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दिल्ली में SIR और ‘वोट चोरी’ के खिलाफ प्रदर्शन, राहुल गांधी समेत कई विपक्षी सांसद हिरासत में

दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच टकराव लगातार
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दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच टकराव लगातार बढ़ता जा रहा है। INDIA गठबंधन के सांसदों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के विरोध में लगातार तीसरे दिन प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने कई विपक्षी नेताओं को रोक दिया और इससे पहले राहुल गांधी और प्रियंका गांधी समेत कई नेताओं को हिरासत में लिया जा चुका है।

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    विपक्षी दलों का आरोप है कि SIR की प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूचियों में बड़ी संख्या में नामों को हटाया या प्रभावित किया जा रहा है। विपक्ष इसे मतदाताओं के अधिकार से जुड़ा गंभीर मुद्दा बता रहा है और चुनाव आयोग से इस पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग कर रहा है। राहुल गांधी ने प्रदर्शन के दौरान कहा कि विपक्ष तब तक अपना आंदोलन जारी रखेगा, जब तक मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पद से इस्तीफा नहीं देते।

     

    इस विरोध की शुरुआत 6 अक्टूबर को हुई थी, जब विपक्षी सांसदों ने चुनाव आयोग के कार्यालय की ओर मार्च करने की कोशिश की थी। पुलिस ने उन्हें बीच रास्ते में रोक दिया था। इसके बाद कई सांसदों ने धरना दिया और बाद में राहुल गांधी, प्रियंका गांधी तथा अन्य विपक्षी नेताओं को हिरासत में लिया गया। अगले दिन यानी 7 अक्टूबर को विपक्ष ने दोबारा जंतर-मंतर की ओर जाने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने फिर रास्ता रोक दिया।

     

    7 अक्टूबर के प्रदर्शन के दौरान स्थिति उस समय ज्यादा तनावपूर्ण हो गई जब विपक्षी सांसद बसों से जंतर-मंतर की ओर बढ़े। पुलिस ने उन्हें जंतर-मंतर से करीब एक किलोमीटर पहले रोक दिया। इसके बाद राहुल गांधी और अन्य सांसद सड़क पर बैठ गए। प्रियंका गांधी भी सड़क पर बैठकर प्रदर्शन करती नजर आईं। कुछ समय बाद पुलिस ने राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अन्य नेताओं को हिरासत में लेकर अलग-अलग स्थानों पर पहुंचाया। बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया।

     

    पुलिस का कहना है कि नई दिल्ली क्षेत्र में प्रतिबंधात्मक आदेश लागू थे और बिना अनुमति प्रदर्शन या मार्च की इजाजत नहीं थी। दिल्ली पुलिस के अनुसार इसी वजह से प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोका गया। पुलिस ने यह भी आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान कुछ पुलिसकर्मियों के साथ धक्का-मुक्की और हाथापाई हुई। दूसरी ओर, विपक्षी नेताओं ने पुलिस पर जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग करने का आरोप लगाया है।

     

    विपक्ष का कहना है कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने के लिए प्रदर्शन करना लोकतांत्रिक अधिकार है। INDIA गठबंधन के कई दलों के सांसद इस आंदोलन में शामिल हैं। कांग्रेस के अलावा अन्य विपक्षी दलों के नेता भी मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और SIR से जुड़े मुद्दों पर सवाल उठा रहे हैं। विपक्ष ने इस आंदोलन को केवल एक पार्टी का मुद्दा न बताते हुए मतदाता अधिकार और चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता से जुड़ा विषय बताया है।

     

    8 अक्टूबर को भी विरोध प्रदर्शन जारी रहा। विपक्षी सांसद राजघाट की ओर बढ़े और वहां महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देने के साथ अपना विरोध दर्ज कराने की कोशिश की। इसके मद्देनजर दिल्ली पुलिस ने राजघाट और आसपास के इलाकों में विशेष सुरक्षा व्यवस्था की। BNSS की धारा 163 के तहत वहां भीड़ और प्रदर्शन को रोकने के लिए प्रतिबंध लगाए गए। केंद्रीय दिल्ली में बैरिकेडिंग और अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की गई।

     

    इस बीच कांग्रेस ने 8 अक्टूबर को देशभर में प्रदर्शन का आह्वान भी किया है। पार्टी ने SIR प्रक्रिया और विपक्षी नेताओं के खिलाफ पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। दूसरी ओर, चुनाव आयोग और बीजेपी ने विपक्ष के आरोपों को खारिज किया है। चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूची से जुड़े आरोपों पर अपना पक्ष रखा गया है, जबकि बीजेपी ने विपक्ष के आंदोलन को राजनीतिक मुद्दा बनाने का प्रयास बताया है।

     

    लगातार तीन दिनों से चल रहे इस राजनीतिक टकराव के कारण दिल्ली में सुरक्षा और यातायात व्यवस्था पर भी असर पड़ा है। केंद्रीय दिल्ली के कई महत्वपूर्ण इलाकों में बैरिकेडिंग की गई है और पुलिस बल बढ़ाया गया है। आने वाले दिनों में अगर विपक्ष अपने आंदोलन को और तेज करता है, तो राजधानी में राजनीतिक गतिविधियां और बढ़ सकती हैं। फिलहाल SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे का मुद्दा केंद्र सरकार, विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच बड़े राजनीतिक विवाद का रूप ले चुका है।

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