Last updated: August 30th, 2026 at 02:57 pm

पटना: बिहार में साइबर अपराध तेजी से बढ़ता जा रहा है और अब यह राज्य की कानून-व्यवस्था के सामने एक नई चुनौती बनकर उभर रहा है। एक नई रिपोर्ट के मुताबिक बिहार के चार जिले देश के 15 प्रमुख साइबर अपराध क्षेत्रों में शामिल हो चुके हैं। साइबर अपराध से जुड़ी शिकायतों में भी पिछले वर्षों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
साइबर अपराध के बढ़ते मामलों में ऑनलाइन ठगी, डिजिटल पेमेंट फ्रॉड, फर्जी निवेश योजनाएं, बैंकिंग धोखाधड़ी, सोशल मीडिया के जरिए ठगी और पहचान से जुड़े अपराध शामिल हैं। स्मार्टफोन और इंटरनेट के तेजी से विस्तार के साथ अपराधियों ने भी ठगी के तरीके बदल दिए हैं। अब अपराधी केवल पारंपरिक तरीकों पर निर्भर नहीं हैं, बल्कि डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल कर लोगों को निशाना बना रहे हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, बिहार में साइबर अपराध से जुड़ी शिकायतों की संख्या 2025 में लगभग दोगुनी हो गई। यह बढ़ोतरी बताती है कि ऑनलाइन धोखाधड़ी अब केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रह गई है। ग्रामीण और छोटे शहरों में रहने वाले लोग भी साइबर अपराधियों के निशाने पर हैं।
बिहार के कुछ जिलों में साइबर अपराध का नेटवर्क विशेष रूप से सक्रिय पाया गया है। इन इलाकों में अपराधी संगठित तरीके से काम करते हैं और अलग-अलग राज्यों में बैठे लोगों को फोन, मैसेज, सोशल मीडिया या फर्जी वेबसाइटों के जरिए निशाना बनाते हैं। कई मामलों में अपराधी स्थानीय स्तर पर सिम कार्ड, बैंक खातों और अन्य संसाधनों का इस्तेमाल करते हैं।
साइबर ठगी का एक बड़ा तरीका लोगों को डराकर पैसे ट्रांसफर करवाना है। अपराधी खुद को पुलिस, बैंक अधिकारी, सरकारी कर्मचारी या किसी जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर लोगों से संपर्क करते हैं। इसके बाद किसी कथित अपराध, बैंक खाते या दस्तावेज से जुड़ी समस्या का हवाला देकर उनसे पैसे की मांग की जाती है।
इसके अलावा निवेश के नाम पर ठगी भी लगातार बढ़ रही है। सोशल मीडिया और मैसेजिंग ऐप के जरिए लोगों को शेयर बाजार, क्रिप्टोकरेंसी या ऑनलाइन ट्रेडिंग में जल्दी और भारी मुनाफे का लालच दिया जाता है। शुरुआत में छोटी रकम पर लाभ दिखाकर पीड़ित का भरोसा जीता जाता है और बाद में उससे बड़ी रकम जमा करा ली जाती है।
बिहार में साइबर अपराध की चुनौती इसलिए भी गंभीर है क्योंकि कई मामलों में पीड़ित अलग-अलग राज्यों में रहते हैं और अपराधी किसी दूसरे स्थान से ऑपरेट करते हैं। इससे पुलिस के लिए अपराधियों तक पहुंचना और पैसे के लेन-देन की पूरी कड़ी का पता लगाना कठिन हो जाता है।
पुलिस और साइबर सेल अब ऐसे मामलों में डिजिटल साक्ष्यों का इस्तेमाल बढ़ा रहे हैं। बैंक खातों, मोबाइल नंबरों, डिजिटल पेमेंट रिकॉर्ड, सोशल मीडिया प्रोफाइल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच के जरिए अपराधियों तक पहुंचने की कोशिश की जाती है।
