Last updated: October 2nd, 2026 at 02:10 pm

बिहार में बाढ़ की स्थिति गंभीर होने के बीच राज्य सरकार ने राहत और बचाव अभियान में भारतीय वायुसेना की मदद मांगी है। गंडक नदी के बढ़ते जलस्तर और कई स्थानों पर तटबंध टूटने के कारण उत्तर बिहार के निचले इलाकों में पानी तेजी से फैल रहा है। राज्य सरकार ने छह बाढ़ प्रभावित जिलों में फंसे लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने और राहत सामग्री उपलब्ध कराने के लिए हवाई सहायता मांगी है।
जिन छह जिलों में विशेष निगरानी और राहत अभियान चलाया जा रहा है, उनमें पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, मुजफ्फरपुर, सारण और वैशाली शामिल हैं। गंडक नदी में पानी बढ़ने के साथ इन जिलों के निचले क्षेत्रों में दबाव बढ़ा है। कई गांवों में बाढ़ का पानी पहुंचने के कारण लोगों को सुरक्षित स्थानों की ओर जाना पड़ा है।
गंडक नदी में बढ़े पानी का एक बड़ा कारण नेपाल के गंडक बेसिन में हुई भारी बारिश और वाल्मीकिनगर बैराज से बड़ी मात्रा में पानी छोड़ा जाना बताया गया है। 1 अक्टूबर को बैराज से पानी का डिस्चार्ज कई घंटों तक पांच लाख क्यूसेक से अधिक रहा। इसके बाद नदी के जलस्तर में तेजी आई और downstream इलाकों में तटबंधों पर दबाव बढ़ गया।
सारण और मुजफ्फरपुर में तटबंधों के कुछ हिस्सों में टूटने के बाद आसपास के गांवों में पानी फैल गया। सारण के पानापुर इलाके में तटबंध टूटने से कई पंचायतों के गांव और खेत प्रभावित हुए। मुजफ्फरपुर में भी तटबंधों पर दबाव और पानी के फैलाव को देखते हुए प्रशासन ने निगरानी बढ़ा दी है।
बाढ़ के कारण कई स्थानों पर सड़क संपर्क प्रभावित हुआ है। कुछ गांवों में लोग घरों की छतों, ऊंचे स्थानों और तटबंधों पर शरण लेने को मजबूर हुए हैं। ऐसे इलाकों में जमीन के रास्ते राहत पहुंचाना मुश्किल हो रहा है। इसी वजह से हेलीकॉप्टर के जरिए राहत सामग्री पहुंचाने और जरूरत पड़ने पर फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए वायुसेना की सहायता महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
राहत अभियान में वायुसेना की ओर से हवाई सहायता शुरू होने की जानकारी भी सामने आई है। सारण के पानापुर क्षेत्र में बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए हेलीकॉप्टर से सूखा राशन गिराया गया। राहत पैकेटों में चना, सत्तू, चूड़ा, चीनी, ओआरएस, माचिस और मोमबत्ती जैसी जरूरी वस्तुएं शामिल थीं।
राज्य सरकार ने अगले 48 घंटे को महत्वपूर्ण बताया है। बढ़ते जलस्तर और तटबंधों पर पानी के दबाव को देखते हुए अधिकारियों और इंजीनियरों को संवेदनशील स्थानों पर लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन की कोशिश है कि नए स्थानों पर तटबंध टूटने से पहले जरूरी सुरक्षा और बाढ़ नियंत्रण उपाय किए जा सकें।
बाढ़ प्रभावित लोगों तक राहत पहुंचाने के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल यानी NDRF की टीमें भी तैनात हैं। सारण में राहत अभियान को मजबूत करने के लिए अलग-अलग जिलों से अतिरिक्त NDRF और SDRF टीमें भेजी गई हैं। 2 अक्टूबर को सारण में कुल 19 NDRF और SDRF टीमों के राहत-बचाव अभियान में शामिल होने की जानकारी दी गई।
गंडक के साथ-साथ गंगा, बागमती और कोसी समेत कई नदियों का जलस्तर भी चिंता का विषय बना हुआ है। इनके बढ़े जलस्तर का असर बिहार के अलग-अलग हिस्सों में देखने को मिल रहा है। ऐसे में प्रशासन को एक साथ कई क्षेत्रों में राहत, बचाव और निगरानी अभियान चलाना पड़ रहा है।
सरकार की प्राथमिकता बाढ़ में फंसे लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने, खाद्य सामग्री और जरूरी सामान उपलब्ध कराने तथा संवेदनशील तटबंधों की निगरानी करने पर है। अगले 48 घंटों में नदी के जलस्तर और तटबंधों की स्थिति पर नजर रखी जा रही है। हवाई सहायता के साथ NDRF और SDRF की टीमें भी प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव अभियान जारी रखे हुए हैं।
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