तैयार होगी और उस पर आपत्तियां भी मांगी जाएंगी।

    रिपोर्ट के बाद ही आगे बढ़ेगी चुनावी प्रक्रिया

    आरक्षण की अंतिम सूची जारी होने के बाद आपत्तियों का निस्तारण किया जाएगा। इसके बाद ही पंचायत चुनाव की अधिसूचना जारी होने की स्थिति बनेगी। पूरी प्रक्रिया में लगने वाले समय को देखते हुए चुनाव के अगले साल तक जाने की संभावना बढ़ गई है।

    इसी वजह से ग्राम पंचायतों में प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। सरकार को चुनाव तक पंचायतों का कामकाज चलाने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करनी पड़ सकती है।

    प्रधानों के कार्यकाल को लेकर क्या स्थिति?

    ग्राम प्रधानों का कार्यकाल 26 मई 2026 को समाप्त हुआ था। इसके बाद छह महीने की अवधि के लिए प्रशासनिक व्यवस्था लागू की गई। मौजूदा व्यवस्था नवंबर 2026 के आसपास पूरी होनी है।

    अगर उस समय तक पंचायत चुनाव की प्रक्रिया पूरी नहीं होती है, तो सरकार के सामने पंचायतों के संचालन को लेकर नया फैसला लेने की चुनौती होगी। हालांकि, प्रधानों को दोबारा कार्यकाल देने या किसी अन्य प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर अंतिम फैसला सरकार की ओर से आधिकारिक रूप से स्पष्ट किया जाना बाकी है।

    पंचायत चुनाव के साथ विधानसभा चुनाव भी अहम

    उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियां भी इसी अवधि के आसपास तेज होंगी। ऐसे में पंचायत चुनाव की समय-सारिणी तय करना सरकार के लिए महत्वपूर्ण चुनौती होगी।

    फिलहाल आरक्षण रिपोर्ट, आपत्तियों के निस्तारण और चुनावी अधिसूचना की प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार है। इसलिए ग्राम प्रधानों की आगे की भूमिका और पंचायत चुनाव की तारीखों को लेकर अंतिम तस्वीर आने वाले महीनों में ही साफ होने की उम्मीद है।

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