Human Live Media

HomeNewsबिहार में बाढ़ से करीब 10 हजार करोड़ रुपये के नुकसान का शुरुआती आकलन, अंतिम रिपोर्ट बाद में

बिहार में बाढ़ से करीब 10 हजार करोड़ रुपये के नुकसान का शुरुआती आकलन, अंतिम रिपोर्ट बाद में

  बिहार में इस साल आई भीषण बाढ़ ने बड़े पैमाने पर जनजीवन और संपत्ति को प्रभावित किया है। राज्य
Shivraj_Singh_Chouhan_1789604887811_ZQsJ_1789604888116_E3B1_1b82fd28-4ee4-4b6d-a68d-a9476cdd7d37_dKd3

 

Table of Contents

    बिहार में इस साल आई भीषण बाढ़ ने बड़े पैमाने पर जनजीवन और संपत्ति को प्रभावित किया है। राज्य सरकार के विभिन्न विभागों की ओर से तैयार किए गए शुरुआती आकलन में बाढ़ से करीब 10 हजार करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान लगाया गया है। यह प्रारंभिक आंकड़ा है और पानी पूरी तरह उतरने के बाद नुकसान का विस्तृत सर्वे कराया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार अंतिम रिपोर्ट 15 अक्टूबर के बाद तैयार किए जाने की उम्मीद है।

     

    बाढ़ का असर बिहार के 15 जिलों में व्यापक रूप से देखने को मिला है। राज्य के आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार लगभग 49.74 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। प्रभावित क्षेत्रों में पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, मुजफ्फरपुर, बक्सर, समस्तीपुर, खगड़िया, बेगूसराय, दरभंगा, अररिया, पूर्णिया, मधेपुरा और कटिहार शामिल हैं। प्रभावित आबादी 575 ग्राम पंचायतों और 88 प्रखंडों में फैली हुई है।

     

    बाढ़ से सबसे ज्यादा असर खेती और ग्रामीण इलाकों पर पड़ा है। कई जगहों पर खेतों में लंबे समय तक पानी जमा रहने से फसलों को नुकसान हुआ है। इसके अलावा घरों, सड़कों, पुल-पुलियों, तटबंधों और दूसरी आधारभूत संरचनाओं को भी नुकसान पहुंचने की जानकारी सामने आई है। पशुधन के नुकसान की भी रिपोर्ट मिली है। इन सभी क्षेत्रों में हुए नुकसान का अलग-अलग विभागों द्वारा आकलन किया जा रहा है।

     

    बिहार में बाढ़ की स्थिति को देखते हुए केंद्र की ओर से एक केंद्रीय टीम भी भेजी गई है। केंद्रीय टीम ने प्रभावित इलाकों का दौरा कर जमीन पर स्थिति का जायजा लिया। केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अधिकारियों और राज्य सरकार के प्रतिनिधियों के साथ कई बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया। टीम ने राहत शिविरों में रह रहे लोगों से भी बातचीत की और फसल, मकान तथा बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान की जानकारी ली।

     

    बाढ़ प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाने के लिए राज्य सरकार की ओर से आर्थिक सहायता भी दी जा रही है। इससे पहले 8.27 लाख प्रभावित परिवारों के बैंक खातों में कुल 579.23 करोड़ रुपये की राहत राशि भेजी गई थी। प्रत्येक परिवार को 7,000 रुपये की सहायता दी गई थी। प्रशासन की ओर से राहत शिविरों और सामुदायिक रसोई के जरिए भी प्रभावित लोगों तक आवश्यक सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं।

     

    नुकसान के शुरुआती आकलन में अलग-अलग विभागों की रिपोर्ट को शामिल किया गया है। सड़क निर्माण, ग्रामीण कार्य, जल संसाधन, कृषि, पशुपालन और अन्य विभागों से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर नुकसान का अनुमान तैयार किया गया है। हालांकि, बाढ़ का पानी कई क्षेत्रों में पूरी तरह नहीं उतरने के कारण अभी सभी जगहों का विस्तृत सर्वे संभव नहीं हो पाया है।

     

    इसी वजह से 10 हजार करोड़ रुपये का आंकड़ा अंतिम नहीं माना जा रहा है। पानी कम होने के बाद खेतों, घरों और सार्वजनिक संपत्तियों का दोबारा सर्वे किया जाएगा। इस दौरान क्षतिग्रस्त सड़कों, पुलों, तटबंधों और दूसरी सरकारी संपत्तियों की मरम्मत के संभावित खर्च का भी आकलन किया जाएगा। इसके बाद अंतिम नुकसान की रिपोर्ट केंद्र सरकार को भेजी जाएगी।

     

    बिहार में बाढ़ की स्थिति का एक महत्वपूर्ण पहलू नदियों का जलस्तर भी रहा है। गंगा, गंडक, कोसी, पुनपुन और बागमती सहित कई नदियां अलग-अलग स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बहती रही हैं। नेपाल और आसपास के क्षेत्रों में हुई बारिश के साथ बिहार और पड़ोसी राज्यों में बारिश ने भी नदियों के जलस्तर को प्रभावित किया।

     

    अब प्रशासन के सामने राहत के साथ-साथ पुनर्वास और क्षतिग्रस्त infrastructure को दोबारा तैयार करने की चुनौती है। खेतों में जमा पानी हटने के बाद फसल नुकसान का वास्तविक आंकड़ा सामने आएगा। ग्रामीण इलाकों में मकानों और सड़कों की स्थिति की भी विस्तृत जांच करनी होगी।

     

    करीब 10 हजार करोड़ रुपये का अनुमान बिहार में बाढ़ से हुए नुकसान की गंभीरता को दर्शाता है, लेकिन अंतिम तस्वीर पानी पूरी तरह उतरने और विस्तृत सर्वे पूरा होने के बाद ही सामने आएगी। राज्य सरकार की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर केंद्र से सहायता की प्रक्रिया आगे बढ़ने की उम्मीद है।

    Loading

    Comments are off for this post.