Last updated: September 8th, 2026 at 03:39 pm

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को दावा किया कि वर्ष 2017 के बाद राज्य में कानून-व्यवस्था और कारोबारी माहौल में बड़ा बदलाव आया है। उन्होंने कहा कि सरकार की नीतियों और कानून-व्यवस्था में सुधार के कारण उत्तर प्रदेश में निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ है और राज्य तेजी से औद्योगिक विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री लखनऊ में आयोजित दो दिवसीय यूपी टेक्सटाइल कॉन्क्लेव-2026 के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे।
योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में वर्ष 2017 से पहले की स्थिति का जिक्र करते हुए पिछली सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय अपराध, रंगदारी, अवैध कब्जे और राजनीतिक संरक्षण प्राप्त आपराधिक नेटवर्क के कारण राज्य में कारोबार करना मुश्किल था। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज सरकार की प्राथमिकता कानून का राज स्थापित करना और अपराध तथा भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी राज्य में निवेश के लिए कानून-व्यवस्था और स्थिर माहौल बेहद महत्वपूर्ण होता है। उनके मुताबिक सरकार ने निवेशकों के लिए अलग-अलग क्षेत्रों पर केंद्रित नीतियां तैयार की हैं और निवेश प्रस्तावों की प्रगति की निगरानी की जा रही है। उन्होंने दावा किया कि निवेशकों से किए गए वादों और घोषणाओं को जमीन पर उतारने के लिए मुख्यमंत्री कार्यालय स्तर से भी निगरानी की जाती है।
योगी ने दावा किया कि पिछले करीब नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश को लगभग 50 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इनमें से करीब 15 लाख करोड़ रुपये के प्रस्ताव जमीन पर उतर चुके हैं, जबकि लगभग 7.5 लाख करोड़ रुपये के अन्य प्रस्ताव क्रियान्वयन के लिए तैयार हैं। हालांकि ये आंकड़े मुख्यमंत्री द्वारा प्रस्तुत किए गए दावे हैं और इन्हें सरकार के निवेश प्रस्तावों के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
रोजगार के मुद्दे पर भी मुख्यमंत्री ने सरकार की उपलब्धियां गिनाईं। उन्होंने दावा किया कि राज्य में निवेश और औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार के चलते 65 लाख से अधिक युवाओं को रोजगार के अवसर मिले हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले नौ वर्षों में राज्य में बड़े कारखानों की संख्या लगभग 14 हजार से बढ़कर 35 हजार हो गई है।
मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश के एमएसएमई क्षेत्र को भी राज्य की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार बताया। उनके अनुसार राज्य में करीब 96 लाख एमएसएमई इकाइयां हैं। उन्होंने कहा कि ‘वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट’ जैसी पहलों और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े उपायों के जरिए छोटे और मध्यम उद्योगों को मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है। निवेशकों की सुविधा के लिए सिंगल-विंडो सिस्टम और डिजिटल प्लेटफॉर्म भी संचालित किए जा रहे हैं।
टेक्सटाइल सेक्टर को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार उत्पादन से लेकर प्रसंस्करण, कौशल विकास, रोजगार और निर्यात तक पूरी वैल्यू चेन को एक साथ मजबूत करना चाहती है। इसी दिशा में कॉन्क्लेव के दौरान यूपी टेक्स मित्र पोर्टल, हैंडलूम वीवर समृद्धि योजना और उत्तर प्रदेश टेक्सटाइल सेक्टर ट्रेनिंग एंड स्किल डेवलपमेंट स्कीम की शुरुआत की गई। इसके अलावा टेक्सटाइल नीति के तहत निवेशकों को प्रोत्साहन और लेटर ऑफ कम्फर्ट भी वितरित किए गए।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि टेक्सटाइल उद्योग में निवेश बढ़ने से रोजगार के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर उत्पादन और निर्यात को भी बढ़ावा मिल सकता है। सरकार का लक्ष्य राज्य में ऐसा औद्योगिक वातावरण तैयार करना है, जिसमें कच्चे माल से लेकर तैयार उत्पाद तक पूरी प्रक्रिया राज्य के भीतर विकसित हो सके।
मुख्यमंत्री के इस बयान को ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है जब उत्तर प्रदेश में औद्योगिक निवेश और रोजगार को लेकर सरकार लगातार नई योजनाओं पर जोर दे रही है। टेक्सटाइल सेक्टर के साथ-साथ एमएसएमई, विनिर्माण और अन्य उद्योगों को बढ़ावा देने के प्रयासों के बीच सरकार अब निवेश प्रस्तावों को वास्तविक परियोजनाओं में बदलने पर ध्यान केंद्रित कर रही है।
![]()
Comments are off for this post.