Last updated: October 21st, 2026 at 10:23 am

जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले के थानामंडी में मशहूर इस्लामिक विद्वान मौलाना मुफ्ती मुनीर हुसैन कासमी के इंतकाल पर बड़ी संख्या में लोगों ने शोक व्यक्त किया। मंगलवार, 20 अक्टूबर को उनकी नमाज-ए-जनाजा में हजारों लोग शामिल हुए। सेंट्रल जामा मस्जिद परिसर में भावुक माहौल के बीच नमाज अदा की गई। इस दौरान जम्मू-कश्मीर के विभिन्न इलाकों से आए उलेमा और स्थानीय लोगों ने उन्हें अंतिम विदाई दी।
मुफ्ती मुनीर हुसैन कासमी का 87 वर्ष की उम्र में सोमवार को संक्षिप्त बीमारी के बाद निधन हो गया था। उनके इंतकाल की खबर फैलते ही पीर पंजाल क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। धार्मिक और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोगों ने उनके निधन को बड़ी क्षति बताया।
वसीयत के मुताबिक कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक
मुफ्ती कासमी की नमाज-ए-जनाजा थानामंडी की सेंट्रल जामा मस्जिद परिसर में अदा की गई। इसके बाद उनकी वसीयत के अनुसार उन्हें थानामंडी के कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक किया गया। अंतिम विदाई में बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी उनके प्रति लोगों के सम्मान और जुड़ाव को दर्शाती है।
पांच दशकों तक धार्मिक और शैक्षणिक सेवाएं
मौलाना मुफ्ती मुनीर हुसैन कासमी का जन्म वर्ष 1938 में शाहदरा शरीफ के एक पहाड़ी गांव में हुआ था। उन्होंने लगभग पांच दशकों तक धार्मिक और शैक्षणिक सेवाएं दीं। शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान को भी विशेष रूप से याद किया जा रहा है।
उन्होंने वर्ष 1979 में थानामंडी में मदरसा काशिफ-उल-उलूम की स्थापना की। इसके बाद 1996 में सेंट्रल जामा मस्जिद में मदरसा अल-तौहीद की शुरुआत की। इन संस्थानों के माध्यम से हजारों विद्यार्थियों ने धार्मिक शिक्षा हासिल की।
धार्मिक और सामाजिक हस्तियों ने जताया दुख
मुफ्ती कासमी के निधन पर कई विद्वानों, साहित्यकारों और राजनीतिक व सामाजिक हस्तियों ने शोक व्यक्त किया। लोगों ने धार्मिक शिक्षा के प्रसार और समाज के लिए उनके योगदान को याद करते हुए इसे पूरे क्षेत्र के लिए अपूरणीय क्षति बताया।
उनके निधन से थानामंडी और आसपास के इलाकों में शोक का माहौल है। उनके द्वारा स्थापित शैक्षणिक संस्थान और दशकों तक दी गई सेवाएं उनकी विरासत के रूप में याद की जाएंगी।
![]()
Comments are off for this post.