Last updated: October 2nd, 2026 at 02:07 pm

बिहार में गंडक नदी के बढ़ते जलस्तर ने उत्तर बिहार के कई जिलों में बाढ़ की स्थिति को गंभीर बना दिया है। नेपाल के गंडक बेसिन में लगातार बारिश और नदी में बढ़े पानी के कारण सारण और मुजफ्फरपुर समेत कई इलाकों में तटबंधों पर दबाव बढ़ा है। अलग-अलग स्थानों पर तटबंध टूटने के बाद पानी निचले इलाकों और गांवों में फैल गया है। उपलब्ध सरकारी और प्रशासनिक जानकारी के अनुसार, उत्तर बिहार में 200 से अधिक गांव बाढ़ से प्रभावित हुए हैं।
गंडक नदी का जलस्तर कई स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बना हुआ है। बिहार के आधिकारिक बाढ़ पूर्वानुमान के अनुसार 2 अक्टूबर को गोपालगंज के डुमरियाघाट और मुजफ्फरपुर के रेवा घाट पर गंडक खतरे के निशान से ऊपर बह रही थी। पश्चिम चंपारण के ठकराहा में भी नदी का जलस्तर चेतावनी स्तर से ऊपर दर्ज किया गया।
सारण जिले के तरैया क्षेत्र में गंडक के बढ़ते पानी के बीच रिंग बांध टूटने की जानकारी सामने आई है। बांध टूटने के बाद राजधानी, आकूचक, चंचलिया और भलुआ समेत कई गांवों के निचले इलाकों में पानी पहुंच गया। कुछ स्थानों पर तीन से चार फीट तक पानी भरने की सूचना है और कई घर भी प्रभावित हुए हैं।
मुजफ्फरपुर में भी गंडक और आसपास की नदियों के बढ़ते जलस्तर से स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार रेवा घाट पर गंडक खतरे के निशान से ऊपर थी। जिले के कुछ निचले इलाकों में बाढ़ का पानी पहुंचने के कारण प्रशासन को राहत और बचाव व्यवस्था मजबूत करनी पड़ रही है।
इससे पहले गंडक के रिकॉर्ड जलस्तर और तटबंधों पर दबाव के कारण पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण और गोपालगंज में भी कई स्थानों पर तटबंधों को नुकसान पहुंचा था। पश्चिम चंपारण में चंपारण तटबंध के कई हिस्सों में टूटने की सूचना मिली थी, जबकि पूर्वी चंपारण के अरेराज और गोपालगंज के शीतलपुर क्षेत्र में भी बांधों पर दबाव बढ़ा।
लगातार बढ़ते पानी का असर केवल घरों और गांवों तक सीमित नहीं है। कई जगह सड़क संपर्क प्रभावित हुआ है और लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के लिए नावों का इस्तेमाल किया जा रहा है। बाढ़ प्रभावित इलाकों में भोजन और जरूरी सामान पहुंचाने के लिए सामुदायिक रसोई तथा राहत व्यवस्था भी संचालित की जा रही है। प्रशासन और जल संसाधन विभाग की टीमें संवेदनशील तटबंधों की निगरानी और मरम्मत में लगी हुई हैं।
गंडक के अलावा उत्तर बिहार की दूसरी नदियों का जलस्तर भी चिंता का विषय बना हुआ है। 2 अक्टूबर के सरकारी आंकड़ों में बागमती, बूढ़ी गंडक और कोसी के कई स्थानों पर भी जलस्तर खतरे या चेतावनी स्तर से ऊपर दर्ज किया गया। इससे उत्तर बिहार के कई जिलों में बाढ़ की स्थिति पर लगातार निगरानी की जरूरत बनी हुई है।
बाढ़ की स्थिति को देखते हुए प्रशासन की ओर से प्रभावित क्षेत्रों में बचाव दल और अधिकारियों को तैनात किया गया है। जल संसाधन विभाग के इंजीनियरों की टीमें संवेदनशील तटबंधों पर भेजी गई हैं, ताकि पानी के दबाव को कम करने और नए स्थानों पर कटाव या टूटने की स्थिति को रोकने के उपाय किए जा सकें।
इस बीच प्रभावित परिवारों के सामने सुरक्षित स्थान, भोजन, पीने का पानी और पशुओं को सुरक्षित रखने जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं। जिन इलाकों में सड़क मार्ग से पहुंचना मुश्किल हो रहा है, वहां नावों के जरिए लोगों और राहत सामग्री को पहुंचाया जा रहा है। प्रशासन की प्राथमिकता बाढ़ प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने और जरूरी राहत सामग्री उपलब्ध कराने पर है।
गंडक नदी के जलस्तर और तटबंधों की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। नदी के जलस्तर में कमी आने तक निचले इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए खतरा बना रह सकता है। प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों में राहत और बचाव व्यवस्था को सक्रिय रखने के साथ-साथ नए तटबंध टूटने की संभावनाओं पर भी निगरानी बढ़ा दी है।
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