Last updated: October 15th, 2026 at 09:04 am

उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य में तीन महीने के भीतर पंचायत चुनाव कराने का निर्देश दिया है। अदालत के इस फैसले के बाद प्रदेश सरकार और कांग्रेस की प्रतिक्रिया सामने आई है। राज्य सरकार ने चुनाव कराने में सहयोग का भरोसा दिया है, जबकि कांग्रेस ने फैसले को लोकतंत्र की जीत बताते हुए सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं।
चुनाव कराने को तैयार सरकार, आयोग के फैसले पर नजर
प्रदेश सरकार में मंत्री अनिल राजभर ने कहा कि सरकार को पंचायत चुनाव कराने में कोई आपत्ति नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि चुनाव कराने की जिम्मेदारी राज्य निर्वाचन आयोग की है। आयोग जब चुनाव की प्रक्रिया आगे बढ़ाएगा, तब सरकार की ओर से पूरा सहयोग किया जाएगा।
अब राज्य निर्वाचन आयोग के सामने हाईकोर्ट के निर्देश के मुताबिक चुनाव कार्यक्रम तैयार करने और निर्धारित समयसीमा में प्रक्रिया पूरी कराने की चुनौती होगी।
कांग्रेस ने फैसले को बताया लोकतंत्र की जीत
उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष आराधना मिश्रा ‘मोना’ ने हाईकोर्ट के आदेश का स्वागत करते हुए इसे लोकतंत्र की जीत बताया। उन्होंने कहा कि पंचायत व्यवस्था लोकतंत्र की बुनियादी इकाई है और स्थानीय विकास में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। कांग्रेस अध्यक्ष के मुताबिक, निर्वाचित पंचायत प्रतिनिधि स्थानीय समस्याओं को समझकर उनके समाधान की दिशा में काम करते हैं। ऐसे में पंचायतों की व्यवस्था को मजबूत बनाए रखना जरूरी है।
आराधना मिश्रा का सवाल- सरकार को डर क्या था?
आराधना मिश्रा ने आरोप लगाया कि पंचायत चुनाव समय पर कराए जाने चाहिए थे, ताकि निर्वाचित प्रतिनिधि स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों की जिम्मेदारी संभाल सकें। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर सरकार को पंचायत चुनाव कराने में क्या डर था? उन्होंने उम्मीद जताई कि राज्य सरकार हाईकोर्ट के आदेश का पालन करेगी और तीन महीने के भीतर चुनाव कराने की दिशा में कदम उठाएगी।
प्रशासकों की नियुक्ति को भी अदालत की मंजूरी
इस मामले में हाईकोर्ट ने पंचायत चुनाव तीन महीने के भीतर कराने का निर्देश देने के साथ पंचायतों में प्रशासकों की नियुक्ति से संबंधित शासनादेश को भी वैध माना है। इसके चलते प्रशासक अगले तीन महीने तक अपने पदों पर बने रह सकेंगे।
अब चुनाव प्रक्रिया को तय समयसीमा में पूरा करना राज्य निर्वाचन आयोग और प्रदेश सरकार के लिए अहम होगा। वहीं, अदालत के फैसले के बाद पंचायत चुनाव को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज होने के आसार हैं।
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