Human Live Media

HomeNewsसंभल हिंसा केस में अफरोज की NSA हिरासत रद्द, सुप्रीम कोर्ट ने UP सरकार पर लगाया 10 लाख का जुर्माना

संभल हिंसा केस में अफरोज की NSA हिरासत रद्द, सुप्रीम कोर्ट ने UP सरकार पर लगाया 10 लाख का जुर्माना

सुप्रीम कोर्ट ने 2024 के संभल हिंसा मामले में आरोपी मुल्ला अफरोज की राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत
nsa10_29092026122558_2909f_1790664958_604

सुप्रीम कोर्ट ने 2024 के संभल हिंसा मामले में आरोपी मुल्ला अफरोज की राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने माना कि पुलिस हिरासत में दिए गए कथित कबूलनामे के आधार पर अफरोज को NSA के तहत निरुद्ध करना कानूनी रूप से उचित नहीं था। इसी के साथ अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार पर 10 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

Table of Contents

    पुलिस कस्टडी में दिए बयान को बनाया गया था आधार

    मामले की सुनवाई जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ ने की। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पुलिस हिरासत में दिए गए अतिरिक्त-न्यायिक कबूलनामे को NSA के तहत निवारक हिरासत का पर्याप्त आधार नहीं बनाया जा सकता।

    इससे पहले 8 सितंबर को पीठ ने मामले में फैसला सुरक्षित रखा था। सुनवाई के दौरान अदालत ने इस बात पर सवाल उठाया था कि क्या पुलिस हिरासत में दिया गया बयान किसी व्यक्ति के खिलाफ NSA लगाने के लिए पर्याप्त आधार हो सकता है।

    2024 की संभल हिंसा से जुड़ा है मामला

    संभल की शाही जामा मस्जिद में अदालत के आदेश पर सर्वे के दौरान 24 नवंबर 2024 को हिंसा हुई थी। इस घटना में चार लोगों की मौत हुई थी। अफरोज को इस मामले में आरोपी बनाया गया था और 17 जनवरी 2025 को गिरफ्तार किया गया था।

    करीब नौ महीने जेल में रहने के बाद 9 सितंबर 2025 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उसे जमानत दे दी थी। इसके बाद 13 अक्टूबर 2025 को उत्तर प्रदेश सरकार ने उस पर NSA लगाया और उसे निवारक हिरासत में ले लिया।

    सरकार ने सार्वजनिक व्यवस्था को खतरा बताया था

    राज्य सरकार की ओर से NSA हिरासत के पीछे यह आधार बताया गया था कि अफरोज के दोबारा हिंसा में शामिल होने या सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित करने की आशंका थी।

    अफरोज की ओर से सुप्रीम कोर्ट में रेखा बनाम तमिलनाडु और अमीना बेगम बनाम तेलंगाना जैसे फैसलों का हवाला दिया गया। दलील दी गई कि निवारक हिरासत के लिए पर्याप्त सामग्री और उस पर उचित विचार जरूरी है। सिर्फ पहले दर्ज आपराधिक मामलों का हवाला अपने आप में NSA हिरासत का आधार नहीं हो सकता।

    सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अफरोज की NSA के तहत हिरासत समाप्त हो गई है। अदालत ने इस मामले में उत्तर प्रदेश सरकार को 10 लाख रुपये का जुर्माना भरने का भी निर्देश दिया है।

    Loading

    Comments are off for this post.