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विक्रमशिला सेतु पर 16 घंटे से भीषण जाम, 20 किलोमीटर तक वाहनों की कतार; कल रात से पुल होगा बंद

  बिहार के भागलपुर में विक्रमशिला सेतु पर मंगलवार को भीषण जाम की स्थिति बनी रही। पुल और उसके दोनों
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    बिहार के भागलपुर में विक्रमशिला सेतु पर मंगलवार को भीषण जाम की स्थिति बनी रही। पुल और उसके दोनों तरफ संपर्क मार्गों पर वाहनों की लंबी कतार लग गई। रिपोर्टों के अनुसार जाम करीब 16 घंटे तक जारी रहा और कई किलोमीटर तक वाहनों की लाइन लगी रही। यात्रियों को पुल पार करने में कई घंटे लग रहे हैं। इस दौरान महिला, बच्चे, बुजुर्ग, मरीज और कामकाजी लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।

     

    विक्रमशिला सेतु उत्तर और पूर्वी बिहार को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण मार्ग है। पुल पर पहले से यातायात का दबाव रहता है, लेकिन 30 सितंबर की मध्यरात्रि से इसके तीन महीने के लिए बंद होने की खबर के बाद पिछले दो दिनों में वाहनों की संख्या और बढ़ गई है। कई वाहन चालक पुल बंद होने से पहले अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए इसी रास्ते का इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे सामान्य दिनों की तुलना में यातायात का दबाव कई गुना बढ़ गया।

     

    जाम का असर केवल पुल तक सीमित नहीं रहा। नवगछिया की तरफ से आने वाले वाहनों की कतार भागलपुर बाइपास और जीरोमाइल की ओर तक पहुंची, जबकि दूसरी तरफ भी लंबी लाइन देखने को मिली। कुछ रिपोर्टों में जाम का दायरा करीब 20 किलोमीटर तक बताया गया है। कई यात्रियों को थोड़ी दूरी तय करने में भी घंटों लग गए।

     

    लंबे समय तक वाहनों के फंसे रहने से यात्रियों को पानी, भोजन और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं की परेशानी हुई। गर्मी और उमस के बीच जाम में फंसे लोगों में बच्चे और बुजुर्ग विशेष रूप से परेशान हुए। कुछ यात्रियों के वाहन काफी देर तक आगे नहीं बढ़ पाए, जिसके बाद कुछ लोगों ने वाहन छोड़कर पैदल रास्ता तय करने की कोशिश भी की।

     

    यातायात व्यवस्था को लेकर स्थानीय लोगों और वाहन चालकों की ओर से भी सवाल उठाए गए। पर्याप्त संख्या में ट्रैफिक पुलिस की तैनाती नहीं होने, ओवरटेकिंग और नो-एंट्री नियमों के उल्लंघन को जाम बढ़ने की वजहों में बताया गया। ट्रैफिक अधिकारियों के अनुसार पिछले करीब 48 घंटों से पुल पर वाहनों का दबाव काफी अधिक है और जाम को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त पुलिसकर्मियों की तैनाती की जा रही है।

     

    इस बीच विक्रमशिला सेतु को स्थायी मरम्मत और पुनर्स्थापन कार्य के लिए 30 सितंबर की रात 12 बजे के बाद पूरी तरह बंद करने की तैयारी है। 1 अक्टूबर से पुल पर मौजूद अस्थायी बेली ब्रिज हटाने का काम शुरू किया जाएगा। इसके बाद पुल के क्षतिग्रस्त हिस्सों में नए स्टील स्ट्रक्चर और डेक स्लैब लगाए जाएंगे। पूरी पुनर्स्थापन प्रक्रिया में करीब तीन महीने लगने की संभावना है।

     

    पुल की मरम्मत के दौरान केवल क्षतिग्रस्त हिस्सों को ठीक करने का काम नहीं होगा, बल्कि पुल की संरचनात्मक मजबूती से जुड़े कई तकनीकी कार्य भी किए जाएंगे। पुराने बियरिंग और एक्सपेंशन ज्वाइंट को बदलने तथा क्षतिग्रस्त हिस्सों में स्थायी स्टील संरचना लगाने की योजना है। परियोजना के लिए विशेषज्ञ तकनीकी टीम भी तैनात की जा रही है।

     

    पुल बंद होने से भागलपुर और नवगछिया के बीच सड़क संपर्क प्रभावित होगा। इसे देखते हुए प्रशासन वैकल्पिक यातायात व्यवस्था तैयार कर रहा है। गंगा के रास्ते यात्रियों के लिए फेरी और क्रूज सेवा चलाने की तैयारी की गई है। कुछ वैकल्पिक घाटों को भी यात्री आवागमन के लिए तैयार किया जा रहा है, ताकि पुल बंद रहने के दौरान लोगों को पूरी तरह सड़क मार्ग पर निर्भर न रहना पड़े।

     

    प्रशासन की ओर से लोगों से अपील की जा रही है कि पुल बंद होने के बाद निर्धारित वैकल्पिक मार्गों का इस्तेमाल करें। भारी वाहनों और लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए पहले से वैकल्पिक मार्ग की योजना बनाना जरूरी होगा। पुल बंद होने की अवधि में भागलपुर और नवगछिया के बीच यातायात व्यवस्था को बनाए रखना प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती रहेगी।

     

    पुल पर जाम की स्थिति को सामान्य करने के लिए यातायात पुलिस अतिरिक्त बल के साथ काम कर रही है। वहीं 30 सितंबर की मध्यरात्रि से पुल बंद होने की तैयारी भी अंतिम चरण में है। ऐसे में मंगलवार का लंबा जाम इस बात का संकेत है कि पुल बंद होने से पहले वाहनों का दबाव काफी बढ़ गया है और आने वाले दिनों में वैकल्पिक यातायात व्यवस्था की भूमिका महत्वपूर्ण रहने वाली है।

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