Last updated: October 12th, 2026 at 02:03 pm

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार, 12 अक्टूबर को कांग्रेस और INDIA गठबंधन पर तीखा हमला बोला। दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी गठबंधन के प्रदर्शन को लेकर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि कांग्रेस अपनी राजनीतिक विफलताओं को छिपाने के लिए संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठा रही है। उन्होंने कहा कि चुनाव में जीत मिलने पर कांग्रेस अपनी उपलब्धियों का श्रेय लेती है, लेकिन हारने पर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) और चुनाव आयोग को जिम्मेदार ठहराने लगती है। मुख्यमंत्री ने विपक्ष से अपनी राजनीतिक रणनीति और कार्यशैली पर दोबारा विचार करने की अपील की।
योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर में मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि लोकतंत्र में विरोध करने और सवाल उठाने का अधिकार सभी राजनीतिक दलों को है, लेकिन विरोध के नाम पर अव्यवस्था फैलाना और संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर लगातार सवाल खड़े करना उचित नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली में पिछले कुछ दिनों से हो रहे प्रदर्शनों के कारण आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मुख्यमंत्री ने कांग्रेस नेतृत्व को सलाह दी कि वह राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा करे और लोकतांत्रिक व्यवस्था के तहत अपनी बात रखे।
मुख्यमंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है, जब दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ INDIA गठबंधन के नेताओं और कार्यकर्ताओं का विरोध प्रदर्शन राजनीतिक चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है। विपक्षी दल चुनाव आयोग की भूमिका और उसकी निष्पक्षता को लेकर सवाल उठा रहे हैं। दूसरी ओर, भाजपा नेताओं ने इन प्रदर्शनों को लेकर विपक्ष की आलोचना की है। इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बयानबाजी तेज हो गई है।
योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस के राजनीतिक इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश की जनता ने वर्ष 1985 के बाद से कांग्रेस को सत्ता में वापस आने का अवसर नहीं दिया है। उन्होंने दावा किया कि पार्टी को अपनी लगातार चुनावी चुनौतियों के कारणों की समीक्षा करनी चाहिए। मुख्यमंत्री के अनुसार, जनता का विश्वास हासिल करने के लिए राजनीतिक दलों को अपनी नीतियों, नेतृत्व और कामकाज में सुधार करना चाहिए।
उन्होंने कांग्रेस के नेतृत्व पर भी सवाल उठाए और कहा कि पार्टी को अपनी राजनीतिक रणनीति में बदलाव करने की जरूरत है। योगी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस अपनी कमजोरियों का विश्लेषण करने के बजाय चुनाव आयोग और दूसरी संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बना रही है। उन्होंने विपक्ष से अपील की कि वह युवाओं को गुमराह करने के बजाय वास्तविक मुद्दों पर चर्चा करे। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वस्थ लोकतंत्र के लिए राजनीतिक मतभेदों को संवाद और संवैधानिक प्रक्रियाओं के माध्यम से सुलझाना जरूरी है।
मुख्यमंत्री के बयान से स्पष्ट है कि दिल्ली में चल रहे विरोध प्रदर्शन का मुद्दा अब उत्तर प्रदेश की राजनीति में भी चर्चा का विषय बन गया है। भाजपा और कांग्रेस के बीच पहले से जारी राजनीतिक टकराव के बीच इस बयान को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कांग्रेस की ओर से चुनाव आयोग की भूमिका पर उठाए जा रहे सवालों के जवाब में भाजपा नेता लगातार विपक्ष की मंशा पर सवाल खड़े कर रहे हैं।
हालांकि, चुनाव आयोग की निष्पक्षता और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवालों पर राजनीतिक दलों के अलग-अलग विचार हैं। ऐसे मामलों में आरोपों और राजनीतिक बयानों के साथ-साथ उपलब्ध तथ्यों, आधिकारिक जवाबों और कानूनी प्रक्रियाओं को भी देखना जरूरी है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में संस्थाओं की जवाबदेही पर चर्चा और शांतिपूर्ण विरोध दोनों महत्वपूर्ण हैं, लेकिन किसी भी पक्ष के आरोपों को अंतिम निष्कर्ष मानने से पहले उनकी पुष्टि आवश्यक है।
योगी आदित्यनाथ के बयान के बाद कांग्रेस और INDIA गठबंधन की ओर से प्रतिक्रिया पर नजर बनी हुई है। आने वाले दिनों में दिल्ली के प्रदर्शन, चुनाव आयोग से जुड़े विवाद और विपक्ष की रणनीति को लेकर राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो सकती है। उत्तर प्रदेश में भी इस मुद्दे का असर राजनीतिक चर्चाओं में दिखाई देने की संभावना है।
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