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भागलपुर में गंगा का भीषण कटाव, देखते ही देखते नदी में समाए कई मकान; 14 नंबर सड़क पर भी खतरा

  बिहार के भागलपुर जिले में गंगा नदी के तेज कटाव ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। नवगछिया अनुमंडल
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    बिहार के भागलपुर जिले में गंगा नदी के तेज कटाव ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। नवगछिया अनुमंडल के खरीक प्रखंड स्थित राघोपुर पंचायत के छोटी अलालपुर गांव में नदी का कटाव लगातार तबाही मचा रहा है। कई मकान नदी में समा गए हैं, जबकि आसपास के घरों और तटबंध पर भी खतरा मंडरा रहा है। रविवार, 11 अक्टूबर 2026 को सामने आए घटनाक्रम में एक दो मंजिला पक्का मकान भी देखते ही देखते गंगा में समा गया। इस घटना के बाद नदी किनारे रहने वाले परिवारों में दहशत है और लोग अपने घरों तथा सामान को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में जुटे हैं।

     

    स्थानीय स्तर पर सामने आई जानकारी के अनुसार, शुक्रवार शाम से महादेवपुर घाट के पास कटाव तेज हुआ था। गंगा की धारा किनारे की मिट्टी को तेजी से काट रही थी। इसके कारण घरों की नींव कमजोर हो गई और कई संरचनाएं क्षतिग्रस्त हो गईं। अधिकारियों के अनुसार, कटाव से लगभग 40 से 50 मकान प्रभावित हुए हैं। इनमें चार पक्के मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए, जबकि करीब दस अन्य पक्के मकानों में दरारें आ गईं। अधिकांश प्रभावित घर कच्चे बताए गए हैं। एहतियात के तौर पर कई परिवारों को अपने घर खाली करने पड़े।

     

    गांव के लोगों के लिए यह केवल मकानों के नुकसान का मामला नहीं है, बल्कि वर्षों की मेहनत और जमा पूंजी खोने का संकट भी है। ग्रामीणों ने अपने घर बनाने और परिवार का भविष्य सुरक्षित करने के लिए लंबे समय तक मेहनत की थी। लेकिन नदी के कटाव के कारण अब उनकी संपत्ति पर संकट आ गया है। मकानों के नदी में गिरने के वीडियो सामने आने के बाद आसपास के गांवों में भी चिंता बढ़ गई है। लोगों को डर है कि यदि कटाव इसी तरह जारी रहा, तो अन्य घर और कृषि भूमि भी इसकी चपेट में आ सकते हैं।

     

    इस घटना में सबसे गंभीर चिंता तटबंध और सड़क की सुरक्षा को लेकर है। रिपोर्टों के अनुसार, गंगा के तेज बहाव ने पुराने रेल लाइन तटबंध के हिस्से को भी नुकसान पहुंचाया है। कुछ रिपोर्टों में तटबंध के बड़े हिस्से के क्षतिग्रस्त होने की जानकारी दी गई है। नदी का दबाव अब 14 नंबर सड़क के आसपास बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। यह सड़क क्षेत्र के लोगों के आवागमन के लिए महत्वपूर्ण है और इसे नुकसान पहुंचने पर आसपास के गांवों का संपर्क प्रभावित हो सकता है।

     

    स्थानीय प्रशासन और जल संसाधन विभाग ने कटाव को रोकने के लिए बचाव कार्य तेज कर दिए हैं। अधिकारियों और इंजीनियरों की टीमें प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण कर रही हैं। कमजोर स्थानों पर बालू से भरी बोरियां, जियोबैग और अन्य सामग्री लगाकर नदी के दबाव को कम करने का प्रयास किया जा रहा है। विभाग ने संवेदनशील हिस्सों की निगरानी के लिए तकनीकी कर्मियों को भी तैनात किया है। बचाव कार्य लगातार चलाए जा रहे हैं, ताकि कटाव का दायरा बढ़ने से रोका जा सके।

     

    भागलपुर की जिलाधिकारी अलंकृता पांडेय ने प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण कर अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। प्रशासन की प्राथमिकता लोगों को सुरक्षित रखना, उनके सामान और मवेशियों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना तथा तटबंध को और अधिक नुकसान से बचाना है। अधिकारियों के अनुसार, प्रभावित परिवारों की स्थिति पर नजर रखी जा रही है और जोखिम वाले इलाकों में लोगों को सतर्क रहने के लिए कहा गया है।

     

    गंगा के जलस्तर में कमी आने के बावजूद कटाव का खतरा बना हुआ है। अधिकारियों के मुताबिक, भागलपुर में नदी का जलस्तर खतरे के निशान से नीचे था और पिछले 24 घंटों में इसमें लगभग 12 सेंटीमीटर की गिरावट दर्ज की गई। हालांकि, जलस्तर कम होने का अर्थ यह नहीं है कि नदी किनारे कटाव रुक जाएगा। नदी की धारा का रुख और बहाव की तीव्रता किनारे की मिट्टी को कमजोर कर सकती है। यही कारण है कि जलस्तर घटने के बावजूद मकानों और तटबंध को नुकसान पहुंचने की आशंका बनी हुई है।

     

    इस घटना ने बिहार में नदी कटाव से प्रभावित इलाकों में सुरक्षा और दीर्घकालिक योजना की जरूरत को फिर सामने ला दिया है। गंगा के किनारे बसे गांवों में रहने वाले लोगों को हर साल नदी के बदलते स्वरूप और कटाव के कारण नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे क्षेत्रों में समय रहते संवेदनशील स्थानों की पहचान, मजबूत तटबंध, नियमित निगरानी और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित पुनर्वास जैसे उपाय महत्वपूर्ण हैं।

     

    प्रशासन और जल संसाधन विभाग की टीमें कटाव रोकने तथा कमजोर तटबंधों को मजबूत करने में जुटी हैं। प्रभावित परिवारों के लिए सबसे बड़ी चुनौती अपने घरों और आजीविका को सुरक्षित रखना है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि बचाव कार्य कितने प्रभावी साबित होते हैं और 14 नंबर सड़क समेत आसपास के संवेदनशील हिस्सों को किस हद तक सुरक्षित रखा जा सकता है।

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