Human Live Media

अशोक सिद्धार्थ के संन्यास के बाद भी आकाश आनंद पर कार्रवाई, मायावती के फैसले से उठे कई सवाल

News, Politics, Uttar Pardesh hml_up

बहुजन समाज पार्टी में आकाश आनंद को लेकर घटनाक्रम तेजी से बदलता नजर आ रहा है। मायावती के लगातार सामने आए बयानों और पार्टी के फैसलों को जोड़कर देखें तो आकाश आनंद की राजनीतिक भूमिका को लेकर तस्वीर पहले से ज्यादा पेचीदा हो गई है।

3 सितंबर को मायावती ने आकाश आनंद को लेकर कहा था कि उन्हें अभी राजनीतिक रूप से और परिपक्व होने की जरूरत है और फिलहाल उन्हें बड़ी जिम्मेदारी देना उचित नहीं होगा। इसी बीच मायावती के छोटे भाई के बेटे ईशान आनंद को संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई।

इसके बाद 9 सितंबर को मायावती ने अशोक सिद्धार्थ को लेकर कहा कि अगर वह राजनीति से संन्यास लेते हैं तो आकाश आनंद के लिए पार्टी में स्वतंत्र रूप से काम करने का रास्ता खुल सकता है। इसके अगले ही दिन अशोक सिद्धार्थ ने राजनीति और सामाजिक जीवन से संन्यास लेने का ऐलान कर दिया।

शर्त पूरी होने के बाद भी आकाश पर कार्रवाई क्यों?

अशोक सिद्धार्थ के संन्यास की घोषणा के बाद उम्मीद की जा रही थी कि आकाश आनंद को पार्टी में फिर से सक्रिय भूमिका मिल सकती है। लेकिन घटनाक्रम इसके उलट चला गया। मायावती ने आकाश आनंद को ही BSP से पूरी तरह मुक्त कर दिया।

यही वजह है कि पार्टी के भीतर और राजनीतिक गलियारों में मायावती के इस फैसले को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। एक तरफ आकाश की राह में अशोक सिद्धार्थ के राजनीतिक प्रभाव को बड़ी वजह बताया गया था, वहीं दूसरी तरफ उनके संन्यास के बाद भी आकाश के खिलाफ कार्रवाई कर दी गई।

मायावती ने ‘डबल माइंड’ को बताया वजह

आकाश आनंद को पार्टी से बाहर करने के पीछे मायावती ने उनकी कथित ‘डबल माइंड’ वाली स्थिति का जिक्र किया। उनका कहना है कि आकाश पार्टी की विचारधारा और अपने ससुर अशोक सिद्धार्थ के प्रति व्यक्तिगत लगाव के बीच उचित संतुलन नहीं बना पा रहे थे।

मायावती के मुताबिक, पार्टी के प्रति पूरी निष्ठा और संगठन की लाइन के अनुसार काम करना जरूरी है। इसी को लेकर आकाश आनंद की भूमिका पर सवाल उठे।

BSP में बढ़ी राजनीतिक चर्चा

आकाश आनंद को लेकर मायावती के हालिया बयानों में तेजी से बदलाव ने BSP की अंदरूनी राजनीति को चर्चा में ला दिया है। पहले राजनीतिक परिपक्वता का मुद्दा, फिर अशोक सिद्धार्थ के संन्यास को लेकर शर्त और उसके बाद आकाश आनंद को ही पार्टी से बाहर करने का फैसला—इन घटनाओं ने कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आकाश आनंद की BSP में वापसी की कोई गुंजाइश बचती है या मायावती का यह फैसला उनकी राजनीतिक यात्रा में एक नए अध्याय की शुरुआत है।

Loading