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बिहार में रामविलास पासवान की जयंती अब राजकीय समारोह के रूप में मनेगी, अगले साल से होगा आयोजन

बिहार सरकार ने पूर्व केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी के संस्थापक रामविलास पासवान की जयंती को लेकर बड़ा फैसला
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बिहार सरकार ने पूर्व केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी के संस्थापक रामविलास पासवान की जयंती को लेकर बड़ा फैसला किया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने घोषणा की है कि अगले वर्ष से रामविलास पासवान की जयंती 5 जुलाई को राजकीय समारोह के रूप में मनाई जाएगी। मुख्यमंत्री ने यह घोषणा 8 अक्टूबर को रामविलास पासवान की पुण्यतिथि के मौके पर की। इस फैसले के बाद बिहार में रामविलास पासवान की जयंती का आयोजन अब सरकारी स्तर पर भी किया जाएगा।

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    मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने रामविलास पासवान को बिहार का महान सपूत बताते हुए उनके सामाजिक और राजनीतिक योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि पासवान ने अपना पूरा जीवन राष्ट्र निर्माण और समाज की सेवा के लिए समर्पित किया। मुख्यमंत्री के मुताबिक सामाजिक न्याय और वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए रामविलास पासवान का संघर्ष हमेशा याद किया जाएगा। सरकार ने इसी योगदान को सम्मान देने के उद्देश्य से उनकी जयंती को राजकीय समारोह के रूप में मनाने का निर्णय लिया है।

     

    रामविलास पासवान का जन्म 5 जुलाई 1946 को बिहार के खगड़िया जिले में हुआ था। उन्होंने लंबे समय तक बिहार और राष्ट्रीय राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अपने राजनीतिक जीवन में वह कई बार लोकसभा के लिए चुने गए और केंद्र सरकार में अलग-अलग मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाली। अलग-अलग राजनीतिक दलों और गठबंधनों के साथ काम करने की उनकी क्षमता के कारण उन्हें भारतीय राजनीति के महत्वपूर्ण नेताओं में गिना जाता रहा।

     

    रामविलास पासवान सामाजिक न्याय और कमजोर वर्गों के अधिकारों की राजनीति के लिए भी जाने जाते थे। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में दलितों, गरीबों और वंचित वर्गों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। उनके समर्थक उन्हें बिहार की राजनीति में सामाजिक प्रतिनिधित्व की आवाज के रूप में देखते हैं। केंद्र में मंत्री रहते हुए भी उन्होंने बिहार से जुड़े विकास और सामाजिक मुद्दों को लगातार उठाया।

     

    रामविलास पासवान ने देश के कई प्रधानमंत्रियों के साथ काम किया था। उनके राजनीतिक जीवन में अलग-अलग विचारधाराओं वाली सरकारों के साथ काम करने का लंबा अनुभव रहा। यही वजह है कि उनकी राजनीतिक पहचान केवल एक दल तक सीमित नहीं रही। उन्हें गठबंधन राजनीति को समझने और अलग-अलग राजनीतिक परिस्थितियों में अपनी भूमिका बनाने वाले नेताओं में शामिल किया जाता है।

     

    रामविलास पासवान का निधन 8 अक्टूबर 2020 को हुआ था। उनकी पुण्यतिथि पर बिहार समेत देश के अलग-अलग हिस्सों में उन्हें श्रद्धांजलि दी जाती है। इस वर्ष उनकी छठी पुण्यतिथि के मौके पर भी कई राजनीतिक नेताओं ने उन्हें याद किया। इसी अवसर पर बिहार के मुख्यमंत्री ने उनकी जयंती को राजकीय समारोह का दर्जा देने की घोषणा की।

     

    सरकार के इस फैसले पर रामविलास पासवान के बेटे और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने भी आभार जताया है। उन्होंने इस निर्णय के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का धन्यवाद किया। चिराग पासवान ने कहा कि उनके पिता के योगदान को सम्मान मिलना उनके परिवार और समर्थकों के लिए महत्वपूर्ण है।

     

    राजकीय समारोह के रूप में जयंती मनाए जाने का मतलब है कि अब हर वर्ष 5 जुलाई को बिहार सरकार की ओर से आधिकारिक स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इससे रामविलास पासवान के राजनीतिक जीवन, सामाजिक न्याय के लिए उनके संघर्ष और बिहार के प्रति उनके योगदान को सरकारी कार्यक्रमों के माध्यम से याद किया जाएगा।

     

    यह फैसला बिहार की राजनीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रामविलास पासवान की राजनीतिक विरासत आज उनके बेटे चिराग पासवान के नेतृत्व वाली लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) से जुड़ी हुई है। ऐसे समय में जब बिहार और आसपास के राज्यों में पार्टी अपना राजनीतिक आधार मजबूत करने की कोशिश कर रही है, राज्य सरकार का यह सम्मान पासवान की विरासत को औपचारिक सरकारी पहचान देता है।

     

    अगले वर्ष 5 जुलाई को होने वाला पहला राजकीय समारोह इसलिए खास होगा, क्योंकि यह रामविलास पासवान की जयंती का पहला ऐसा आयोजन होगा जिसे बिहार सरकार आधिकारिक राज्य समारोह के तौर पर आयोजित करेगी। इससे उनके योगदान और राजनीतिक विरासत को राज्य स्तर पर नई पहचान मिलने की उम्मीद है।

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