Last updated: October 15th, 2026 at 10:17 am

दिल्ली में 10 अक्टूबर को सिटिजन जस्टिस एंड पीस (CJP) से जुड़े नेताओं और प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। दिल्ली पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार ने अदालत में हलफनामा दाखिल कर पुलिस की कार्रवाई का बचाव किया है। उन्होंने कहा कि मार्च की अनुमति रद्द करने और प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने का फैसला कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी था।
पुलिस कमिश्नर की ओर से दाखिल जवाब में पिछले प्रदर्शनों के दौरान हुई घटनाओं का जिक्र किया गया है। हलफनामे के मुताबिक, 20 जुलाई को हुए प्रदर्शन में 240 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए थे। वहीं, 6, 7 और 8 अक्टूबर को हुए प्रदर्शनों के दौरान मध्य दिल्ली में यातायात प्रभावित हुआ और 12 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए।
पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था का दिया हवाला
सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली पुलिस की ओर से दलील दी गई कि राजधानी में संसद, सुप्रीम कोर्ट और अन्य महत्वपूर्ण संस्थानों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कार्रवाई की गई थी। पुलिस कमिश्नर ने दावा किया कि समय रहते कदम उठाने से कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका को टाला जा सका।
हलफनामे में यह भी कहा गया कि 10 अक्टूबर को हिरासत में लिए गए लोगों को कुछ ही घंटों के भीतर रिहा कर दिया गया था। पुलिस के अनुसार, हिरासत के दौरान उन्हें भोजन भी उपलब्ध कराया गया और उन्हें लॉकअप या जेल में नहीं रखा गया।
अवमानना नोटिस वापस लेने की मांग
दिल्ली पुलिस कमिश्नर ने सुप्रीम कोर्ट से मामले में जारी अवमानना नोटिस वापस लेने का अनुरोध किया है। पुलिस का पक्ष है कि प्रदर्शन के दौरान संभावित कानून-व्यवस्था संबंधी समस्याओं को देखते हुए कार्रवाई की गई थी। अब इस मामले में अदालत का रुख महत्वपूर्ण होगा। पुलिस की दलीलों और मामले से जुड़े अन्य पक्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।
केंद्रीय गृह सचिव ने भी मांगी बिना शर्त माफी
इसी मामले से संबंधित कार्यवाही में केंद्रीय गृह सचिव ने सुप्रीम कोर्ट से बिना शर्त माफी मांगी है। उन्होंने अदालत को बताया कि दिल्ली पुलिस की ओर से 10 अक्टूबर को रात 10 बजे तक एक दिन के लिए मोबाइल इंटरनेट सेवाएं निलंबित करने का अनुरोध प्राप्त हुआ था।
गृह सचिव के मुताबिक, पुलिस ने सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित होने से रोकने के उद्देश्य से यह अनुरोध किया था। उन्होंने अदालत के समक्ष इस कदम को उचित ठहराने की दलील दी। दिल्ली में प्रदर्शनकारियों की हिरासत, मार्च की अनुमति रद्द करने और इंटरनेट सेवा निलंबित करने से जुड़े इन घटनाक्रमों पर अब सुप्रीम कोर्ट की आगे की कार्यवाही पर नजर रहेगी।
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