Last updated: September 30th, 2026 at 12:24 pm

वाराणसी में गंगा का जलस्तर मंगलवार रात स्थिर होने से लोगों को थोड़ी राहत मिली है, लेकिन वरुणा नदी के बढ़ते पानी ने तटवर्ती इलाकों की चिंता बढ़ा दी है। गंगा के पलट प्रवाह के कारण वरुणा का पानी आसपास के निचले क्षेत्रों की ओर बढ़ रहा है। प्रशासन और राहत-बचाव से जुड़ी टीमें प्रभावित इलाकों पर नजर बनाए हुए हैं।
केंद्रीय जल आयोग के अनुसार, वाराणसी में गंगा का जलस्तर मंगलवार को दिन के समय करीब तीन सेंटीमीटर प्रति घंटे की गति से बढ़ रहा था, लेकिन रात में इसमें स्थिरता आई। प्रयागराज में गंगा का जलस्तर घटने की शुरुआत होने के बाद वाराणसी में भी आने वाले समय में पानी कम होने की संभावना जताई गई है। हालांकि फिलहाल घाटों और निचले इलाकों में पानी का असर बना हुआ है।
गंगा के बढ़े जलस्तर का असर वाराणसी के प्रमुख घाटों पर भी दिखाई दे रहा है। कई पक्के घाट पानी में डूबे हुए हैं। मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट पर अंतिम संस्कार के लिए आने वाले लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। दशाश्वमेध घाट के आसपास भी पानी बढ़ने से सामान्य गतिविधियां प्रभावित हुई हैं। नमो घाट और अस्सी घाट पर भी गंगा का पानी ऊपर तक पहुंच गया है।
गंगा के स्थिर होने के बावजूद वरुणा नदी की स्थिति ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। गंगा का पलट प्रवाह शुरू होने के कारण वरुणा का पानी बढ़ रहा है। पुल कोहना, सलारपुर और रसूलगढ़ जैसे इलाकों में नालों के रास्ते पानी बस्तियों की ओर बढ़ने की सूचना है। इससे वरुणा किनारे रहने वाले परिवारों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।
प्रभावित इलाकों में बाढ़ के पानी के साथ गंदगी की समस्या भी सामने आ रही है। लंबे समय तक पानी जमा रहने से साफ-सफाई और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां बढ़ सकती हैं। ऐसे में स्थानीय लोगों को दूषित पानी से बचने और प्रशासन की ओर से जारी सुरक्षा निर्देशों का पालन करने की सलाह दी जा रही है। पानी घटने के बाद भी सफाई और दवा के छिड़काव की जरूरत बनी रह सकती है।
वाराणसी में प्रशासन और बचाव दल स्थिति पर लगातार नजर रख रहे हैं। प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को सतर्क रहने के लिए कहा जा रहा है। खासतौर पर वरुणा के किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले परिवारों के लिए जलस्तर में होने वाले बदलाव पर नजर रखना जरूरी है। आवश्यकता पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने की व्यवस्था भी की जा सकती है।
इस बीच मौसम में भी बदलाव देखने को मिला है। हल्की बारिश के बाद वाराणसी में उमस बढ़ी है। हालांकि उपलब्ध मौसम पूर्वानुमान के अनुसार आगे मौसम अपेक्षाकृत साफ रहने और तापमान में मामूली वृद्धि होने की संभावना बताई गई है। इससे बारिश का तत्काल दबाव कम हो सकता है, लेकिन नदी के जलस्तर और पलट प्रवाह के कारण निचले इलाकों में सावधानी जरूरी बनी हुई है।
गंगा के जलस्तर में स्थिरता और प्रयागराज में पानी घटने की शुरुआत वाराणसी के लिए राहत का संकेत है, लेकिन इसका असर निचले इलाकों तक पहुंचने में समय लग सकता है। वहीं वरुणा में बढ़ते पानी के कारण कुछ तटवर्ती क्षेत्रों में परेशानी अभी जारी है। इसलिए प्रशासन के सामने फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती प्रभावित बस्तियों में पानी के फैलाव को रोकना, लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और बाढ़ के बाद साफ-सफाई की व्यवस्था बनाए रखना है।
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