Last updated: October 25th, 2026 at 11:08 am

जनता दल यूनाइटेड (JDU) से छह साल के लिए निष्कासित किए जाने के बाद मोकामा के विधायक अनंत सिंह ने पार्टी नेतृत्व के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। रविवार को अपने सरकारी आवास पर जनसुराज के प्रत्याशी अनुज सिंह के साथ मौजूद अनंत सिंह ने निष्कासन पर नाराजगी जताई और अलग पार्टी बनाने की संभावना भी जाहिर की। उन्होंने जदयू को चुनौती देते हुए कहा, “जदयू का खाता नहीं खुलेगा, खाता नहीं खुलेगा।”
अनंत सिंह ने दावा किया कि उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का साथ देने के लिए कई कुर्बानियां दीं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें पार्टी से निकाल दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी में अब पुराने नेतृत्व की स्थिति पहले जैसी नहीं रही और कुछ लोगों ने संगठन पर अपना प्रभाव बढ़ा लिया है।
‘नीतीश कुमार के लिए हमने बहुत कुर्बानी दी’
अनंत सिंह ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के प्रति अपनी पुरानी निष्ठा का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने मुश्किल समय में भी उनका साथ दिया। उन्होंने संजय झा पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि दिल्ली और मुंबई से आए लोगों ने पार्टी पर कब्जा कर लिया है।
अनंत सिंह ने यह भी दावा किया कि नीतीश कुमार को पार्टी के भीतर चल रही पूरी स्थिति की जानकारी नहीं है और जो कुछ हो रहा है, वह उनकी इच्छा के मुताबिक नहीं हो रहा है। हालांकि, ये अनंत सिंह के व्यक्तिगत आरोप हैं।
बहुमत परीक्षण का जिक्र कर बोले- ‘हम गद्दारी करके उनकी सरकार बचाए’
अनंत सिंह ने फरवरी 2024 में बिहार विधानसभा में हुए बहुमत परीक्षण का जिक्र किया। उस समय नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली सरकार को विधानसभा में बहुमत साबित करना था। अनंत सिंह ने कहा कि उस दौरान उन्होंने नीतीश कुमार की सरकार बचाने में भूमिका निभाई थी। उन्होंने कहा, “हम गद्दारी करके उनकी सरकार बचाए।” इस बयान के जरिए उन्होंने यह बताने की कोशिश की कि नीतीश कुमार का साथ देने के लिए उन्होंने राजनीतिक जोखिम उठाया था।
दरअसल, उस बहुमत परीक्षण के दौरान अनंत सिंह की पत्नी नीलम देवी राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की विधायक थीं, लेकिन उन्होंने नीतीश कुमार सरकार के पक्ष में मतदान किया था। उस समय राजद के तत्कालीन विधायक चेतन आनंद और प्रह्लाद यादव ने भी पार्टी के रुख से अलग जाकर सरकार का समर्थन किया था।
अनंत सिंह ने कहा कि नीतीश कुमार के लिए उनसे ज्यादा कुर्बानी किसने दी, यह अशोक चौधरी और सम्राट चौधरी से पूछा जा सकता है।
अशोक चौधरी और महेश्वर हजारी के परिवारों का दिया उदाहरण
जदयू की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए अनंत सिंह ने पार्टी में कथित दोहरे मापदंड का आरोप लगाया। उन्होंने पूछा कि जब अशोक चौधरी की बेटी शाम्भवी चौधरी ने लोकसभा चुनाव में समस्तीपुर सीट से लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के टिकट पर चुनाव लड़ा, तब अशोक चौधरी के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
उन्होंने महेश्वर हजारी के बेटे के दूसरे दल से चुनाव लड़ने का भी उल्लेख किया और पूछा कि उस मामले में कार्रवाई क्यों नहीं की गई। अनंत सिंह का सवाल था कि पार्टी ने कार्रवाई के लिए उन्हें ही क्यों चुना। ये सवाल उठाते हुए उन्होंने जदयू नेतृत्व से अपने खिलाफ की गई कार्रवाई का आधार स्पष्ट करने की मांग की।
नीरज कुमार का विरोध बना निष्कासन की वजह
अनंत सिंह को जदयू से निष्कासित किए जाने के पीछे पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव को लेकर उनका रुख प्रमुख वजह बताया जा रहा है। इस चुनाव में उन्होंने जदयू उम्मीदवार नीरज कुमार का विरोध किया और जनसुराज के प्रत्याशी अनुज सिंह का समर्थन किया था।
इस दौरान अनंत सिंह ने नीरज कुमार समेत जदयू के कई नेताओं पर तीखी टिप्पणियां भी की थीं। इसके बाद पार्टी ने उन्हें छह साल के लिए निष्कासित करने का फैसला लिया। जदयू ने अनंत सिंह की विधानसभा सदस्यता समाप्त करने की अनुशंसा भी विधानसभा अध्यक्ष से की है। यह अनुशंसा अपने आप में सदस्यता समाप्त होने का अंतिम फैसला नहीं है; इस पर सक्षम प्राधिकारी को निर्णय लेना होगा।
अलग पार्टी बनाएंगे अनंत सिंह?
निष्कासन के बाद अनंत सिंह ने अलग पार्टी बनाने की संभावना जताकर बिहार की राजनीति में नए सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, उन्होंने नई पार्टी के गठन, नाम या उसकी औपचारिक घोषणा को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी है। उनकी ओर से जदयू को दी गई चुनौती और पार्टी नेतृत्व पर लगाए गए आरोपों के बाद अब सबकी नजर उनके अगले कदम पर है। साथ ही यह भी देखना होगा कि जदयू नेतृत्व इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया देता है।
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