Last updated: September 30th, 2026 at 12:29 pm

दिल्ली-NCR में 1 अक्टूबर 2026 से वाहनों के प्रदूषण प्रमाणपत्र यानी Pollution Under Control Certificate (PUCC/PUC) को लेकर नियम सख्त होने जा रहा है। नए प्रवर्तन अभियान के तहत वैध PUC प्रमाणपत्र नहीं रखने वाले वाहनों को पेट्रोल, डीजल या CNG देने से रोका जाएगा। यह व्यवस्था दिल्ली-NCR में सर्दियों के दौरान बढ़ने वाले वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने की तैयारियों का हिस्सा है।
दिल्ली में इस नियम को मिशन मोड में लागू करने की तैयारी है। राजधानी के करीब 500 ऐसे ईंधन स्टेशनों पर निगरानी की जाएगी, जहां Automatic Number Plate Recognition यानी ANPR कैमरे उपलब्ध हैं। इन कैमरों और तकनीकी प्रणालियों की मदद से वाहन की नंबर प्लेट की पहचान कर उसके प्रदूषण प्रमाणपत्र की वैधता जांचने का प्रयास किया जाएगा। वैध प्रमाणपत्र नहीं मिलने पर संबंधित वाहन को ईंधन देने से रोका जा सकता है।
यह व्यवस्था केवल दिल्ली तक सीमित नहीं है। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग की व्यवस्था के तहत 1 अक्टूबर से पूरे NCR में वैध PUCC के बिना वाहनों को ईंधन नहीं देने का प्रावधान लागू किया जा रहा है। इसका उद्देश्य ऐसे वाहनों के इस्तेमाल को हतोत्साहित करना है जिनके पास निर्धारित प्रदूषण जांच प्रमाणपत्र नहीं है।
वाहन मालिकों के लिए इसका सीधा मतलब है कि उन्हें अपनी गाड़ी का PUC स्टेटस पहले से जांच लेना चाहिए। अगर प्रमाणपत्र की वैधता समाप्त हो चुकी है या जल्द खत्म होने वाली है, तो समय रहते प्रदूषण जांच कराकर नया प्रमाणपत्र बनवाना जरूरी होगा। PUC प्रमाणपत्र की जानकारी ऑनलाइन वाहन संबंधी सरकारी पोर्टल पर भी जांची जा सकती है।
दिल्ली सरकार ने इस अभियान को सर्दियों के व्यापक प्रदूषण नियंत्रण कार्यक्रम से जोड़ा है। इसके तहत वाहनों से होने वाले प्रदूषण के साथ-साथ निर्माण गतिविधियों, सड़क की धूल और अन्य स्रोतों पर भी अलग-अलग स्तर पर कार्रवाई की योजना बनाई गई है। अक्टूबर से PUC नियमों के प्रवर्तन को तेज करने के बाद आने वाले महीनों में निर्माण और परिवहन से जुड़े अतिरिक्त प्रतिबंध भी लागू किए जाने हैं।
इस व्यवस्था में तकनीक की भूमिका भी महत्वपूर्ण होगी। ANPR कैमरे वाहन की नंबर प्लेट को पढ़कर संबंधित वाहन की जानकारी से मिलान करने में मदद करते हैं। इससे पेट्रोल पंप पर हर वाहन के दस्तावेज को मैन्युअल तरीके से जांचने की आवश्यकता कम हो सकती है। हालांकि, अलग-अलग स्थानों पर तकनीकी व्यवस्था पूरी तरह सक्रिय होने और उसके संचालन की स्थिति पर भी नियम के प्रभावी क्रियान्वयन की निर्भरता रहेगी।
PUC प्रमाणपत्र का उद्देश्य वाहनों के उत्सर्जन को निर्धारित मानकों के भीतर जांचना है। हालांकि, एक वैध PUC का अर्थ यह नहीं है कि वाहन से निकलने वाले हर प्रकार के प्रदूषक की जांच हो चुकी है। मौजूदा PUC परीक्षण में पेट्रोल, CNG और LPG वाहनों के लिए मुख्य रूप से कार्बन मोनोऑक्साइड और हाइड्रोकार्बन तथा डीजल वाहनों के लिए धुएं की अपारदर्शिता जैसे मानकों की जांच की जाती है। कुछ अन्य प्रदूषकों की अलग से निगरानी नहीं होती।
दिल्ली-NCR में प्रदूषण नियंत्रण के लिए आने वाले महीनों में कई अन्य कदम भी उठाए जा रहे हैं। दिल्ली में 1 अक्टूबर से PUC प्रवर्तन अभियान तेज होने के अलावा पुराने और नियमों के अनुरूप नहीं रहने वाले वाहनों पर भी कार्रवाई की तैयारी है। नवंबर से कुछ बाहरी वाहनों के प्रवेश को लेकर अतिरिक्त प्रतिबंध और दिसंबर से निर्माण एवं तोड़फोड़ गतिविधियों पर सख्त रोक की योजना भी घोषित की गई है।
ऐसे में दिल्ली-NCR में वाहन चलाने वालों के लिए 1 अक्टूबर से पहले अपने वाहन का PUC प्रमाणपत्र जांचना महत्वपूर्ण हो गया है। वैध प्रमाणपत्र नहीं होने पर पेट्रोल पंप पर ईंधन लेने में परेशानी हो सकती है और अलग से यातायात नियमों के तहत कार्रवाई भी हो सकती है। नए नियम का मुख्य उद्देश्य वाहनों से होने वाले उत्सर्जन की निगरानी को सख्त करना और सर्दियों के दौरान वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के व्यापक अभियान को मजबूत करना है।
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