Last updated: September 8th, 2026 at 03:07 pm

बिहार में बाढ़ की स्थिति मंगलवार, 8 सितंबर को और गंभीर हो गई। राज्य के 13 जिलों में करीब 34.31 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित बताए गए हैं। भागलपुर के सुल्तानगंज में गंगा का जलस्तर अपने पिछले उच्चतम बाढ़ स्तर को पार कर गया, जिसके बाद निचले इलाकों में प्रशासन ने विशेष सतर्कता बढ़ा दी है। हालांकि सुल्तानगंज में जलस्तर फिलहाल स्थिर बताया जा रहा है।
आपदा प्रबंधन विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार, बाढ़ का असर 13 जिलों के 79 प्रखंडों और 480 ग्राम पंचायतों तक पहुंच चुका है। पटना, भागलपुर, वैशाली, सारण, बेगूसराय, खगड़िया और मुंगेर समेत कई जिले प्रभावित हैं। लगातार बढ़ते जलस्तर के कारण ग्रामीण इलाकों में आवागमन, खेती और रोजमर्रा की गतिविधियां प्रभावित हुई हैं। प्रशासन की ओर से राहत और बचाव अभियान लगातार चलाया जा रहा है।
सबसे चिंताजनक स्थिति भागलपुर के सुल्तानगंज में सामने आई। 8 सितंबर की सुबह 8 बजे यहां गंगा का जलस्तर 36.80 मीटर दर्ज किया गया। यह 17 अगस्त 2021 को दर्ज 36.75 मीटर के पिछले उच्चतम बाढ़ स्तर से 0.05 मीटर अधिक है। अधिकारियों के मुताबिक फिलहाल जलस्तर स्थिर बना हुआ है, लेकिन नदी के नीचे की ओर बसे इलाकों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
बाढ़ के बीच भागलपुर के खरीक रघोपुर इलाके में मंगलवार सुबह एक छोटी नाव पलट गई। नाव में सवार सभी 10 लोगों को एसडीआरएफ की टीम ने सुरक्षित बाहर निकाल लिया। इस घटना के बाद प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित इलाकों में नावों के संचालन और लोगों की आवाजाही पर निगरानी और बढ़ा दी है।
राज्य की कई प्रमुख नदियां अलग-अलग स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। इनमें गंडक, कोसी, बूढ़ी गंडक, गंगा, पुनपुन, बागमती और घाघरा शामिल हैं। गंगा भी दीघा, गांधी घाट, हथीदह, भागलपुर, कहलगांव और मुंगेर जैसे स्थानों पर ऊंचे जलस्तर पर बनी हुई है। ऐसे में प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों में राहत दलों की तैनाती बढ़ाई है।
बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए राज्य के विभिन्न जिलों में 432 सामुदायिक रसोई संचालित की जा रही हैं। यहां लोगों को भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके अलावा 14 राहत शिविर भी चलाए जा रहे हैं, जहां रहने, भोजन और चिकित्सा जैसी आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था की गई है। अब तक बड़ी संख्या में पॉलीथिन शीट और सूखा राशन भी वितरित किया गया है।
बचाव अभियान के लिए 1,832 नावों का संचालन किया जा रहा है। राज्य में 27 एसडीआरएफ और 10 एनडीआरएफ टीमों को भी तैनात किया गया है। इन टीमों का इस्तेमाल प्रभावित इलाकों से लोगों को सुरक्षित निकालने और जरूरतमंदों तक राहत सामग्री पहुंचाने में किया जा रहा है। पशुओं के लिए भी चारे की व्यवस्था की जा रही है।
पटना के कुछ इलाकों में बाढ़ के कारण जनजीवन पर भी असर पड़ा है। दानापुर और मनेर में डूबने की घटनाओं में पांच लोगों की मौत की सूचना सामने आई है। प्रशासन की ओर से मृतकों के परिवारों को मुआवजा देने की प्रक्रिया भी शुरू की गई है।
इस बीच परिवहन व्यवस्था भी प्रभावित हुई है। बाढ़ के कारण कुछ रेल मार्गों और सड़कों पर सुरक्षा संबंधी प्रतिबंध लगाए गए हैं। प्रशासन का कहना है कि प्राथमिकता लोगों की सुरक्षा, राहत सामग्री की उपलब्धता और प्रभावित इलाकों में लगातार निगरानी बनाए रखना है। आने वाले दिनों में जलस्तर और नदी के बहाव पर नजर रखी जा रही है।
बिहार में मौजूदा बाढ़ ने एक बार फिर राज्य के बड़े हिस्से की बाढ़ संवेदनशीलता को सामने ला दिया है। फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित रखना और राहत व्यवस्था को लगातार मजबूत बनाए रखना है।
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