Last updated: September 8th, 2026 at 03:50 pm

बिहार के सुपौल जिले में एक निजी मदरसे में समोसा और मिठाई खाने के बाद चार छात्राओं की तबीयत बिगड़ने का मामला सामने आया है। इलाज के दौरान 10 वर्षीय छात्रा अल्फिशा की मौत हो गई, जबकि अन्य छात्राओं का इलाज कराया गया। घटना के बाद पुलिस और प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में फूड पॉइजनिंग की आशंका जताई जा रही है, हालांकि अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि छात्राओं की तबीयत बिगड़ने और मौत की वास्तविक वजह जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगी।
यह घटना सुपौल सदर थाना क्षेत्र के बसबिट्टी वार्ड नंबर-19 स्थित जामिअतुस सालिहात एजुकेशनल ट्रस्ट द्वारा संचालित निजी मदरसे की है। मदरसा प्रबंधन के अनुसार, परिसर में करीब 60 से 65 छात्राएं रहकर पढ़ाई करती हैं। संस्था लगभग दो वर्षों से संचालित हो रही है। मृत छात्रा अल्फिशा भी करीब डेढ़ से दो साल से इसी परिसर में रहकर पढ़ाई कर रही थी।
मदरसा प्रबंधन के मुताबिक, सोमवार को अल्फिशा की मां अपनी बेटी से मिलने मदरसे पहुंची थीं। उन्होंने बच्ची के लिए समोसा और मिठाई दी और वापस चली गईं। इसके बाद इन खाद्य पदार्थों को खाने वाली चार छात्राओं की तबीयत अचानक बिगड़ गई। बीमार होने वाली छात्राओं में अल्फिशा के अलावा आफिया, सहाना खातून और हलीमा सादिया शामिल हैं। तबीयत खराब होने के बाद सभी को इलाज के लिए निजी चिकित्सक के पास ले जाया गया।
इलाज के दौरान अल्फिशा की हालत गंभीर हो गई और 10 वर्षीय बच्ची ने दम तोड़ दिया। उसकी पहचान नेमुआ निवासी कमरे आलम की बेटी के रूप में हुई है। घटना की जानकारी सामने आने के बाद मदरसे में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। अन्य छात्राओं की स्थिति पर भी प्रशासन नजर बनाए हुए है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, दो-तीन अन्य छात्राओं का अलग-अलग अस्पतालों में इलाज चल रहा था।
मामले की सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम मदरसे पहुंची और परिसर का निरीक्षण किया। पुलिस ने मदरसा संचालक खलील रहमान, शिक्षकों और वहां मौजूद अन्य लोगों से पूछताछ की। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि छात्राओं ने क्या खाना खाया था और खाने के बाद उनकी तबीयत किस तरह बिगड़ी। भोजन की गुणवत्ता और घटना से जुड़े दूसरे पहलुओं की भी जांच की जा रही है।
मृत छात्रा के परिजनों ने शव का पोस्टमार्टम कराने से इनकार कर दिया है। ऐसे में पुलिस और प्रशासन के सामने घटना के कारणों की जांच के लिए उपलब्ध अन्य चिकित्सकीय और परिस्थितिजन्य तथ्यों को देखना महत्वपूर्ण होगा। अधिकारियों ने अभी तक यह पुष्टि नहीं की है कि मौत निश्चित रूप से फूड पॉइजनिंग के कारण हुई है। प्रारंभिक जांच में केवल इसकी आशंका जताई गई है।
घटना के बाद प्रशासन ने केवल भोजन की गुणवत्ता ही नहीं, बल्कि मदरसे की आवासीय व्यवस्था को भी जांच के दायरे में लिया है। सदर एसडीएम मनोहर कुमार साहू ने बताया कि मदरसे में बड़ी संख्या में छात्राएं आवासीय रूप से रह रही हैं। जिला शिक्षा कार्यालय की टीम को संस्था से संबंधित दस्तावेजों की जांच के लिए भेजा गया है। अधिकारियों की टीम यह भी देख रही है कि छात्राओं को आवासीय सुविधा देने के लिए संस्था के पास आवश्यक अनुमति थी या नहीं और निर्धारित नियमों का पालन किया जा रहा था या नहीं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए सुपौल के जिलाधिकारी सावन कुमार ने जांच के निर्देश दिए हैं। जिला शिक्षा कार्यालय के अधिकारियों ने मदरसे में पहुंचकर संस्था के संचालन, उपलब्ध सुविधाओं और छात्राओं के रहने की व्यवस्था से जुड़ी जानकारी जुटाई। पुलिस भी अपनी ओर से घटना के सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही है।
सुपौल के सदर डीएसपी के अनुसार, शुरुआती तौर पर मामला फूड पॉइजनिंग से जुड़ा हुआ प्रतीत हो रहा है। हालांकि, पुलिस ने साफ किया है कि वास्तविक कारण जांच और चिकित्सकीय मूल्यांकन के बाद ही स्पष्ट होगा। सुपौल के एसपी शरथ आरएस भी घटनास्थल पर पहुंचे और अधिकारियों से जानकारी ली। पुलिस डॉक्टरों के संपर्क में रहकर छात्राओं की तबीयत खराब होने की वजह पता करने में जुटी है।
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