Last updated: September 12th, 2026 at 03:52 pm

दिल्ली हाईकोर्ट ने पहलवान विनेश फोगाट की याचिका पर सुनवाई के दौरान महिला खिलाड़ियों के लिए मातृत्व और खेल करियर के बीच संतुलन का बड़ा मुद्दा उठाया है। अदालत ने कहा कि यह विचार करने की जरूरत है कि क्या किसी महिला खिलाड़ी को मां बनने और अपने खेल करियर को जारी रखने के बीच चुनाव करने की स्थिति में होना चाहिए। यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब विनेश फोगाट ने 2026 सीनियर वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप की चयन प्रक्रिया में हिस्सा लेने की अनुमति मांगी थी।
विनेश फोगाट जुलाई 2025 में मां बनी थीं और इसके बाद उन्होंने मातृत्व अवकाश लिया था। खेल में वापसी करने के बाद वह 2026 सीनियर वर्ल्ड चैंपियनशिप के लिए होने वाले चयन ट्रायल में हिस्सा लेना चाहती थीं। इन ट्रायल्स का आयोजन 14 सितंबर को दिल्ली के इंदिरा गांधी स्टेडियम में होना है। विनेश ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर कर भारतीय कुश्ती महासंघ यानी WFI के चयन संबंधी नियमों को चुनौती दी थी।
विनेश की परेशानी की मुख्य वजह WFI की ओर से 7 सितंबर को जारी किया गया चयन संबंधी सर्कुलर है। इसमें ट्रायल में भाग लेने के लिए कुछ निर्धारित पात्रता मानदंड रखे गए हैं। विनेश का कहना था कि मातृत्व और उससे जुड़ी रिकवरी के कारण वह निर्धारित अवधि में कुछ प्रतियोगिताओं में हिस्सा नहीं ले सकीं। ऐसे में उन्हें केवल इस आधार पर चयन प्रक्रिया से बाहर नहीं किया जाना चाहिए।
हालांकि, दिल्ली हाईकोर्ट ने फिलहाल विनेश को चयन ट्रायल में शामिल होने की अंतरिम अनुमति देने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि मौजूदा पात्रता नियम सभी खिलाड़ियों पर समान रूप से लागू होते हैं। यदि केवल एक खिलाड़ी के लिए नियमों में अंतरिम छूट दी जाती है, तो ऐसी स्थिति में समान परिस्थितियों वाले दूसरे खिलाड़ियों के साथ असमान व्यवहार का सवाल उठ सकता है।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि विनेश की गर्भावस्था, बच्चे के जन्म और प्रसव के बाद की रिकवरी जैसी परिस्थितियों पर नीति की वैधता पर विचार करते समय ध्यान देना होगा। हालांकि, केवल इन परिस्थितियों के आधार पर फिलहाल उन्हें मौजूदा पात्रता शर्तों से अलग छूट नहीं दी जा सकती। अदालत ने WFI के 7 सितंबर के सर्कुलर की वैधता पर इस चरण में कोई अंतिम फैसला नहीं दिया है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने महिला खिलाड़ियों के सामने आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों पर भी गंभीर चिंता जताई। अदालत के अनुसार, महिला खिलाड़ी शादी और बच्चे के जन्म के कारण खेल से कुछ समय दूर रहती हैं, जबकि उसी दौरान पुरुष खिलाड़ी लगातार प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेकर पदक जीतते रहते हैं और चयन की दौड़ में आगे बढ़ सकते हैं। अदालत ने इस स्थिति को देखते हुए खेल प्रशासन में ऐसी व्यवस्था की जरूरत पर सवाल उठाया, जिससे महिला खिलाड़ियों को मातृत्व के कारण अपना करियर खत्म करने की स्थिति का सामना न करना पड़े।
इस मामले में एक बड़ा सवाल यह भी है कि महिला खिलाड़ियों के लिए मातृत्व के बाद खेल में वापसी का रास्ता किस तरह तय किया जाए। किसी खिलाड़ी को गर्भावस्था और प्रसव के कारण लंबे समय तक प्रतियोगिताओं से दूर रहना पड़ सकता है। वापसी के समय यदि चयन प्रक्रिया में केवल हालिया प्रदर्शन को आधार बनाया जाए, तो ऐसी खिलाड़ी को दोबारा शीर्ष स्तर पर पहुंचने के लिए अतिरिक्त मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।
हाईकोर्ट की टिप्पणी ने इस बहस को केवल विनेश फोगाट तक सीमित नहीं रखा है। अदालत ने संकेत दिया है कि महिला खिलाड़ियों के लिए मातृत्व के बाद वापसी को लेकर स्पष्ट दिशानिर्देश और समयसीमा होना जरूरी हो सकता है। ऐसी नीति से यह तय करने में मदद मिल सकती है कि किसी खिलाड़ी को परिवार और खेल के बीच ऐसा कठिन चुनाव न करना पड़े।
विनेश फोगाट को 14 सितंबर के चयन ट्रायल में अंतरिम राहत नहीं मिली है। अदालत ने यह भी साफ किया है कि उसने WFI की नीति की अंतिम वैधता या विनेश के खिलाफ चल रही अनुशासनात्मक कार्रवाई के गुण-दोष पर कोई अंतिम राय नहीं दी है। इसलिए मामले का व्यापक कानूनी और नीतिगत पहलू अभी खुला हुआ है।
विनेश फोगाट का मामला अब भारतीय खेल व्यवस्था में महिला खिलाड़ियों के लिए मातृत्व के बाद वापसी की नीति पर बड़ी चर्चा का आधार बन गया है। आने वाली सुनवाई में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अदालत इस व्यापक मुद्दे पर क्या दिशा देती है और खेल महासंघ महिला खिलाड़ियों के लिए किस तरह की व्यवस्था तैयार करते हैं।
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