Last updated: October 23rd, 2026 at 09:06 am

कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल में हुई भगदड़ के बाद घटना को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। हादसे में 19 लोगों की मौत की खबर के बीच बीजेपी विधायक रत्ना देबनाथ के बयान ने चर्चा तेज कर दी है। उन्होंने भीड़ जुटने के लिए लोगों की मानसिकता को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि अगर लोग बारिश में भीगकर पंडाल जाने से बचते, तो इतनी भीड़ नहीं होती।
रत्ना देबनाथ से जब हादसे की जिम्मेदारी को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा कि गलती आम लोगों की भी है। उनके अनुसार, लोगों को अपने स्वार्थ से ऊपर उठकर सोचना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर लोग बारिश में भीग जाते, तो आखिर क्या हो जाता?
सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल, विधायक ने कही ये बात
हादसे के बाद पंडाल के निकास द्वार पर पुलिस की तैनाती और सुरक्षा इंतजामों में संभावित लापरवाही को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। इस पर रत्ना देबनाथ ने कहा कि वह घटना के समय मौके पर मौजूद नहीं थीं, इसलिए सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कोई टिप्पणी नहीं कर सकतीं।
जांच के संबंध में उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री की ओर से पहले ही विशेष जांच टीम (SIT) गठित की जा चुकी है। ऐसे में उन्होंने अलग से किसी अन्य मांग की बात नहीं कही।
पंडाल में कथित घोषणा के मामले में कोषाध्यक्ष गिरफ्तार
दूसरी ओर, भगदड़ मामले की जांच में जुटी कोलकाता पुलिस ने दुर्गा पूजा समिति के कोषाध्यक्ष संजीत राहा उर्फ सेंटू को गिरफ्तार किया है। पुलिस के डिटेक्टिव डिपार्टमेंट ने उन्हें नादिया जिले से पकड़ा।
जांच के अनुसार, हादसे वाली रात पंडाल में बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। इसी दौरान कथित तौर पर पंडाल का एक हिस्सा गिरने की आशंका को लेकर घोषणा की गई थी। इसके बाद भगदड़ मचने की बात सामने आई है। पुलिस अब इस घोषणा और भगदड़ के बीच संभावित संबंध की जांच कर रही है।
इस मामले में पूजा समिति के सचिव और उपाध्यक्ष की गिरफ्तारी पहले ही हो चुकी है। अब पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर रही है, ताकि घटना के क्रम, सुरक्षा इंतजामों और संभावित जिम्मेदारी से जुड़े पहलुओं का पता लगाया जा सके।
हादसे के बाद एक तरफ पुलिस जांच जारी है, वहीं दूसरी तरफ विधायक के बयान ने लोगों की जिम्मेदारी और आयोजन स्थल की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बहस छेड़ दी है।
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