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यूपी में दिव्यांग छात्राओं को मिलेंगी 8,060 मुफ्त ई-ट्राइसाइकिल, सरकार ने शुरू की आवेदन प्रक्रिया

उत्तर प्रदेश सरकार ने दिव्यांग छात्राओं की शिक्षा और आवागमन को आसान बनाने के लिए एक बड़ी पहल की है।
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उत्तर प्रदेश सरकार ने दिव्यांग छात्राओं की शिक्षा और आवागमन को आसान बनाने के लिए एक बड़ी पहल की है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में राज्य की पात्र दिव्यांग छात्राओं को मुफ्त बैटरी चालित ई-ट्राइसाइकिल उपलब्ध कराई जाएगी। सरकार ने इस योजना के तहत पूरे प्रदेश में 8,060 ई-ट्राइसाइकिल वितरित करने का लक्ष्य रखा है। योजना का उद्देश्य दिव्यांग छात्राओं को स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय और प्रशिक्षण संस्थानों तक पहुंचने में आने वाली परिवहन संबंधी परेशानियों को कम करना और उन्हें शिक्षा से लगातार जोड़े रखना है।

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    इस योजना को प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों तक विस्तारित किया गया है। प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र से 20 पात्र दिव्यांग छात्राओं का चयन किया जाएगा। इस हिसाब से 403 विधानसभा क्षेत्रों में कुल 8,060 छात्राओं को योजना का लाभ देने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। संबंधित जिलों में पात्र लाभार्थियों की पहचान और दस्तावेजों के सत्यापन के बाद चयनित छात्राओं को ई-ट्राइसाइकिल उपलब्ध कराई जाएगी।

    योजना के तहत प्रत्येक ई-ट्राइसाइकिल की कीमत के लिए अधिकतम 65,000 रुपये तक की सहायता का प्रावधान है। यानी पात्र छात्राओं को इसके लिए अपनी ओर से राशि खर्च नहीं करनी होगी, बल्कि निर्धारित प्रक्रिया के तहत सरकार की ओर से ई-ट्राइसाइकिल उपलब्ध कराई जाएगी। इससे खासकर उन छात्राओं को राहत मिलने की उम्मीद है जिन्हें रोजाना घर से शैक्षणिक संस्थान तक पहुंचने के लिए परिवार के सदस्यों या सार्वजनिक परिवहन पर निर्भर रहना पड़ता है।

    इस योजना का लाभ लेने के लिए कुछ महत्वपूर्ण पात्रता शर्तें भी निर्धारित की गई हैं। छात्रा की दिव्यांगता कम से कम 40 प्रतिशत होनी चाहिए। इसके अलावा उसकी आयु 16 वर्ष या उससे अधिक होनी जरूरी है। आवेदक किसी मान्यता प्राप्त स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय या शैक्षणिक अथवा प्रशिक्षण संस्थान में पढ़ाई या प्रशिक्षण ले रही होनी चाहिए। संबंधित विभाग पात्रता और दस्तावेजों की जांच के बाद ही अंतिम चयन करेगा।

    सरकार की इस पहल का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इसे केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रखा गया है। सभी 403 विधानसभा क्षेत्रों को योजना में शामिल किए जाने से ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाली दिव्यांग छात्राओं को भी इसका लाभ मिलने का रास्ता खुला है। कई इलाकों में परिवहन की सीमित सुविधा और दूरी के कारण दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए नियमित रूप से शैक्षणिक संस्थान पहुंचना कठिन होता है। ऐसे में व्यक्तिगत ई-ट्राइसाइकिल उनकी रोजमर्रा की आवाजाही को काफी आसान बना सकती है।

    योजना के लिए आवेदन प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। पात्र छात्राएं अपने जिले के दिव्यांगजन सशक्तीकरण अधिकारी के माध्यम से आवेदन कर सकती हैं। इसके अलावा विभाग के ऑनलाइन पोर्टल के जरिए भी आवेदन करने की सुविधा दी गई है। आवेदन के दौरान छात्राओं को अपनी पहचान, निवास, शिक्षा और दिव्यांगता से संबंधित आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने होंगे। विभाग द्वारा दस्तावेजों और पात्रता का सत्यापन किए जाने के बाद लाभार्थियों का चयन किया जाएगा।

    जिला स्तर पर अधिकारियों की भूमिका इस योजना में महत्वपूर्ण होगी। आवेदन प्राप्त होने के बाद पात्रता की जांच, दस्तावेजों का सत्यापन और विधानसभा क्षेत्र के निर्धारित लक्ष्य के अनुसार लाभार्थियों का चयन किया जाएगा। सरकार का प्रयास है कि योजना का लाभ वास्तविक रूप से जरूरतमंद और पात्र छात्राओं तक पहुंचे।

    इस योजना को केवल परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने वाली योजना के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। इसका सीधा संबंध दिव्यांग छात्राओं की शिक्षा, आत्मनिर्भरता और सामाजिक भागीदारी से है। यदि किसी छात्रा को रोजाना स्कूल या कॉलेज जाने के लिए परिवहन की समस्या का सामना करना पड़ता है, तो उसके लिए पढ़ाई जारी रखना मुश्किल हो सकता है। ई-ट्राइसाइकिल मिलने से ऐसी छात्राओं को नियमित रूप से अपने संस्थान तक पहुंचने में सुविधा मिलेगी और शिक्षा बीच में छूटने की संभावना कम हो सकती है।

    विभाग के उप निदेशक अमित कुमार राय के अनुसार, योजना का आवेदन शुरू हो चुका है और पात्र छात्राएं जिला स्तर पर संबंधित अधिकारी या विभागीय पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर सकती हैं। सरकार ने 2026-27 के लिए योजना का दायरा बढ़ाते हुए दिव्यांग छात्राओं को भी इसके लाभ में शामिल किया है।

    उत्तर प्रदेश सरकार की 8,060 मुफ्त ई-ट्राइसाइकिल देने की यह पहल दिव्यांग छात्राओं के लिए शिक्षा तक पहुंच आसान बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। 403 विधानसभा क्षेत्रों को योजना में शामिल करने और प्रत्येक क्षेत्र से 20 छात्राओं के चयन का लक्ष्य रखने से इसका लाभ प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचने की संभावना है। यदि आवेदन, सत्यापन और वितरण की प्रक्रिया पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से पूरी होती है, तो यह योजना हजारों दिव्यांग छात्राओं के लिए रोजाना की आवाजाही के साथ-साथ उनकी शिक्षा और आत्मनिर्भरता में भी मददगार साबित हो सकती है।

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