Last updated: August 20th, 2026 at 06:00 pm

वंदे मातरम् को लेकर कांग्रेस के फैसले के बाद देश की सियासत में बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में पार्टी ने 1937 के प्रस्ताव को आधार बनाते हुए अपने कार्यक्रमों में वंदे मातरम् के पहले दो पदों को ही गाने का फैसला किया है। इस फैसले पर बीजेपी और जेडीयू नेताओं ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है।
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कांग्रेस के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस का रुख भारत के विरोधियों की भाषा से मिलता-जुलता है। उन्होंने सोशल मीडिया पर जारी वीडियो संदेश में कांग्रेस पर राष्ट्रगीत के सम्मान को लेकर सवाल उठाए और कहा कि पार्टी देशभक्ति के नाम पर जनता को गुमराह कर रही है।
गिरिराज सिंह ने कांग्रेस के मौजूदा रुख को लेकर ‘अर्बन नक्सल’ और ‘दिमागी नक्सल’ जैसे शब्दों का भी इस्तेमाल किया। उनके बयान के बाद वंदे मातरम् को लेकर राजनीतिक विवाद और तेज हो गया है।
ललन सिंह ने भी कांग्रेस को घेरा
जेडीयू नेता और केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने भी कांग्रेस के फैसले पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के प्रस्ताव से उसकी राष्ट्रभक्ति और देशभक्ति को लेकर सवाल खड़े होते हैं।
ललन सिंह ने कहा कि वंदे मातरम् के बाद के पदों में भारत माता को शक्ति के रूप में प्रस्तुत करने और दुर्गा का उल्लेख होने की वजह से कांग्रेस ने केवल दो पदों तक सीमित रहने का फैसला किया है। उन्होंने इसे एक खास वर्ग को खुश करने की राजनीति से जोड़कर देखा।
कांग्रेस ने बीजेपी के आरोपों पर किया पलटवार
बीजेपी और जेडीयू के आरोपों पर कांग्रेस नेता अखिलेश प्रसाद सिंह ने पलटवार किया। उन्होंने सवाल उठाया कि आजादी की लड़ाई में बीजेपी की भूमिका क्या थी। कांग्रेस नेता ने कहा कि देश की स्वतंत्रता की लड़ाई और संविधान निर्माण में कांग्रेस की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
उन्होंने वंदे मातरम् के दो पद गाए जाने के फैसले का बचाव करते हुए कहा कि यह व्यवस्था रविंद्रनाथ टैगोर की सलाह के अनुरूप तय की गई थी।
15 अगस्त के वीडियो से शुरू हुआ विवाद
वंदे मातरम् को लेकर मौजूदा राजनीतिक विवाद की एक कड़ी 15 अगस्त के कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम से भी जुड़ी है। कार्यक्रम का एक वीडियो सामने आने के बाद बीजेपी ने कांग्रेस नेताओं पर राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान के सम्मान को लेकर सवाल उठाए थे।
बीजेपी का आरोप है कि वीडियो में कांग्रेस के कुछ वरिष्ठ नेता राष्ट्रगीत के दौरान आपस में बातचीत करते नजर आए। इसके बाद पार्टी कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस के खिलाफ अलग-अलग जगहों पर विरोध प्रदर्शन भी किया।
अब कांग्रेस के सीडब्ल्यूसी के फैसले के बाद यह विवाद और राजनीतिक रंग ले चुका है। एक ओर बीजेपी और जेडीयू नेता कांग्रेस पर निशाना साध रहे हैं, वहीं कांग्रेस इसे अपने ऐतिहासिक रुख और 1937 के प्रस्ताव से जोड़कर सही ठहरा रही है। आने वाले दिनों में वंदे मातरम् को लेकर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है।
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