Last updated: September 30th, 2026 at 12:26 pm

दिल्ली में सर्दियों के दौरान बढ़ने वाले वायु प्रदूषण से निपटने की तैयारियों के बीच सरकार ने प्रदूषण नियंत्रण को लेकर दो अहम फैसलों को मंजूरी दी है। इसके तहत राजधानी की छोटी और संकरी सड़कों पर मशीनीकृत सफाई व्यवस्था का विस्तार किया जाएगा। इसके लिए 30 इलेक्ट्रिक वाहन आधारित मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीनें उपलब्ध कराई जाएंगी। साथ ही IIT दिल्ली के सहयोग से PM2.5 और PM10 प्रदूषण के स्रोतों की रियल-टाइम निगरानी और विश्लेषण की व्यवस्था विकसित की जाएगी।
यह फैसले दिल्ली सरकार की कैबिनेट बैठक में लिए गए। सरकार के अनुसार, प्रदूषण नियंत्रण की रणनीति को केवल सर्दियों तक सीमित रखने के बजाय पूरे साल प्रदूषण के अलग-अलग स्रोतों की पहचान और उन पर कार्रवाई करने पर जोर दिया जा रहा है। नई व्यवस्था में सड़क की धूल, वाहनों से होने वाला उत्सर्जन और बायोमास जलाने जैसे स्रोतों का लगातार विश्लेषण किया जाएगा।
नई मशीनीकृत सफाई व्यवस्था के तहत 10 मीटर से कम चौड़ाई वाली सड़कों को भी सफाई के दायरे में लाया जाएगा। सरकार ने इसके लिए करीब 609 किलोमीटर लंबी सड़कों की पहचान की है। यह नेटवर्क 250 वार्डों में फैली 854 सड़कों को कवर करता है। इन सड़कों पर फिलहाल बड़ी सफाई मशीनों की पहुंच सीमित रहने के कारण धूल नियंत्रण की चुनौती बनी रहती है।
इन 30 इलेक्ट्रिक रोड स्वीपिंग मशीनों की खरीद के लिए दिल्ली नगर निगम को सरकारी अनुदान दिया जाएगा। मशीनों को जमीन पर तैनात करने और उनका संचालन करने की जिम्मेदारी MCD की होगी। इस परियोजना पर 10 वर्षों में लगभग 393.73 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। मशीनों के जरिए छोटी सड़कों पर जमा धूल और अन्य सड़क कचरे की नियमित सफाई की जाएगी।
प्रदूषण नियंत्रण योजना का दूसरा हिस्सा वैज्ञानिक निगरानी से जुड़ा है। इसके तहत IIT दिल्ली के साथ पांच साल का सहयोग किया जाएगा। प्रस्तावित व्यवस्था PM2.5 और PM10 के स्रोतों तथा उनके योगदान का 24 घंटे के आधार पर विश्लेषण करने में मदद करेगी। इससे अलग-अलग क्षेत्रों में प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों की पहचान करने और उनके आधार पर कार्रवाई की योजना बनाने का प्रयास किया जाएगा।
इस परियोजना में रियल-टाइम डैशबोर्ड और विश्लेषणात्मक रिपोर्टिंग सिस्टम विकसित करने की योजना भी शामिल है। राउज एवेन्यू स्थित मौजूदा सुपर साइट को फिर से सक्रिय करने और मोबाइल लैब का इस्तेमाल करने की व्यवस्था प्रस्तावित है। मोबाइल लैब के जरिए प्रदूषण वाले क्षेत्रों और स्थानीय स्रोतों का अध्ययन किया जा सकेगा। इस परियोजना की अनुमानित लागत पांच वर्षों में करीब 19.22 करोड़ रुपये बताई गई है।
दिल्ली में प्रदूषण की समस्या में सड़क की धूल लंबे समय से एक महत्वपूर्ण कारक मानी जाती रही है। छोटी सड़कों पर सफाई मशीनों की पहुंच बढ़ाने का उद्देश्य इसी स्रोत से निकलने वाले धूल कणों को नियंत्रित करना है। हालांकि, केवल सड़क सफाई से प्रदूषण की पूरी समस्या का समाधान नहीं होगा। वाहनों का उत्सर्जन, निर्माण गतिविधियां और मौसम से जुड़े अन्य कारक भी वायु गुणवत्ता को प्रभावित करते हैं। नई निगरानी व्यवस्था में अलग-अलग स्रोतों का विश्लेषण करने पर इसी वजह से जोर दिया गया है।
सरकार की योजना के अनुसार नई मशीनों की तैनाती और वैज्ञानिक निगरानी को आने वाले सर्दी के मौसम की तैयारियों से जोड़ा गया है। अधिकारियों ने छोटी सड़कों की सफाई को व्यापक बनाने के साथ-साथ प्रदूषण के स्रोतों की पहचान के लिए तकनीकी व्यवस्था मजबूत करने पर जोर दिया है। इससे प्रशासन के पास प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े फैसलों के लिए अधिक स्थानीय और वास्तविक समय का डेटा उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा।
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