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सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली में MCD की बड़ी कार्रवाई, 58 इमारतें ध्वस्त; 31 और पर कार्रवाई के आदेश

दिल्ली के सत्य निकेतन में पीजी इमारत गिरने की घटना के बाद नगर निगम ने राजधानी में अवैध निर्माण और
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दिल्ली के सत्य निकेतन में पीजी इमारत गिरने की घटना के बाद नगर निगम ने राजधानी में अवैध निर्माण और असुरक्षित इमारतों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। दिल्ली नगर निगम यानी MCD ने अब तक 58 इमारतों को ध्वस्त किया है, जबकि 31 अन्य संपत्तियों के खिलाफ ध्वस्तीकरण के आदेश जारी किए गए हैं। यह अभियान दिल्ली के सभी 12 MCD जोन में चलाया जा रहा है।

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    MCD के मुताबिक, बुधवार को ही अलग-अलग इलाकों में 34 ध्वस्तीकरण कार्रवाई की गईं। इसके अलावा 17 संपत्तियों को सील किया गया, चार और संपत्तियों के लिए ध्वस्तीकरण आदेश जारी किए गए तथा अनधिकृत निर्माण के संबंध में 22 शो-कॉज नोटिस दिए गए। संभावित सीलिंग कार्रवाई के लिए भी 27 नोटिस जारी किए गए। इन कार्रवाइयों का उद्देश्य ऐसी संपत्तियों की पहचान करना और उन पर कार्रवाई करना है, जहां निर्माण नियमों का उल्लंघन या सुरक्षा से जुड़ी समस्या पाई गई है।

     

    यह अभियान 6 सितंबर को सत्य निकेतन में पांच मंजिला पीजी इमारत गिरने के बाद तेज हुआ। हादसे में सात लोगों की मौत हुई थी और कई लोग घायल हुए थे। घटना के बाद दिल्ली में पीजी और छात्र आवासों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठे। इसके बाद MCD ने ऐसे भवनों की जांच शुरू की, खासकर उन इमारतों पर ध्यान दिया जा रहा है जिनमें बड़ी संख्या में छात्र रहते हैं।

     

    MCD ने पीजी इमारतों का व्यापक सर्वे भी शुरू किया है। अधिकारियों के अनुसार, 1,252 पीजी भवनों का सर्वे किया जा चुका है, जिनमें करीब 24 हजार लोग रह रहे हैं। सर्वे में इमारतों को उनकी स्थिति के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में रखा जा रहा है। इनमें सामान्य रूप से सुरक्षित भवन, मामूली मरम्मत की जरूरत वाले भवन, बड़ी मरम्मत की जरूरत वाले भवन और बेहद संवेदनशील या खतरनाक भवन शामिल हैं।

     

    सर्वे के दौरान 39 इमारतों में मामूली मरम्मत, नौ में बड़ी मरम्मत की जरूरत और तीन इमारतों को खतरनाक श्रेणी में रखा गया है। इनमें से एक खतरनाक इमारत को पहले ही ध्वस्त किया जा चुका है। अधिकारियों का विशेष ध्यान पांच मंजिल से अधिक ऊंची RCC संरचनाओं और चार मंजिल वाली ऐसी इमारतों पर है जिनमें लोड-बेयरिंग ईंट की दीवारें हैं।

     

    सत्य निकेतन में गिरी इमारत के ठीक बगल वाली एक अन्य इमारत पर भी नियंत्रित तरीके से ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की गई थी। MCD ने इस इमारत को असुरक्षित माना था और वहां रहने वाले लोगों को पहले सुरक्षित स्थान पर हटाया गया। इस तरह की कार्रवाई का उद्देश्य आसपास की इमारतों और लोगों पर संभावित जोखिम को कम करना है।

     

    राजधानी के कई अन्य इलाकों में भी कार्रवाई की गई है। MCD के अनुसार कूचा चेलान, बाजार सीताराम, विकास नगर, द्वारका, राणा प्रताप बाग और मॉडल टाउन समेत कई क्षेत्रों में अवैध या नियमों का उल्लंघन करने वाली संरचनाओं पर कार्रवाई हुई। निगम ने साफ किया है कि आने वाले दिनों में अनधिकृत निर्माण, संपत्तियों के गलत इस्तेमाल और खतरनाक संरचनाओं के खिलाफ अभियान और तेज किया जाएगा।

     

    MCD की कार्रवाई केवल सत्य निकेतन तक सीमित नहीं है। 1 जून से 9 सितंबर के बीच निगम ने राजधानी में कुल 1,053 ध्वस्तीकरण कार्रवाई कीं, 491 संपत्तियों को सील किया और हजारों शो-कॉज नोटिस जारी किए। हालांकि, इन आंकड़ों में सत्य निकेतन हादसे के बाद की विशेष कार्रवाई और सामान्य प्रवर्तन अभियान दोनों शामिल हैं। इसलिए इन्हें केवल हादसे के बाद की कार्रवाई के आंकड़े के रूप में देखना सही नहीं होगा।

     

    दिल्ली प्रशासन के सामने चुनौती यह है कि पीजी, हॉस्टल और अन्य व्यावसायिक इस्तेमाल वाली इमारतों की सुरक्षा जांच को प्रभावी तरीके से पूरा किया जाए। सत्य निकेतन की घटना के बाद शुरू हुई कार्रवाई से यह संकेत मिलता है कि निगम अब निर्माण नियमों और भवन सुरक्षा के उल्लंघनों पर ज्यादा सख्ती बरत रहा है। हालांकि, किसी इमारत को ध्वस्त या सील करने का आधार संबंधित निरीक्षण और नियमों के उल्लंघन से जुड़ा होना चाहिए। आगे की कार्रवाई जांच और स्थानीय अधिकारियों की रिपोर्ट के आधार पर तय होगी।

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