Last updated: October 15th, 2026 at 03:32 pm

उत्तर प्रदेश में विधान परिषद की 11 शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की सीटों पर होने वाले चुनाव से पहले राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी (सपा) ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रदेश सरकार के कुछ वरिष्ठ नेताओं पर चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए निर्वाचन आयोग का दरवाजा खटखटाया है। पार्टी ने मुख्यमंत्री और दोनों उपमुख्यमंत्रियों के कार्यक्रमों की निगरानी कराने तथा जरूरत पड़ने पर कार्रवाई करने की मांग की है। वहीं, सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों का मुद्दा उठाते हुए कार्यकर्ताओं से सतर्क रहने की अपील की है।
सपा की शिकायत के मुताबिक, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कुछ सरकारी कार्यक्रम ऐसे समय आयोजित किए गए, जब विधान परिषद चुनाव की प्रक्रिया चल रही है। पार्टी का आरोप है कि इन कार्यक्रमों और घोषणाओं से शिक्षक तथा स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश हो सकती है। सपा ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर मुख्यमंत्री के कार्यक्रमों की वीडियोग्राफी कराने और रिकॉर्ड की जांच के बाद यदि आचार संहिता का उल्लंघन पाया जाए तो उचित कार्रवाई करने की मांग की है।
पार्टी ने उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक की गतिविधियों पर भी सवाल उठाए हैं। सपा का आरोप है कि दोनों नेता संबंधित निर्वाचन क्षेत्रों में सक्रिय रहकर चुनाव को प्रभावित कर सकते हैं। पार्टी ने अधिकारियों पर दबाव बनाए जाने की आशंका भी जताई है। हालांकि, ये सभी आरोप सपा की ओर से लगाए गए हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि या निर्वाचन आयोग की ओर से अंतिम निर्णय सामने आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।
उत्तर प्रदेश में विधान परिषद की 11 सीटों के लिए मतदान 23 अक्टूबर को निर्धारित है। इनमें शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों की सीटें शामिल हैं। इन चुनावों में आम विधानसभा चुनावों की तरह सभी मतदाता मतदान नहीं करते, बल्कि संबंधित निर्वाचन क्षेत्र की निर्धारित मतदाता सूची में शामिल पात्र मतदाता ही वोट डालते हैं। इसी कारण उम्मीदवारों और राजनीतिक दलों के लिए शिक्षक, स्नातक तथा संबंधित मतदाता समूहों तक पहुंच बनाना महत्वपूर्ण माना जाता है।
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी मतदाता सूची को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। 15 अक्टूबर को लखनऊ में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ जगहों पर मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया में अनियमितताएं हो सकती हैं। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से मतदाता सूची की बारीकी से जांच करने और यह सुनिश्चित करने को कहा कि किसी योग्य मतदाता का नाम गलत तरीके से न हटे। उन्होंने एक व्यक्ति के नाम पर कई प्रविष्टियों और कथित फर्जी वोटों के मुद्दे को भी उठाया।
अखिलेश यादव ने दावा किया कि उनकी पार्टी ने लगभग 100 विधानसभा क्षेत्रों में मतदाता सूची से संबंधित शिकायतें की हैं। उन्होंने कार्यकर्ताओं से बूथ स्तर पर सक्रिय रहने और मतदाता सूची में गड़बड़ी मिलने पर संबंधित अधिकारियों के समक्ष शिकायत दर्ज कराने की अपील की। सपा प्रमुख ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी दोहराई।
वहीं, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर विपक्ष और निर्वाचन आयोग के बीच विवाद पहले से जारी है। विपक्षी दलों का कहना है कि पुनरीक्षण की प्रक्रिया में पात्र मतदाताओं के नाम हटने का खतरा है, जबकि मतदाता सूची को अद्यतन और त्रुटिरहित बनाना चुनावी व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस विवाद पर अलग-अलग स्तरों पर कानूनी और राजनीतिक प्रक्रिया जारी है। आरोपों की वास्तविकता का निर्धारण दस्तावेजों, आधिकारिक रिकॉर्ड और सक्षम संस्थाओं की जांच के आधार पर ही किया जा सकता है।
सपा की शिकायत ने आगामी MLC चुनावों से पहले सत्तारूढ़ भाजपा और विपक्ष के बीच टकराव को और बढ़ा दिया है। भाजपा की ओर से चुनावी गतिविधियों को लेकर अपना पक्ष रखे जाने और निर्वाचन आयोग की प्रतिक्रिया पर भी नजर रहेगी। चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना, मतदाताओं को सही जानकारी उपलब्ध कराना और शिकायतों का निष्पक्ष निपटारा करना इस समय प्रमुख मुद्दे हैं।
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