Last updated: September 22nd, 2026 at 12:44 pm

दिल्ली की वोटर लिस्ट के विशेष सघन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से कई अहम सवाल पूछे हैं। अदालत ने ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ के आधार पर बड़ी संख्या में मतदाताओं को भेजे गए नोटिस की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए इसे स्पष्ट करने को कहा है। सुनवाई के दौरान कोर्ट की ओर से यह टिप्पणी भी सामने आई कि बड़ी संख्या में नोटिस लगभग ‘मशीन से जारी’ किए गए लगते हैं।
33 लाख नोटिस पर कोर्ट ने मांगी जानकारी
RTI कार्यकर्ता अंजलि भारद्वाज की याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने चुनाव आयोग से पूछा कि ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ का आधार और इसका इस्तेमाल किस तरह किया जा रहा है, इसे स्पष्ट किया जाए।
याचिका में 33 लाख से अधिक मतदाताओं को जारी नोटिस और उनमें दिए गए कारणों को लेकर सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने दलील दी कि कुछ नोटिस में ऐसे आधार बताए गए हैं, जिनका जवाब देने के लिए आयोग की ओर से मांगे गए दस्तावेजों में जरूरी जानकारी ही उपलब्ध नहीं है।
ECI ने बताया- करीब 14 हजार BLO काम कर रहे
चुनाव आयोग की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता डीएस नायडू ने अदालत को बताया कि करीब 14 हजार बूथ लेवल अधिकारी और 1,200 ERO इस प्रक्रिया में लगातार काम कर रहे हैं। आयोग के मुताबिक, मतदाताओं को जवाब देने के लिए 29 अक्टूबर तक का समय दिया गया है और जरूरत पड़ने पर समयसीमा बढ़ाने पर विचार किया जा सकता है।
आयोग ने अदालत को यह भरोसा भी दिलाया कि किसी मतदाता का नाम उचित कारण के बिना मतदाता सूची से नहीं हटाया जाएगा। दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय के मुताबिक, ये नोटिस सिस्टम के जरिए तैयार किए गए हैं और मतदाताओं को रिकॉर्ड में मौजूद विसंगतियों को सुधारने का अवसर देने के लिए भेजे गए हैं।
कोर्ट ने दिए नोटिस प्रक्रिया को आसान बनाने के सुझाव
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सुझाव दिया कि अगर अलग-अलग तरह की आपत्तियां सामने आ रही हैं तो प्रत्येक श्रेणी के लिए एक मानक जवाब तैयार किया जा सकता है। इससे मतदाताओं को यह समझने में मदद मिलेगी कि संबंधित आपत्ति का जवाब देने के लिए कौन-से दस्तावेज या जानकारी पर्याप्त होगी।
जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने यह सुझाव भी दिया कि BLO को वार्ड कार्यालयों में उपलब्ध कराया जा सकता है, ताकि मतदाता सीधे जाकर अपनी समस्या का समाधान पूछ सकें। आयोग ने बताया कि इस तरह के सहायता कैंप आयोजित किए जा रहे हैं और मतदाताओं की मदद के लिए WhatsApp ग्रुप भी बनाए गए हैं।
ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में 47 लाख से ज्यादा नाम शामिल नहीं
दिल्ली में SIR के तहत 31 अगस्त को ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी की गई थी। इसमें 97 लाख से अधिक मतदाता शामिल थे। इससे पहले की मतदाता सूची में करीब 1.45 करोड़ नाम होने की बात सामने आई थी।
ड्राफ्ट सूची में करीब 47.56 लाख नाम शामिल नहीं किए गए। इन्हें अनुपस्थित, स्थायी रूप से स्थानांतरित, मृत या डुप्लीकेट जैसी श्रेणियों से जोड़ा गया है। इसके अलावा करीब 33 लाख मतदाताओं को ‘अनमैप्ड’ या ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ श्रेणियों में नोटिस भेजे गए हैं।
इनमें करीब 13.80 लाख मतदाता 2002 की पुरानी वोटर लिस्ट से मैप नहीं हो पाए हैं, जबकि लगभग 19.33 लाख मतदाताओं को ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ श्रेणी में रखा गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को इन मुद्दों पर जवाब देने के लिए दो सप्ताह का समय दिया है। मामले की अगली सुनवाई में नोटिस जारी करने की प्रक्रिया और ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ की व्यवस्था पर आगे सुनवाई होगी।
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