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बंगाल में वोटों की गिनती पर BJP-TMC आमने-सामने, अभिषेक बनर्जी के आरोपों पर बीजेपी बोली- फर्जी वोट डालना TMC की आदत

पश्चिम बंगाल में मतदाताओं के आंकड़ों को लेकर तृणमूल कांग्रेस (TMC) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच विवाद बढ़
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पश्चिम बंगाल में मतदाताओं के आंकड़ों को लेकर तृणमूल कांग्रेस (TMC) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच विवाद बढ़ गया है। टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी की ओर से रेजीनगर सीट पर वोटों की गिनती के दौरान मतदाताओं के आंकड़ों पर सवाल उठाए जाने के बाद बीजेपी ने पलटवार किया है। भाजपा ने टीएमसी के आरोपों को गलत बताते हुए कहा कि पार्टी अफवाह फैलाने में लगी हुई है।

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    बीजेपी ने अभिषेक बनर्जी पर साधा निशाना

    पश्चिम बंगाल बीजेपी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अभिषेक बनर्जी की पोस्ट को साझा करते हुए उन पर निशाना साधा। पार्टी ने आरोप लगाया कि टीएमसी की अफवाह फैलाने वाली फैक्ट्री डबल शिफ्ट में काम कर रही है। बीजेपी ने तंज कसते हुए कहा कि पार्टी अपने प्रदर्शन के बजाय गलत आंकड़ों के सहारे चर्चा में बने रहने की कोशिश कर रही है।

    बीजेपी ने अपने बयान में कहा कि फर्जी वोट डालना टीएमसी की आदत है, भाजपा की रणनीति नहीं। पार्टी के मुताबिक, टीएमसी ने मतदाताओं की संख्या 772 बताई, जबकि सरकारी आंकड़ों में यह संख्या 1,109 दर्ज है। बीजेपी ने इसी अंतर का हवाला देते हुए टीएमसी के दावे को भ्रामक बताया।

    अभिषेक बनर्जी ने क्या आरोप लगाए थे?

    इससे पहले अभिषेक बनर्जी ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा कर आरोप लगाया था कि रेजीनगर विधानसभा क्षेत्र के एक बूथ पर बीजेपी को मतदाताओं की संख्या से अधिक वोट मिले हैं। उन्होंने अपने दावे के समर्थन में आंकड़ों का स्क्रीनशॉट भी साझा किया था।

    अभिषेक बनर्जी ने इस कथित विसंगति पर तंज कसते हुए कहा था कि चुनावी गणित को समझने में उत्तर कोरिया को भी पसीने आ जाएंगे। उनके आरोपों के बाद पश्चिम बंगाल में चुनावी आंकड़ों और मतगणना की प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई।

    सोशल मीडिया पर दोनों दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप

    बीजेपी ने अपने एक्स हैंडल पर दो स्क्रीनशॉट साझा करते हुए अभिषेक बनर्जी के दावों को खारिज करने की कोशिश की। वहीं, टीएमसी सांसद ने मतदाताओं और वोटों की संख्या के बीच कथित अंतर को लेकर सवाल उठाए हैं।

    फिलहाल, दोनों पक्ष अपने-अपने दावों के समर्थन में आंकड़े पेश कर रहे हैं। मतदाताओं की वास्तविक संख्या और कथित विसंगति की स्थिति स्पष्ट करने के लिए संबंधित आधिकारिक रिकॉर्ड का मिलान जरूरी है। इस मामले में निर्वाचन अधिकारियों की ओर से आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने आने पर ही विवाद की स्थिति और साफ हो सकेगी।

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