Last updated: October 15th, 2026 at 08:17 am

झारखंड में खनिजों से होने वाली कमाई को लेकर केंद्र और राज्य सरकार के बीच विवाद गहराता नजर आ रहा है। राज्य के खान विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, 12 अक्टूबर तक झारखंड सरकार ने मिनरल बेयरिंग लैंड सेस के रूप में 6,224.17 करोड़ रुपये की वसूली की है। वहीं, खनन रॉयल्टी से 5,639.41 करोड़ रुपये मिले हैं। यानी राज्य को रॉयल्टी के मुकाबले सेस से अधिक राजस्व प्राप्त हुआ है।
खान विभाग के अनुसार, रॉयल्टी, सेस और अन्य शुल्कों को मिलाकर चालू वित्त वर्ष में अब तक 13,100.93 करोड़ रुपये का राजस्व जुटाया जा चुका है। वित्तीय वर्ष के छह महीने अभी बाकी हैं। ऐसे में विभाग को उम्मीद है कि पूरे साल खनिजों से होने वाली कमाई में और बढ़ोतरी होगी।
केंद्र के नए कानून के बाद भी जारी है सेस की वसूली
खनिजों पर सेस की वसूली को लेकर विवाद की वजह खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन अधिनियम में किए गए बदलाव हैं। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, संशोधित कानून 18 अगस्त से लागू हुआ, जिसके बाद खनिजों पर राज्य सरकारों की सेस वसूली को लेकर कानूनी स्थिति चर्चा में आ गई है।
झारखंड सरकार ने इस व्यवस्था का विरोध किया है और राज्य में सेस वसूली बंद करने का आदेश जारी नहीं किया। नतीजतन, खनिज परिवहन के लिए चालान जारी करने वाले सरकारी पोर्टल पर सेस भुगतान की शर्त लागू रहने की बात सामने आई है।
सेस जमा करने पर ही मिल रहा खनिज परिवहन का चालान
रिपोर्ट के अनुसार, झारखंड के जिम्स पोर्टल से सेस का भुगतान किए बिना खनिज परिवहन का चालान जारी नहीं हो रहा है। कंपनियों को भुगतान करने के बाद ही चालान मिल रहा है। इसी व्यवस्था के कारण राज्य सरकार को सेस के रूप में लगातार राजस्व प्राप्त हो रहा है।
वित्तीय वर्ष 2025-26 में झारखंड को मिनरल बेयरिंग लैंड सेस से 7,485.67 करोड़ रुपये मिले थे। वहीं, रॉयल्टी और अन्य शुल्कों से 11,113.75 करोड़ रुपये की वसूली हुई थी। इस तरह कुल राजस्व 18,599.42 करोड़ रुपये रहा था।
कोयला, बॉक्साइट और लौह अयस्क पर बढ़ाई गई थीं दरें
झारखंड सरकार ने दिसंबर 2025 में मिनरल बेयरिंग लैंड सेस की नई दरें अधिसूचित की थीं। रिपोर्ट के मुताबिक, इन दरों में कई खनिजों पर सेस बढ़ाया गया।
– कोयला: 250 रुपये से बढ़ाकर 450 रुपये प्रति टन।
– लौह अयस्क: 400 रुपये से बढ़ाकर 600 रुपये प्रति टन।
– नॉन-मेटलर्जिकल बॉक्साइट: 116 रुपये से बढ़ाकर 180 रुपये प्रति टन।
– चूना पत्थर: 40 रुपये से बढ़ाकर 100 रुपये प्रति टन।
– ग्रेफाइट: 30 रुपये से बढ़ाकर 250 रुपये प्रति टन।
मेटलर्जिकल ग्रेड बॉक्साइट और कुछ अन्य खनिजों पर सेस की दर अलग-अलग मानकों से तय किए जाने की बात भी रिपोर्ट में कही गई है।
इस वित्तीय वर्ष में 25 हजार करोड़ रुपये से अधिक का लक्ष्य
खान विभाग ने चालू वित्त वर्ष में रॉयल्टी, सेस और अन्य शुल्कों के जरिए 25 हजार करोड़ रुपये से अधिक राजस्व जुटाने का लक्ष्य रखा है। रिपोर्ट में अनुमान जताया गया है कि इस साल सेस से मिलने वाली राशि पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले काफी बढ़ सकती है।
हालांकि, केंद्र के संशोधित कानून और झारखंड में जारी सेस वसूली के बीच कानूनी स्थिति तथा आगे होने वाले फैसलों पर नजर बनी रहेगी। फिलहाल राज्य सरकार के राजस्व आंकड़े बताते हैं कि खनिजों पर सेस उसकी कमाई का एक बड़ा स्रोत बना हुआ है।
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