Last updated: September 20th, 2026 at 12:45 pm

पटना: बिहार विधान परिषद की पटना स्नातक सीट का चुनाव इस बार जेडीयू के भीतर चल रही खींचतान के कारण चर्चा में है। मौजूदा विधान पार्षद नीरज कुमार को पार्टी ने फिर उम्मीदवार बनाया है, लेकिन मोकामा विधायक अनंत सिंह ने उनके खिलाफ खुलकर मोर्चा खोल दिया है। अनंत सिंह ने निर्दलीय उम्मीदवार अनुज कुमार को समर्थन देने की घोषणा की है।
इसी बीच 19 सितंबर को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और केंद्रीय मंत्री एवं जेडीयू के वरिष्ठ नेता ललन सिंह की मुलाकात हुई। दोनों के बीच काफी देर तक बातचीत हुई। मुलाकात के बाद ललन सिंह खुद नीतीश कुमार को उनकी गाड़ी तक छोड़ने आए। इस घटनाक्रम ने पटना स्नातक सीट को लेकर जेडीयू की रणनीति पर चर्चा तेज कर दी है।
नीरज के सामने पार्टी के ही विधायक की चुनौती
पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से नीरज कुमार लगातार तीन बार चुनाव जीत चुके हैं। इस बार उनके सामने आरजेडी के दिलीप कुमार और निर्दलीय अनुज कुमार मैदान में हैं। अनुज कुमार को अनंत सिंह का समर्थन हासिल है।
अनंत सिंह ने सार्वजनिक तौर पर कहा है कि वह नीरज कुमार को चुनाव में हराने के लिए अनुज कुमार के पक्ष में प्रचार और समर्थन करेंगे। दोनों पक्षों के बीच बयानबाजी अब पुराने राजनीतिक विवादों के साथ-साथ एके-47 और नार्को टेस्ट जैसे मुद्दों तक पहुंच चुकी है।
ऐसे में जेडीयू के लिए चुनौती केवल विपक्षी उम्मीदवारों से मुकाबले की नहीं, बल्कि पार्टी के भीतर से सामने आए विरोध की भी है।
नीतीश-ललन की बैठक क्यों अहम मानी जा रही?
नीतीश कुमार और ललन सिंह की मुलाकात ऐसे समय हुई है जब अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच विवाद सार्वजनिक हो चुका है। हालांकि, जेडीयू की ओर से यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि बैठक में पटना स्नातक चुनाव या अनंत सिंह को लेकर कोई खास फैसला हुआ या नहीं।
ललन सिंह ने पार्टी में टूट या बड़े मतभेद की अटकलों को खारिज करते हुए कहा है कि जेडीयू एकजुट है और आंतरिक मामलों को बातचीत के जरिए सुलझाया जा सकता है।
इसलिए इस मुलाकात को फिलहाल नेतृत्व की सक्रियता के तौर पर देखा जा रहा है, लेकिन इसके आधार पर किसी निश्चित कार्रवाई या समझौते का निष्कर्ष निकालना अभी जल्दबाजी होगा।
2020 में नीरज और आजाद गांधी के बीच था इतना अंतर
पिछले पटना स्नातक MLC चुनाव का आंकड़ा भी इस बार के समीकरण को समझने में अहम है। 2020 में नीरज कुमार को 20,948 वोट मिले थे, जबकि आरजेडी के आजाद गांधी को 12,696 वोट मिले थे। दोनों के बीच 8,252 वोट का अंतर रहा था।
इस बार तस्वीर में एक बड़ा बदलाव यह है कि नीरज कुमार को पार्टी के ही विधायक अनंत सिंह के विरोध का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में चुनाव में वोटों के संभावित बंटवारे पर सबकी नजर रहेगी।
मुकाबले में JDU, अनंत सिंह और RJD के अलग-अलग समीकरण
पटना स्नातक सीट पर फिलहाल तीन प्रमुख राजनीतिक धाराएं दिखाई दे रही हैं। एक ओर जेडीयू का आधिकारिक संगठन और उसका उम्मीदवार नीरज कुमार है। दूसरी ओर अनंत सिंह के समर्थन वाले निर्दलीय अनुज कुमार हैं। वहीं आरजेडी ने दिलीप कुमार को मैदान में उतारा है।
इस वजह से चुनाव को सिर्फ नीरज कुमार बनाम अनुज कुमार के तौर पर देखना पूरे समीकरण को नहीं दर्शाता। सामाजिक आधार, व्यक्तिगत प्रभाव और दलगत संगठन—तीनों का असर चुनावी गणित पर पड़ सकता है।
आगे क्या होगा, इसी पर टिकी नजर
नीतीश कुमार के सामने फिलहाल दो अहम पहलू हैं। पहला, पार्टी उम्मीदवार नीरज कुमार को संगठन का समर्थन दिलाना और दूसरा, अनंत सिंह के विरोध को बड़े संगठनात्मक विवाद में बदलने से रोकना।
नीतीश-ललन मुलाकात के बाद यह चर्चा जरूर तेज हुई है कि पार्टी नेतृत्व अब इस टकराव को लेकर सक्रिय भूमिका निभा सकता है। हालांकि, अभी तक अनंत सिंह के खिलाफ किसी कार्रवाई या किसी समझौते की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि जेडीयू संगठन नीरज कुमार के समर्थन में किस तरह सक्रिय होता है, अनंत सिंह से बातचीत के जरिए विवाद को सीमित करने की कोशिश होती है या फिर दोनों के बीच राजनीतिक मुकाबला चुनाव तक जारी रहता है।
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