Last updated: October 2nd, 2026 at 02:03 pm

दिल्ली में नवजात बच्चों में आनुवंशिक और जन्मजात बीमारियों की शुरुआती पहचान के लिए मुफ्त जेनेटिक स्क्रीनिंग की सुविधा शुरू की गई है। यह सुविधा फिलहाल लोक नायक जय प्रकाश अस्पताल यानी LNJP की मेडिकल जेनेटिक्स लैब में संचालित हो रही है। मार्च 2026 से चल रहे मिशन ANMOL के तहत हर महीने औसतन करीब 14 हजार नवजात बच्चों के सैंपल की जांच की जा रही है।
दिल्ली सरकार ने 2026-27 के बजट में मिशन ANMOL के तहत नवजात बच्चों की स्क्रीनिंग का प्रावधान किया था। इस कार्यक्रम का लक्ष्य हर साल करीब 2.5 लाख नवजातों की 56 तरह की आनुवंशिक और संबंधित स्वास्थ्य स्थितियों के लिए जांच करना है। इसका उद्देश्य ऐसी बीमारियों की पहचान जन्म के शुरुआती समय में करना है, जिनका पता सामान्य जांच से तुरंत नहीं चल पाता।
LNJP अस्पताल में स्थापित मेडिकल जेनेटिक्स लैब इस कार्यक्रम का शुरुआती केंद्र है। यहां सैंपल कलेक्शन के लिए अलग व्यवस्था के साथ जैविक नमूनों को सुरक्षित रखने के लिए विशेष तापमान वाली स्टोरेज सुविधा भी मौजूद है। लैब में नवजात बच्चों के सैंपल की जांच के साथ ऐसे मरीजों को भी जेनेटिक जांच की सुविधा दी जा रही है जिन्हें डॉक्टर किसी आनुवंशिक बीमारी की आशंका के कारण रेफर करते हैं।
स्क्रीनिंग में कई ऐसी स्थितियों की पहचान की जाती है जो बच्चे के विकास और स्वास्थ्य पर असर डाल सकती हैं। इनमें G6PD deficiency, थायरॉयड से जुड़ी समस्याएं और congenital adrenal hyperplasia जैसी स्थितियां शामिल हैं। इसके अलावा कई अन्य मार्कर की भी जांच की जाती है। हालांकि हर आनुवंशिक बीमारी की पहचान केवल नवजात स्क्रीनिंग से संभव नहीं होती, इसलिए जरूरत पड़ने पर डॉक्टर बच्चों को आगे की जेनेटिक जांच के लिए रेफर कर सकते हैं।
मेडिकल जेनेटिक्स विभाग में रोजाना ऐसे मामलों के रेफरल भी पहुंचते हैं जिनमें बच्चे के विकास में देरी, जन्मजात विकृति या ऐसी बीमारी होती है जिसका स्पष्ट कारण सामान्य जांच से पता नहीं चलता। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे मामलों में समय पर जेनेटिक जांच से बीमारी की पहचान करने और आगे के उपचार की योजना बनाने में मदद मिल सकती है।
मिशन ANMOL का दायरा केवल नवजात बच्चों तक सीमित नहीं है। जरूरत पड़ने पर माता-पिता की भी जेनेटिक जांच की जाती है, खासकर तब जब परिवार में किसी आनुवंशिक बीमारी का इतिहास हो। उदाहरण के तौर पर थैलेसीमिया या सिकल सेल बीमारी से जुड़े जीन की जांच के जरिए यह पता लगाने की कोशिश की जा सकती है कि माता-पिता में किसी बीमारी का आनुवंशिक गुण मौजूद है या नहीं।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि माता-पिता दोनों में सिकल सेल बीमारी का ट्रेट मौजूद हो तो बच्चे में बीमारी विरासत में मिलने की संभावना रहती है। इसलिए गर्भावस्था के दौरान या बच्चे के जन्म के शुरुआती समय में उचित जांच और जेनेटिक काउंसलिंग से परिवार को स्थिति समझने और चिकित्सकीय सलाह लेने का अवसर मिल सकता है।
कार्यक्रम को आगे दिल्ली के दूसरे सरकारी अस्पतालों तक विस्तार देने की योजना भी बताई गई है। दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री के अनुसार, सरकार का लक्ष्य धीरे-धीरे जेनेटिक टेस्टिंग की सुविधा को अन्य सरकारी अस्पतालों तक पहुंचाना और दिल्ली में जन्म लेने वाले बच्चों को मुफ्त स्क्रीनिंग के दायरे में लाना है।
मिशन ANMOL के तहत शुरुआती जांच का एक प्रमुख उद्देश्य बीमारी का पता चलने में लगने वाले समय को कम करना है। जन्म के समय कुछ आनुवंशिक या मेटाबॉलिक समस्याओं के स्पष्ट लक्षण नहीं दिखते। ऐसे मामलों में स्क्रीनिंग के जरिए जोखिम का संकेत मिलने पर डॉक्टर आगे की जांच और उपचार की दिशा तय कर सकते हैं।
LNJP अस्पताल की मेडिकल जेनेटिक्स लैब में हर महीने करीब 14 हजार नवजात सैंपल की स्क्रीनिंग हो रही है। दिल्ली सरकार अब इस मॉडल को दूसरे सरकारी अस्पतालों तक पहुंचाने की दिशा में काम कर रही है। इससे शहर में नवजात बच्चों की शुरुआती स्वास्थ्य जांच का दायरा बढ़ाने और आनुवंशिक बीमारियों की समय पर पहचान करने की कोशिश की जा रही है।
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