Last updated: October 23rd, 2026 at 02:32 pm

एशियन पैरा गेम्स 2026 में भारतीय पैरा तीरंदाज स्वाति चौधरी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए रजत पदक अपने नाम किया। 22 अक्टूबर को खेले गए महिला W1 व्यक्तिगत तीरंदाजी मुकाबले के फाइनल में स्वाति को चीन की तीरंदाज सेन मेंगकान के खिलाफ 4-6 से हार का सामना करना पड़ा। हालांकि, रजत पदक जीतकर उन्होंने भारतीय पैरा तीरंदाजी के इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की। इस वर्ग में भारत का यह पहला पदक है, जिससे देश के खेल जगत में खुशी का माहौल है।
स्वाति चौधरी ने प्रतियोगिता में अपने प्रदर्शन से यह साबित किया कि मजबूत इच्छाशक्ति, निरंतर अभ्यास और आत्मविश्वास के दम पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं। एशियन पैरा गेम्स में उनका यह पदार्पण था और पहली ही भागीदारी में फाइनल तक पहुंचना अपने आप में उल्लेखनीय उपलब्धि रही। स्वाति ने पूरे मुकाबले में अच्छा प्रदर्शन किया और स्वर्ण पदक के लिए चीन की खिलाड़ी को कड़ी चुनौती दी।
फाइनल मुकाबले की शुरुआत भारतीय तीरंदाज के लिए शानदार रही। स्वाति ने पहले सेट में बेहतरीन निशाने लगाए और 25-17 के स्कोर से सेट जीतकर मुकाबले में 2-0 की बढ़त बना ली। उनकी शुरुआत से ऐसा लग रहा था कि वह स्वर्ण पदक जीतने की दिशा में मजबूत कदम बढ़ा रही हैं। हालांकि, चीन की सेन मेंगकान ने दूसरे सेट में वापसी की और 22-21 से सेट जीतकर मुकाबले को 2-2 की बराबरी पर पहुंचा दिया।
तीसरे सेट में स्वाति ने फिर से अपनी लय हासिल की। उन्होंने दबाव के बीच सटीक निशाने लगाते हुए यह सेट 22-21 से जीत लिया। इसके साथ ही भारतीय खिलाड़ी ने 4-2 की बढ़त बना ली। इस समय स्वाति स्वर्ण पदक से केवल एक सेट दूर थीं और मुकाबले में उनकी स्थिति मजबूत दिखाई दे रही थी।
लेकिन चौथे सेट में चीनी तीरंदाज ने शानदार वापसी की। सेन मेंगकान ने अपने तीनों तीरों से 10-10 अंक हासिल करते हुए कुल 30 अंक बनाए, जबकि स्वाति 20 अंक ही हासिल कर सकीं। इस प्रदर्शन के साथ चीन की खिलाड़ी ने सेट जीतकर स्कोर 4-4 कर दिया। अब स्वर्ण पदक का फैसला अंतिम सेट में होना था।
निर्णायक सेट में सेन मेंगकान ने दबाव को बेहतर तरीके से संभाला और 28 अंक हासिल किए। स्वाति इस सेट में 21 अंक बना सकीं। इस तरह चीनी खिलाड़ी ने 6-4 से मुकाबला जीतकर स्वर्ण पदक हासिल किया, जबकि स्वाति चौधरी को रजत पदक से संतोष करना पड़ा। मुकाबले का परिणाम भले ही भारतीय खिलाड़ी के पक्ष में नहीं रहा, लेकिन फाइनल तक उनका सफर और ऐतिहासिक पदक जीतना भारतीय खेलों के लिए बड़ी उपलब्धि है।
महिला W1 वर्ग पैरा तीरंदाजी की ऐसी श्रेणी है, जिसमें खिलाड़ियों को हाथों और पैरों से संबंधित गंभीर शारीरिक सीमाओं का सामना करना पड़ता है। इस वर्ग में खिलाड़ी व्हीलचेयर पर बैठकर निशाना लगाते हैं। ऐसे मुकाबलों में सटीकता, संतुलन, एकाग्रता और मानसिक मजबूती की अहम भूमिका होती है। स्वाति ने इन चुनौतियों के बावजूद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
स्वाति चौधरी की इस सफलता पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उन्हें बधाई दी। उन्होंने इस उपलब्धि को विशेष बताते हुए स्वाति के दृढ़ संकल्प और मेहनत की सराहना की। प्रधानमंत्री ने उम्मीद जताई कि वह आगे भी देश को गौरवान्वित करती रहेंगी।
स्वाति का रजत पदक भारतीय पैरा खिलाड़ियों की बढ़ती क्षमता और अंतरराष्ट्रीय खेलों में देश की मजबूत होती उपस्थिति का प्रतीक है। उनकी उपलब्धि उन खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा है, जो कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए लगातार मेहनत कर रहे हैं। एशियन पैरा गेम्स में स्वाति की सफलता ने यह संदेश दिया है कि खेलों में समर्पण और आत्मविश्वास के साथ इतिहास रचा जा सकता है।
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