Last updated: October 13th, 2026 at 10:04 am

दिल्ली के जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाए जाने के मुद्दे पर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बीजेपी सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने इस फैसले को शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक विरोध पर रोक लगाने की कोशिश बताते हुए सरकार की आलोचना की। अखिलेश ने आरोप लगाया कि बीजेपी जनता के आक्रोश से डरी हुई है और लोगों को उन जगहों से दूर रखना चाहती है, जहां सत्ता के शीर्ष पदों पर बैठे लोग मौजूद हैं।
‘जनता से डर रही है बीजेपी सरकार’
अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जंतर-मंतर को शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक प्रदर्शन के लिए प्रतिबंधित करना बीजेपी सरकार की सबसे बड़ी हार है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि राहत की बात यह है कि प्रदर्शनकारियों को किसी भूमिगत जगह पर जाने के लिए नहीं कहा गया, जहां उनके मुताबिक बीजेपी और उसके सहयोगी गुप्त बैठकें करते हैं।
सपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि बीजेपी सरकार जनता के गुस्से से बचने के लिए उन स्थानों पर लोगों की पहुंच सीमित करना चाहती है, जहां सत्ता के शीर्ष पदों पर बैठे लोग मौजूद हैं।
‘लोक कल्याण मार्ग पर दी जाए प्रदर्शन की जगह’
अखिलेश यादव ने अपने बयान में लोक कल्याण मार्ग का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता के कल्याण से जुड़े मुद्दों पर प्रदर्शन करने के लिए लोक कल्याण मार्ग पर ही कोई जगह दे दी जानी चाहिए।
उन्होंने तर्क दिया कि इससे नामकरण को सार्थक बनाने का अवसर मिलेगा और जनता की मांगें सीधे सत्ता के शीर्ष स्तर तक पहुंच सकेंगी। उनके मुताबिक, जब लोगों की बात सीधे जिम्मेदार नेतृत्व तक पहुंचेगी, तो समस्याओं के समाधान का रास्ता भी जल्दी निकल सकता है।
जंतर-मंतर को लेकर क्यों बढ़ी राजनीतिक बयानबाजी?
जंतर-मंतर लंबे समय से दिल्ली में राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर विरोध प्रदर्शन का प्रमुख स्थल रहा है। इसे प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाए जाने की खबर के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।
अखिलेश यादव ने इस फैसले को लोकतांत्रिक विरोध से जोड़ते हुए बीजेपी सरकार पर सवाल उठाए हैं। हालांकि, जंतर-मंतर से संबंधित प्रशासनिक फैसले के दायरे, कारणों और लागू नियमों की स्थिति स्पष्ट होने पर ही इसके प्रभाव का पूरा आकलन किया जा सकता है।
फिलहाल, इस मुद्दे पर अखिलेश यादव के बयान ने राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है। सपा प्रमुख ने सरकार पर जनता की आवाज से बचने का आरोप लगाया है, जबकि फैसले से जुड़े आधिकारिक कारणों और नियमों की जानकारी इस विवाद को समझने के लिए अहम होगी।
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