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CJP News: ‘बॉन्ड प्रदर्शन रोकने के लिए नहीं, शांति बनाए रखने के लिए था’, रिहाई के बाद नेताओं की सफाई

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने अपने नेताओं की रिहाई के बाद बॉन्ड को लेकर सफाई दी है। पार्टी की ओर
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कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने अपने नेताओं की रिहाई के बाद बॉन्ड को लेकर सफाई दी है। पार्टी की ओर से कहा गया है कि नेताओं ने विरोध प्रदर्शन नहीं करने के लिए नहीं, बल्कि शांति बनाए रखने के उद्देश्य से बॉन्ड पर हस्ताक्षर किए थे। यह बयान ऐसे समय आया है, जब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले पार्टी के तीन नेताओं को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया था।

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    तीन CJP नेताओं को एहतियाती हिरासत से मिली रिहाई

    CJP नेताओं अभिजीत दिपके, सौरव दास और आशुतोष रंका को शनिवार को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया था। रविवार को तीनों को दिल्ली कैंटोनमेंट स्थित विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया। इसके बाद उन्हें कुछ शर्तों के साथ रिहा कर दिया गया।

    दिल्ली पुलिस के अनुसार, तीनों के खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126 और 170 के तहत कार्रवाई की गई थी। रिहाई के दौरान प्रत्येक नेता के लिए 50 हजार रुपये का जमानती बॉन्ड भरा गया। शर्तों के मुताबिक, उन्हें एक साल तक शांति बनाए रखने और अच्छा व्यवहार करने का आश्वासन देना था।

    प्रदर्शन से पहले हुई थी पुलिस कार्रवाई

    CJP के ये नेता मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन करने वाले थे। यह मांग मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) में कथित गड़बड़ियों को लेकर उठाई जा रही थी।

    विपक्षी दलों और विभिन्न समूहों ने भी मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए चुनाव आयोग से जवाबदेही की मांग की है। इसी मुद्दे को लेकर दिल्ली में विरोध प्रदर्शन की तैयारी की जा रही थी।

    बॉन्ड को लेकर क्या है CJP का कहना?

    पार्टी की ओर से स्पष्ट किया गया कि बॉन्ड का उद्देश्य शांति और अच्छे व्यवहार को सुनिश्चित करना था, न कि नेताओं को विरोध प्रदर्शन से रोकना। इस सफाई के जरिए पार्टी ने बॉन्ड की शर्तों और प्रदर्शन करने के अपने इरादे के बीच अंतर स्पष्ट करने की कोशिश की है।

    फिलहाल, नेताओं की रिहाई के बाद भी मतदाता सूची संशोधन और चुनाव आयोग की जवाबदेही का मुद्दा राजनीतिक बहस के केंद्र में बना हुआ है। पुलिस कार्रवाई और बॉन्ड की शर्तों को लेकर CJP का रुख सामने आ चुका है, जबकि मामले से जुड़े अन्य पक्षों की प्रतिक्रिया के आधार पर आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।

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