Last updated: October 11th, 2026 at 12:53 pm

बिहार की राजनीति में केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी के ‘तेलचट्टा’ बयान को लेकर विवाद के बीच चिराग पासवान ने इस भाषा पर आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में रहने वाले नेताओं को युवाओं के लिए ऐसे शब्दों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। चिराग के मुताबिक, राजनीतिक विरोध अपनी जगह है, लेकिन युवाओं को अपमानजनक शब्दों से संबोधित करना उचित नहीं है।
चिराग पासवान ने युवाओं के आंदोलन, वोट चोरी के आरोप, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने विपक्ष से सवाल किया कि यदि उसे एसआईआर की प्रक्रिया पर आपत्ति है, तो वह उन राज्यों में भी अपना रुख स्पष्ट करे जहां उसकी सरकार है।
मांझी के बयान पर चिराग ने जताई आपत्ति
जीतन राम मांझी के ‘तेलचट्टा’ बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए चिराग पासवान ने कहा कि युवाओं को इस तरह संबोधित करना जायज नहीं है। उन्होंने कहा कि नेताओं को अपनी भाषा की मर्यादा का ध्यान रखना चाहिए और राजनीति के लिए ऐसे शब्दों का सहारा नहीं लेना चाहिए, जिससे युवाओं को अपमानित महसूस हो।
चिराग का यह बयान ऐसे समय आया है, जब युवाओं के प्रदर्शन और चुनावी प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक दलों के बीच बयानबाजी जारी है। उन्होंने युवाओं के आंदोलन के महत्व को स्वीकार करते हुए शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर जोर दिया।
‘छात्र आंदोलन देश को नई दिशा दे सकते हैं’
चिराग पासवान ने कहा कि छात्र आंदोलन लोकतंत्र का अहम हिस्सा हैं। इतिहास में युवाओं और छात्रों ने अपनी मांगों के लिए आवाज उठाकर कई महत्वपूर्ण बदलावों में भूमिका निभाई है। इसलिए किसी भी आंदोलन को केवल राजनीतिक नजरिए से देखना उचित नहीं है।
हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि आंदोलन शांतिपूर्ण होना चाहिए। लोकतंत्र में सरकार से सवाल पूछना और अपनी मांगों को सामने रखना लोगों का अधिकार है, लेकिन प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था और आम लोगों की सुविधाओं का ध्यान रखना भी जरूरी है।
चिराग ने व्यवस्था बनाए रखने के लिए उठाए जाने वाले कदमों का समर्थन करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक अधिकारों और शांति के बीच संतुलन होना चाहिए।
ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर विपक्ष से सवाल
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर चिराग पासवान ने विपक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या हर समस्या का समाधान किसी व्यक्ति के इस्तीफे से ही हो सकता है? इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि यदि इस्तीफा देना ही हर समस्या का हल होता, तो वह खुद भी इस्तीफा दे चुके होते।
चिराग ने कहा कि सरकार का हिस्सा होने के बावजूद जनहित के मुद्दों पर सवाल उठाए जा सकते हैं। उन्होंने अपनी भूमिका को ‘चौकीदार’ की तरह बताते हुए कहा कि जरूरत पड़ने पर सरकार के भीतर रहकर भी अपनी बात रखी जा सकती है।
SIR पर विपक्ष को दी चुनौती
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर जारी विवाद पर चिराग पासवान ने विपक्ष से अपनी स्थिति स्पष्ट करने को कहा। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि विपक्ष को इस प्रक्रिया पर गंभीर आपत्ति है, तो उसे उन राज्यों में भी सामने आकर अपनी बात रखनी चाहिए जहां उसकी सरकार है।
चिराग ने कहा कि केवल आरोप लगाने या इस्तीफे की मांग करने से समस्याओं का समाधान नहीं होता। उनके मुताबिक, चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाने वाले दलों को तथ्यों के साथ अपनी बात रखनी चाहिए और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगें सामने रखनी चाहिए।
विपक्ष की ओर से एसआईआर और वोट चोरी को लेकर उठाए जा रहे सवालों पर चिराग ने उसकी रणनीति की आलोचना की। हालांकि, चुनावी प्रक्रिया को लेकर अलग-अलग राजनीतिक दलों के दावों का आकलन तथ्यों और संबंधित आधिकारिक जानकारी के आधार पर किया जाना जरूरी है।
युवाओं की भूमिका पर क्या बोले चिराग?
चिराग पासवान ने कहा कि युवाओं ने समय-समय पर देश की दशा और दिशा बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने युवाओं के आंदोलन को पूरी तरह खारिज करने के बजाय उनके अधिकार और आंदोलन के तरीके के बीच अंतर स्पष्ट करने की कोशिश की।
उनका कहना था कि युवाओं को अपनी मांगों के लिए आवाज उठाने का अधिकार है, लेकिन विरोध का तरीका शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक होना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग राजनीतिक लाभ के लिए युवाओं को गलत दिशा में ले जाने की कोशिश करते हैं।
चिराग और मांझी के बयान के राजनीतिक मायने
चिराग पासवान और जीतन राम मांझी दोनों केंद्र सरकार में मंत्री हैं। ऐसे में चिराग की ओर से मांझी के बयान पर सार्वजनिक आपत्ति जताना राजनीतिक चर्चा का विषय बन सकता है। इस विवाद में चिराग ने युवाओं के सम्मान और शांतिपूर्ण आंदोलन का समर्थन किया, वहीं एसआईआर तथा मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्ष पर सवाल उठाए।
कुल मिलाकर, चिराग पासवान ने एक ओर नेताओं से युवाओं के लिए मर्यादित भाषा इस्तेमाल करने की अपील की, तो दूसरी ओर आंदोलन के दौरान शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखने पर जोर दिया।
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