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भारतीय मूल की नवी पिल्लै को नोबेल शांति पुरस्कार, मानवाधिकार और अंतरराष्ट्रीय कानून में योगदान के लिए सम्मान

भारतीय मूल की दक्षिण अफ्रीकी कानून विशेषज्ञ नवनेथम ‘नवी’ पिल्लै को नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किए जाने की खबर
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भारतीय मूल की दक्षिण अफ्रीकी कानून विशेषज्ञ नवनेथम ‘नवी’ पिल्लै को नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किए जाने की खबर सामने आई है। उन्हें शांति, मानवाधिकार और अंतरराष्ट्रीय कानून को बढ़ावा देने में उनके योगदान के लिए यह प्रतिष्ठित सम्मान दिया गया है। पिल्लै संयुक्त राष्ट्र की पूर्व मानवाधिकार उच्चायुक्त रह चुकी हैं और अंतरराष्ट्रीय न्यायिक संस्थानों में भी अहम जिम्मेदारियां निभा चुकी हैं।

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    23 सितंबर 1941 को दक्षिण अफ्रीका के डरबन में तमिल मूल के भारतीय माता-पिता के घर जन्मीं नवी पिल्लै ने रंगभेद के दौर में अपने करियर की शुरुआत की। उन्होंने भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाई और मानवाधिकारों तथा समानता के लिए काम किया। रंगभेद विरोधी कार्यकर्ताओं का कानूनी बचाव करने से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर न्याय और मानवाधिकारों की पैरवी करने तक उनका सफर महत्वपूर्ण रहा है।

    साल 1967 में पिल्लै दक्षिण अफ्रीका के नटाल प्रांत में वकालत शुरू करने वाली पहली महिला बनीं। बाद में उन्होंने एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की, जब वह दक्षिण अफ्रीका के हाई कोर्ट में जज बनने वाली पहली अश्वेत महिला बनीं।

    उनका न्यायिक अनुभव दक्षिण अफ्रीका तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने रवांडा के लिए अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायाधिकरण में न्यायाधीश और अध्यक्ष के रूप में काम किया। इसके अलावा, वह अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय में भी न्यायाधीश रहीं। वर्ष 2008 से 2014 तक उन्होंने संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार उच्चायुक्त के तौर पर जिम्मेदारी संभाली।

    नवी पिल्लै का करियर अंतरराष्ट्रीय कानून, मानवाधिकारों की रक्षा और न्यायिक संस्थानों में उनके योगदान के लिए जाना जाता है। उनके काम ने रंगभेद के खिलाफ संघर्ष से लेकर वैश्विक स्तर पर मानवाधिकारों के मुद्दों को आगे बढ़ाने तक कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों को छुआ है।

    नोबेल शांति पुरस्कार दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय सम्मानों में गिना जाता है। हालांकि, इस खबर को प्रकाशित करने से पहले नोबेल समिति की आधिकारिक घोषणा से पुरस्कार विजेता और सम्मान दिए जाने के कारण की पुष्टि कर लेना जरूरी है।

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