Last updated: August 26th, 2026 at 11:09 am

बीजेपी सांसद बांसुरी स्वराज ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के ‘Smash the Patriarchy’ यानी ‘पितृसत्ता खत्म करो’ वाले संदेश को लेकर उन पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि वह पितृसत्ता के खिलाफ विचार से सहमत हैं, लेकिन कांग्रेस की राजनीति और पुराने विवादों का हवाला देते हुए राहुल गांधी से सवाल किया कि क्या यह संदेश केवल मंच तक सीमित है।
बांसुरी स्वराज ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी की ओर से महिलाओं के सम्मान और पितृसत्ता के खिलाफ बातें की जाती हैं, लेकिन कांग्रेस से जुड़े कुछ विवादित मामलों में उनका रुख अलग रहा है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों को महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर एक समान और स्पष्ट दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।
कंगना रनौत से जुड़े विवाद का किया उल्लेख
बीजेपी सांसद ने अभिनेत्री और बीजेपी सांसद कंगना रनौत से जुड़े 2024 के विवाद का जिक्र करते हुए कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत के सोशल मीडिया अकाउंट से की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणी का मुद्दा उठाया। बांसुरी ने दावा किया कि उस समय उन्होंने मामले को लेकर शिकायत दर्ज कराई थी और राहुल गांधी की चुप्पी पर सवाल उठाया।
उन्होंने कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला की ओर से हेमा मालिनी को लेकर की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणी और अधीर रंजन चौधरी के राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के संदर्भ में दिए गए विवादित बयान का भी उल्लेख किया। बांसुरी का आरोप है कि इन मामलों में कांग्रेस नेतृत्व ने अपेक्षित कड़ा रुख नहीं अपनाया।
पुणे के कार्यक्रम का भी उठाया मुद्दा
बांसुरी स्वराज ने राहुल गांधी के पुणे कार्यक्रम में दिए गए ‘Smash the Patriarchy’ संदेश का जिक्र करते हुए कहा कि महिलाओं के सम्मान की बात राजनीतिक मंचों पर ही नहीं, बल्कि हर परिस्थिति में समान रूप से लागू होनी चाहिए।
उन्होंने राहुल गांधी के हालिया राजनीतिक बयानों पर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस के पास युवाओं और देश के लिए सकारात्मक एजेंडा नहीं है। हालांकि, ये सभी आरोप बांसुरी स्वराज के राजनीतिक बयान का हिस्सा हैं।
शाह बानो और तीन तलाक का भी जिक्र
बीजेपी सांसद ने अपने बयान में शाह बानो मामले और तीन तलाक कानून का भी उल्लेख किया। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि कांग्रेस वास्तव में पितृसत्ता के खिलाफ है, तो उसके शासनकाल में महिलाओं के अधिकारों से जुड़े इन मुद्दों पर लिए गए फैसलों को किस नजरिए से देखा जाना चाहिए।
बांसुरी स्वराज ने कहा कि महिलाओं की स्वतंत्रता, सम्मान और अधिकारों के मुद्दे पर राजनीतिक दलों को कथनी और करनी में समानता रखनी चाहिए। उनके इस बयान के बाद ‘पितृसत्ता’ के मुद्दे पर बीजेपी और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बहस और तेज होने के संकेत हैं।
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