Last updated: September 26th, 2026 at 02:18 pm

बिहार के जमुई में नाबालिग लड़की के साथ हुई कथित छेड़छाड़ और बदसलूकी के मामले ने अब एक नए विवाद का रूप ले लिया है। पीड़िता और उसके परिवार की तस्वीर मुख्यमंत्री के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से साझा किए जाने के बाद पटना में मुख्यमंत्री कार्यालय के एक कर्मचारी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस के अनुसार, तस्वीर के सार्वजनिक होने से नाबालिग की पहचान उजागर होने और उसकी निजता प्रभावित होने की आशंका थी।
पुलिस के मुताबिक, सचिवालय थाना, पटना में मुख्यमंत्री कार्यालय में तैनात स्टेनोग्राफर सागर प्रसाद के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। शिकायत एक पुलिस सहायक उपनिरीक्षक की ओर से दी गई थी। शिकायत में कहा गया कि सोशल मीडिया पर तस्वीर पोस्ट होने से नाबालिग पीड़िता की निजता और गरिमा प्रभावित हुई तथा उसकी पहचान सार्वजनिक होने की स्थिति पैदा हो सकती थी। पुलिस ने मामले में भारतीय न्याय संहिता, पॉक्सो कानून और सूचना प्रौद्योगिकी कानून की संबंधित धाराएं लगाई हैं।
बताया गया है कि मुख्यमंत्री ने गुरुवार को पीड़िता और उसके परिवार से मुलाकात की थी। इस मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर एक तस्वीर पोस्ट की गई थी। पोस्ट में परिवार को जल्द न्याय दिलाने और आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिए जाने की जानकारी दी गई थी। तस्वीर कुछ ही मिनटों के भीतर हटा दी गई, लेकिन तब तक उसका स्क्रीनशॉट और अन्य माध्यमों से प्रसार होने की बात सामने आई।
पुलिस की शुरुआती जांच के अनुसार, मुख्यमंत्री कार्यालय के स्टेनोग्राफर पर तस्वीर अपलोड करने का आरोप है। प्राथमिकी में तस्वीर को आगे प्रसारित करने वाले अन्य लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग का उल्लेख है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच के दौरान यह निर्धारित किया जाएगा कि तस्वीर किस प्रक्रिया के तहत सोशल मीडिया पर अपलोड हुई और इसे आगे किन-किन माध्यमों से साझा किया गया।
मामले में पॉक्सो एक्ट की धारा 23 का भी उल्लेख किया गया है। इस प्रावधान का उद्देश्य यौन अपराध से प्रभावित बच्चों की पहचान को सार्वजनिक होने से बचाना है। पुलिस की प्राथमिकी में इसी तरह के कानूनी प्रावधानों के साथ सूचना प्रौद्योगिकी कानून की संबंधित धाराओं को भी शामिल किया गया है। हालांकि, इस मामले में किस व्यक्ति की कितनी कानूनी जिम्मेदारी बनती है, इसका निर्धारण जांच और आगे की न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होगा।
तस्वीर सामने आने के बाद विपक्षी नेताओं ने भी इस मुद्दे पर सवाल उठाए। आरजेडी नेताओं ने आरोप लगाया कि नाबालिग की पहचान सार्वजनिक होने की स्थिति बनी और मुख्यमंत्री के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की। सांसद मीसा भारती ने सचिवालय थाने में शिकायत देने की बात कही। पुलिस के अनुसार, उनकी ओर से दिया गया आवेदन भी पहले से दर्ज मामले की जांच का हिस्सा बनाया गया है।
वहीं, पुलिस ने यह स्पष्ट किया कि तस्वीर से जुड़े मामले में प्राथमिकी मुख्यमंत्री कार्यालय के कर्मचारी के खिलाफ दर्ज की गई है। पुलिस की ओर से यह भी कहा गया है कि शिकायतों और उपलब्ध सामग्री की जांच की जाएगी तथा किसी व्यक्ति को जांच पूरी होने से पहले दोषी नहीं माना जाएगा। इस तरह मामले में सोशल मीडिया पोस्ट, उसे अपलोड करने की प्रक्रिया और तस्वीर के प्रसार की पूरी कड़ी की जांच महत्वपूर्ण होगी।
यह पूरा विवाद जमुई में 19 सितंबर को सामने आई उस घटना के बाद शुरू हुआ, जिसमें एक नाबालिग लड़की और उसके साथी के साथ कथित तौर पर बदसलूकी की गई थी। घटना से संबंधित वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित होने के बाद पुलिस ने कार्रवाई शुरू की थी। रिपोर्टों के अनुसार, उस मूल मामले में आरोपियों के खिलाफ पॉक्सो एक्ट और भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है।
अब तस्वीर साझा किए जाने से जुड़े मामले में पुलिस सोशल मीडिया पोस्ट के डिजिटल रिकॉर्ड, उसे अपलोड करने वाले व्यक्ति और उसे आगे प्रसारित करने वालों की भूमिका की जांच कर रही है। प्राथमिकी दर्ज होने के बाद आगे की कार्रवाई जांच में सामने आने वाले तथ्यों और उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर होगी।
नाबालिग पीड़ितों से जुड़े मामलों में उनकी पहचान और निजी जानकारी की सुरक्षा कानूनी प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसलिए इस मामले में भी तस्वीर के सार्वजनिक होने की परिस्थितियों और उससे जुड़े संभावित कानूनी उल्लंघनों की जांच पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। अंतिम स्थिति जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी।
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