Last updated: October 6th, 2026 at 02:26 pm

बिहार विधान परिषद की आठ सीटों पर होने वाले चुनाव से पहले राज्य की राजनीति में गठबंधन के अंदर ही खींचतान तेज हो गई है। जिस चुनाव को सामान्य तौर पर NDA और INDIA गठबंधन के बीच मुकाबले के रूप में देखा जा रहा था, उसमें अब दोनों खेमों के भीतर भी मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं। इससे चुनावी मुकाबला और ज्यादा दिलचस्प हो गया है।
महागठबंधन के अंदर सबसे ज्यादा चर्चा राष्ट्रीय जनता दल और कांग्रेस के बीच उम्मीदवारों को लेकर हो रहे मुकाबले की है। आठ सीटों के चुनाव में कई सीटों पर दोनों दलों ने अपने-अपने उम्मीदवार उतार दिए हैं। इसके कारण गठबंधन के सहयोगी ही एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं। कुछ सीटों पर वाम दलों के उम्मीदवारों ने भी मुकाबले को और जटिल बना दिया है।
पटना स्नातक, दरभंगा स्नातक और कोसी स्नातक जैसी सीटों पर RJD और कांग्रेस के उम्मीदवारों के बीच सीधा मुकाबला देखने को मिल रहा है। पटना शिक्षक सीट पर भी दोनों सहयोगी दलों के उम्मीदवार आमने-सामने हैं। दरभंगा शिक्षक सीट पर स्थिति और भी दिलचस्प है, जहां कांग्रेस, RJD और CPI के उम्मीदवार मैदान में हैं। इस तरह सीटों के बंटवारे को लेकर बनी असहमति अब सीधे चुनावी मुकाबले में बदल गई है।
RJD की ओर से पहले कई सीटों पर अपने उम्मीदवारों की घोषणा किए जाने के बाद कांग्रेस ने भी अलग-अलग सीटों पर प्रत्याशी उतारे। कांग्रेस का तर्क है कि पार्टी को अपनी राजनीतिक मौजूदगी मजबूत करने और अपने संगठन को आगे बढ़ाने के लिए स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने का अधिकार है। दूसरी ओर, RJD की ओर से सहयोगी दलों के बीच तालमेल बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया गया है। हालांकि तेजस्वी यादव ने महागठबंधन में किसी बड़े विवाद से इनकार किया है।
वहीं दूसरी तरफ NDA के भीतर भी पूरी तरह सब कुछ शांत नहीं है। राष्ट्रीय लोक मोर्चा यानी RLM से जुड़े तीन विधायकों द्वारा सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में निर्दलीय उम्मीदवार रामपुकार सिन्हा के समर्थन की घोषणा किए जाने से गठबंधन में असहमति की चर्चा तेज हो गई है। इस सीट पर NDA की ओर से JDU के आनंद पुष्कर उम्मीदवार हैं। RLM प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा ने हालांकि पार्टी में किसी बगावत से इनकार किया है और NDA उम्मीदवार के समर्थन की बात कही है।
NDA के लिए एक और चुनौती पटना स्नातक सीट को लेकर सामने आई है। JDU के आधिकारिक उम्मीदवार नीरज कुमार के मुकाबले स्थानीय स्तर पर अलग राजनीतिक समीकरण दिखाई दे रहे हैं। इस मामले में JDU के वरिष्ठ नेता ललन सिंह ने भी अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच पुराने विवाद और उसके राजनीतिक प्रभाव की बात कही है। इससे NDA के सामने गठबंधन की एकजुटता बनाए रखने की चुनौती बढ़ गई है।
बिहार विधान परिषद की इन आठ सीटों के लिए मतदान 23 अक्टूबर को होना है, जबकि मतगणना 27 अक्टूबर को होगी। नामांकन की अंतिम तारीख 6 अक्टूबर और नाम वापसी की अंतिम तारीख 9 अक्टूबर निर्धारित है। ऐसे में उम्मीदवारों के अंतिम मैदान में रहने तक राजनीतिक दलों के बीच समझौते और उम्मीदवार वापस लेने की कोशिशों की संभावना बनी हुई है।
MLC चुनाव का महत्व इसलिए भी बढ़ गया है क्योंकि इसमें शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों से प्रतिनिधि चुने जाते हैं। इन क्षेत्रों में राजनीतिक दलों के संगठन, उम्मीदवार की व्यक्तिगत पकड़ और स्थानीय समीकरण काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में गठबंधन के भीतर होने वाली दोस्ताना या सीधी टक्कर चुनाव के परिणाम पर असर डाल सकती है।
बिहार की राजनीति में MLC चुनाव ने NDA और INDIA दोनों गठबंधनों के लिए एक तरह की संगठनात्मक परीक्षा खड़ी कर दी है। एक तरफ दोनों गठबंधन अपने उम्मीदवारों को जिताने की तैयारी कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ उन्हें अपने ही सहयोगियों के बीच पैदा हुए मतभेदों को संभालना पड़ रहा है। आने वाले दिनों में नाम वापसी और अंतिम उम्मीदवार सूची के बाद मुकाबले की तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।
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