Human Live Media

HomeNewsलखनऊ कांग्रेस कार्यालय में जमकर हंगामा, आराधना मिश्रा के पदभार ग्रहण समारोह में कार्यकर्ताओं के बीच चले जूते-चप्पल

लखनऊ कांग्रेस कार्यालय में जमकर हंगामा, आराधना मिश्रा के पदभार ग्रहण समारोह में कार्यकर्ताओं के बीच चले जूते-चप्पल

    उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में रविवार, 11 अक्टूबर को कांग्रेस के प्रदेश मुख्यालय में उस समय अफरा-तफरी
image-79

 

Table of Contents

     

    उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में रविवार, 11 अक्टूबर को कांग्रेस के प्रदेश मुख्यालय में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब पार्टी की नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष आराधना मिश्रा ‘मोना’ और कार्यकारी अध्यक्ष इमरान मसूद के पदभार ग्रहण समारोह से पहले कार्यकर्ता आपस में भिड़ गए। विवाद इतना बढ़ गया कि पार्टी कार्यालय में धक्का-मुक्की, गाली-गलौज और जूते-चप्पल फेंके जाने की खबर सामने आई। घटना के दौरान कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे। इस घटनाक्रम ने उत्तर प्रदेश कांग्रेस के भीतर चल रहे मतभेदों को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।

     

    मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, विवाद उस समय शुरू हुआ जब पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अजय राय अपने समर्थकों के साथ पार्टी कार्यालय पहुंचे। वहां पहले से ही महिला कांग्रेस की नेताओं और अन्य कार्यकर्ताओं का जमावड़ा था। अजय राय के समर्थकों ने रास्ता खाली कराने की बात कही, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच कहासुनी शुरू हो गई। देखते ही देखते विवाद बढ़ गया और कार्यकर्ताओं के बीच धक्का-मुक्की होने लगी। कुछ रिपोर्टों में दोनों पक्षों की ओर से जूते-चप्पल फेंके जाने का भी उल्लेख किया गया है।

     

    इस विवाद में कांग्रेस की महिला नेता और लखनऊ नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष ममता चौधरी का नाम भी सामने आया है। ममता चौधरी ने आरोप लगाया कि अजय राय के समर्थकों ने उनके साथ मौजूद महिला कार्यकर्ताओं के साथ दुर्व्यवहार किया। उन्होंने दावा किया कि महिलाओं के साथ धक्का-मुक्की और मारपीट की गई तथा उन पर जूते-चप्पल भी फेंके गए। दूसरी ओर, अजय राय के समर्थकों की ओर से आरोप लगाया गया कि पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के सम्मान के साथ उचित व्यवहार नहीं किया गया। हालांकि, घटना के दौरान लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।

     

    हंगामे के बीच अजय राय नाराज होकर पार्टी कार्यालय के बाहर बैठ गए। बताया गया कि वह इस घटना से काफी आहत थे और संबंधित नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे थे। स्थिति को संभालने के लिए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रमोद तिवारी ने हस्तक्षेप किया। उन्होंने अजय राय को समझाने और समारोह में शामिल होने के लिए मनाने की कोशिश की। इमरान मसूद और आराधना मिश्रा की ओर से भी स्थिति सामान्य करने का प्रयास किया गया। काफी मशक्कत के बाद औपचारिक पदभार हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी हो सकी।

     

    हालांकि, अजय राय समारोह के बाद वहां से चले गए और आराधना मिश्रा की पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस में शामिल नहीं हुए। इस घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर भी सामने आए, जिसके बाद पार्टी के अंदर अनुशासन और आपसी समन्वय को लेकर सवाल उठने लगे। वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में इस तरह का विवाद होना कांग्रेस के लिए असहज स्थिति माना जा रहा है।

     

    आराधना मिश्रा ‘मोना’ को उत्तर प्रदेश कांग्रेस की नई प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी ऐसे समय में मिली है, जब पार्टी राज्य में अपना संगठन मजबूत करने और आगामी राजनीतिक चुनौतियों के लिए कार्यकर्ताओं को एकजुट करने की कोशिश कर रही है। पदभार ग्रहण समारोह का उद्देश्य नए नेतृत्व के साथ संगठनात्मक कामकाज की शुरुआत करना था, लेकिन विवाद के कारण कार्यक्रम की चर्चा उसके राजनीतिक संदेश के बजाय हंगामे को लेकर होने लगी।

     

    पदभार ग्रहण करने के बाद आराधना मिश्रा ने संविधान और लोकतंत्र की रक्षा को पार्टी की प्राथमिकता बताया। उन्होंने कार्यकर्ताओं से संघर्ष और संगठन के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने का आह्वान किया। दूसरी ओर, घटना को लेकर पार्टी के भीतर कार्रवाई की मांग भी उठी है। अजय राय ने कहा कि पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ कदम उठाया जाना चाहिए, जबकि ममता चौधरी ने महिला कार्यकर्ताओं के साथ कथित दुर्व्यवहार का मुद्दा उठाया है।

     

    इस विवाद में दोनों पक्षों के आरोप सामने आए हैं और पूरे घटनाक्रम को लेकर पार्टी नेतृत्व की भूमिका पर नजर बनी हुई है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कांग्रेस नेतृत्व मामले की जांच कराकर कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई करता है या नहीं। उत्तर प्रदेश में पार्टी को मजबूत करने के प्रयासों के बीच लखनऊ मुख्यालय में हुई यह घटना संगठन के सामने एक नई चुनौती के रूप में देखी जा रही है।

    Loading

    Comments are off for this post.