Last updated: October 12th, 2026 at 02:23 pm

नई दिल्ली, 12 अक्टूबर। कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोमवार को मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अपना विरोध तेज करते हुए INDIA गठबंधन के नेताओं के साथ सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करने का ऐलान किया। विपक्षी दलों का कहना है कि चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और SIR की प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग करते हुए कहा कि विपक्ष इस मुद्दे को राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर उठाएगा।
राहुल गांधी ने सोमवार को नई दिल्ली में कांग्रेस मुख्यालय पर प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि विपक्षी गठबंधन चुनावी प्रक्रिया से जुड़े अपने सवालों को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख करेगा। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार पर मुख्य चुनाव आयुक्त को संरक्षण देने का आरोप लगाया। राहुल गांधी का दावा है कि चुनावी व्यवस्था में पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर जनता के मन में उठ रहे सवालों का जवाब मिलना चाहिए। हालांकि, विपक्ष की ओर से लगाए गए आरोपों को अभी न्यायिक प्रक्रिया में परखा जाना बाकी है।
कांग्रेस और INDIA गठबंधन ने अपने मार्च को ‘चलो दिल्ली—मार्च फॉर डेमोक्रेसी’ नाम दिया। योजना के अनुसार, विपक्षी नेताओं और समर्थकों को दोपहर करीब 1:30 बजे कनॉट प्लेस और बाराखंभा रोड के जंक्शन पर एकत्र होना था। वहां से सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च निकालने की योजना बनाई गई। गठबंधन का कहना है कि वह मुख्य न्यायाधीश को ज्ञापन सौंपकर चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर हस्तक्षेप की मांग करेगा। इस कार्यक्रम के चलते मध्य दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई और कुछ स्थानों पर यातायात प्रभावित होने की आशंका जताई गई।
विपक्ष की प्रमुख मांगों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया को रोकना, कथित चुनावी अनियमितताओं की जांच और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग शामिल है। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि SIR के दौरान कुछ क्षेत्रों में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जाने से पात्र नागरिकों के मतदान अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। उनका कहना है कि मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए और प्रत्येक पात्र नागरिक को अपना नाम जांचने तथा किसी गलती पर आपत्ति दर्ज कराने का उचित अवसर मिलना चाहिए।
विपक्ष ने पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के मुद्दे को भी अपनी मांगों का हिस्सा बनाया है। गठबंधन के नेताओं ने दावा किया है कि कुछ मामलों में मतदाताओं के नाम हटाने के फैसलों पर उठाई गई आपत्तियों में गंभीर समस्याएं सामने आई हैं। हालांकि, सभी मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटाए जाने का दावा अभी व्यापक रूप से स्थापित तथ्य नहीं है। इन मामलों में संबंधित रिकॉर्ड, अपीलों के नतीजों और चुनाव आयोग के जवाब के आधार पर ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
राहुल गांधी ने अपने बयान में यह भी कहा कि लोकतंत्र में विरोध करने वालों की आवाज को दबाया नहीं जाना चाहिए। उन्होंने पिछले दिनों दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे छात्रों और युवाओं के खिलाफ हुई पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए। विपक्ष का आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों के साथ मारपीट की गई और कई लोगों को हिरासत में लिया गया। इन घटनाओं के बाद कांग्रेस ने अपने सांसदों को दिल्ली में रहने के लिए कहा था, ताकि वे सोमवार के विरोध कार्यक्रम में भाग ले सकें। पुलिस कार्रवाई से संबंधित आरोपों की निष्पक्ष जांच और आधिकारिक पक्ष भी इस पूरे विवाद का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
इससे पहले राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर भी लोगों से मार्च में शामिल होने की अपील की थी। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन किसी एक राजनीतिक दल तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि लोकतंत्र और संविधान में विश्वास रखने वाले सभी लोगों को इसमें भाग लेना चाहिए। INDIA गठबंधन के विभिन्न दलों के नेताओं ने भी इस मुद्दे पर एकजुटता दिखाई। गठबंधन का उद्देश्य चुनाव आयोग की जवाबदेही और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता को राष्ट्रीय राजनीतिक बहस का प्रमुख विषय बनाना है।
मुख्य न्यायाधीश से मुलाकात की मांग को लेकर भी घटनाक्रम सामने आया। रिपोर्टों के अनुसार, राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने मुख्य न्यायाधीश से मिलने का अनुरोध किया था, लेकिन उन्हें सीधे मुलाकात के लिए सहमति नहीं मिली। उन्हें अपनी शिकायतें याचिका के माध्यम से न्यायिक प्रक्रिया के तहत रखने का रास्ता बताया गया। इसलिए विपक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने की योजना बनाई। अदालत इस मामले में क्या निर्णय लेती है, यह याचिका और उसके आधार पर होने वाली सुनवाई पर निर्भर करेगा।
दूसरी ओर, चुनाव आयोग की ओर से SIR को मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करने की प्रक्रिया बताया गया है। आयोग का पक्ष है कि इस अभ्यास का उद्देश्य अपात्र, दोहराए गए या गलत प्रविष्टियों की पहचान करना और मतदाता सूची को अद्यतन बनाना है। ऐसे में विवाद का समाधान तथ्यों, आधिकारिक आंकड़ों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही संभव होगा।
राहुल गांधी और INDIA गठबंधन के इस कदम से चुनावी पारदर्शिता को लेकर राजनीतिक बहस और तेज हो गई है। विपक्ष की याचिका, सुप्रीम कोर्ट की संभावित कार्यवाही, चुनाव आयोग का जवाब और दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों की स्थिति पर आगे भी नजर बनी रहेगी।
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