साइबर अपराध रोकने के लिए केवल पुलिस कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। आम लोगों को भी डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूक होना जरूरी है। किसी अज्ञात व्यक्ति के कहने पर OTP, PIN, पासवर्ड या बैंक संबंधी गोपनीय जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए। इसी तरह अनजान लिंक पर क्लिक करने या संदिग्ध ऐप डाउनलोड करने से भी बचना चाहिए।
बैंक या सरकारी विभाग का अधिकारी बनकर फोन करने वाला व्यक्ति यदि तुरंत पैसे ट्रांसफर करने का दबाव बनाए तो यह ठगी का संकेत हो सकता है। ऐसे मामलों में फोन काटकर संबंधित बैंक या विभाग के आधिकारिक नंबर पर स्वयं संपर्क करना सुरक्षित तरीका है।
साइबर अपराध बढ़ने के साथ पुलिस के सामने प्रशिक्षित कर्मचारियों और आधुनिक तकनीकी संसाधनों की जरूरत भी बढ़ रही है। अलग-अलग जिलों में साइबर थानों और साइबर सेल को मजबूत करना तथा पुलिसकर्मियों को डिजिटल फोरेंसिक और ऑनलाइन अपराध की जांच का प्रशिक्षण देना महत्वपूर्ण होगा।
रिपोर्ट में सामने आए आंकड़े बिहार के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण हैं क्योंकि साइबर अपराध अब पारंपरिक अपराध से अलग प्रकार की चुनौती पैदा कर रहा है। अपराधी बिना पीड़ित के शहर में मौजूद हुए उसके बैंक खाते तक पहुंच सकते हैं और कुछ ही मिनटों में बड़ी रकम दूसरे खातों में ट्रांसफर कर सकते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, साइबर अपराध से निपटने के लिए राज्यों के बीच बेहतर समन्वय भी जरूरी है। अपराधियों के बैंक खाते और मोबाइल नंबर अक्सर अलग-अलग राज्यों से जुड़े होते हैं। इसलिए स्थानीय पुलिस, साइबर सेल, बैंक और केंद्रीय एजेंसियों के बीच तेजी से सूचना साझा करना जांच को प्रभावी बना सकता है।
बिहार में साइबर अपराध के बढ़ते मामलों का असर आम नागरिकों के साथ-साथ व्यापारियों और छोटे कारोबारियों पर भी पड़ सकता है। डिजिटल भुगतान के बढ़ते इस्तेमाल के कारण कारोबारियों को भी साइबर सुरक्षा को गंभीरता से लेना होगा।
सरकार और पुलिस की ओर से जागरूकता अभियान चलाए जाने के बावजूद डिजिटल ठगी के नए तरीके लगातार सामने आते रहते हैं। इसलिए लोगों को केवल एक बार की जानकारी के बजाय लगातार साइबर सुरक्षा के नियमों को समझना होगा।
बिहार में साइबर अपराध के बढ़ते आंकड़े यह संकेत देते हैं कि डिजिटल विकास के साथ डिजिटल सुरक्षा को भी प्राथमिकता देनी होगी। यदि पुलिस की तकनीकी क्षमता, शिकायत निवारण व्यवस्था और जन-जागरूकता को मजबूत किया जाए तो साइबर अपराध के खिलाफ कार्रवाई को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।
बिहार में साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहा है। नई रिपोर्ट के अनुसार राज्य के चार जिले देश के 15 प्रमुख साइबर अपराध क्षेत्रों में शामिल हैं और 2025 में साइबर अपराध से जुड़ी शिकायतें लगभग दोगुनी हुईं। ऑनलाइन बैंकिंग फ्रॉड, फर्जी निवेश, सोशल मीडिया ठगी और डिजिटल पेमेंट धोखाधड़ी प्रमुख चुनौतियों में शामिल हैं। पुलिस के साथ आम नागरिकों की डिजिटल सतर्कता भी साइबर अपराध रोकने में अहम भूमिका निभाएगी।
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