Human Live Media

HomeNewsमेरठ ब्लू ड्रम हत्याकांड में मुस्कान और साहिल को फांसी की सजा, सौरभ राजपूत की हत्या के मामले में अदालत का बड़ा फैसला

मेरठ ब्लू ड्रम हत्याकांड में मुस्कान और साहिल को फांसी की सजा, सौरभ राजपूत की हत्या के मामले में अदालत का बड़ा फैसला

  उत्तर प्रदेश के मेरठ में चर्चित ब्लू ड्रम हत्याकांड में अदालत ने मुस्कान रस्तोगी और उसके साथी साहिल शुक्ला
muskan-sahil-1791975159

 

Table of Contents

    उत्तर प्रदेश के मेरठ में चर्चित ब्लू ड्रम हत्याकांड में अदालत ने मुस्कान रस्तोगी और उसके साथी साहिल शुक्ला को मृत्युदंड की सजा सुनाई है। इस मामले में व्यापारी नौसेना अधिकारी सौरभ राजपूत की हत्या की गई थी। हत्या के बाद उनके शव के टुकड़े करके सीमेंट से भरे नीले ड्रम में छिपा दिया गया था। इस सनसनीखेज वारदात ने पूरे देश में लोगों को झकझोर दिया था। अदालत के फैसले के बाद एक बार फिर यह मामला सुर्खियों में आ गया है।

     

    अदालत ने दोनों आरोपियों को पहले दोषी ठहराया था और बुधवार को सजा का ऐलान किया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अपराध की गंभीरता, हत्या की परिस्थितियों और सबूतों का उल्लेख करते हुए कठोरतम सजा की मांग की थी। अदालत ने मामले को गंभीर अपराध मानते हुए दोनों दोषियों को मृत्युदंड दिया। यह फैसला लंबे समय से चल रहे मुकदमे का एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।

     

    सौरभ राजपूत की हत्या मार्च 2025 में हुई थी। वह मर्चेंट नेवी में कार्यरत थे और विदेश से मेरठ लौटे थे। अभियोजन पक्ष के अनुसार, सौरभ की पत्नी मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला ने मिलकर उनकी हत्या की साजिश रची थी। जांच में सामने आया कि हत्या के बाद शव को छिपाने के लिए उसे कई हिस्सों में काटा गया और नीले प्लास्टिक के ड्रम में रखकर सीमेंट तथा अन्य सामग्री से ढक दिया गया। इस तरीके से शव को छिपाने की कोशिश की गई, ताकि अपराध का पता देर से चले।

     

    मामला तब सामने आया जब सौरभ के लापता होने और घर की परिस्थितियों को लेकर संदेह बढ़ा। पुलिस ने जांच शुरू की और घटनास्थल से मिले साक्ष्यों के आधार पर मामले की कड़ियां जोड़ीं। नीले ड्रम में शव मिलने के बाद यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया। पुलिस ने जांच के दौरान आरोपियों से पूछताछ की और उपलब्ध सबूतों को अदालत के सामने रखा।

     

    मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने घटनाक्रम, फॉरेंसिक साक्ष्य और गवाहों के बयानों के आधार पर अपना पक्ष रखा। रिपोर्टों के मुताबिक, मुकदमे में 22 अभियोजन गवाहों की गवाही दर्ज की गई और सुनवाई कई चरणों में आगे बढ़ी। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहियों पर विचार करने के बाद दोनों आरोपियों को दोषी ठहराया। इसके बाद सजा को लेकर दोनों पक्षों की दलीलें सुनी गईं।

     

    इस मामले में मृत्युदंड का फैसला अपराध की गंभीरता को लेकर अदालत की टिप्पणी के कारण भी चर्चा में है। हालांकि, भारतीय न्याय व्यवस्था में मृत्युदंड के मामलों में आगे कानूनी प्रक्रिया का अवसर उपलब्ध रहता है। दोषियों को निर्धारित कानूनी प्रावधानों के तहत उच्च अदालत में अपील करने का अधिकार है। इसलिए अदालत के फैसले के बाद भी मामले में आगे की न्यायिक प्रक्रिया महत्वपूर्ण रहेगी।

     

    ब्लू ड्रम हत्याकांड ने घरेलू संबंधों में हिंसा, आपसी विवाद और अपराध को छिपाने की कोशिश जैसे मुद्दों पर व्यापक चर्चा को जन्म दिया था। इस घटना ने यह भी दिखाया कि पुलिस जांच में फॉरेंसिक साक्ष्य, गवाहों के बयान और घटनास्थल से प्राप्त सामग्री कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। किसी भी गंभीर आपराधिक मामले में आरोपों का फैसला भावनाओं या सार्वजनिक चर्चा के आधार पर नहीं, बल्कि अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों और कानून के अनुसार किया जाता है।

     

    सौरभ राजपूत के परिवार के लिए यह फैसला लंबे इंतजार के बाद आया है। अदालत के निर्णय से मामले की सुनवाई का एक बड़ा चरण पूरा हुआ है, लेकिन आगे अपील या अन्य कानूनी प्रक्रियाओं की संभावना बनी रह सकती है। इस मामले ने एक बार फिर गंभीर अपराधों की जांच, न्यायिक प्रक्रिया और पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने के महत्व को रेखांकित किया है।

    Loading

    Comments are off for this post.